केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने इस समझौते की जानकारी साझा करते हुए इसे बिहार के विकास के लिए महत्वपूर्ण कदम बताया। इस दौरान बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, एनएचएआई के चेयरमैन संतोष कुमार यादव, एनएचएआई और बिहार सरकार के वरिष्ठ अधिकारी तथा अन्य गणमान्य लोग मौजूद रहे।
नदियों की गाद से बनेगी सड़क, बाढ़ के खतरे को कम करने की पहल
बिहार को नदियों का प्रदेश कहा जाता है। गंगा, कोसी, गंडक, फल्गु और बागमती जैसी नदियां राज्य की कृषि, अर्थव्यवस्था और जनजीवन का आधार हैं। हालांकि, इन नदियों में लगातार जमा हो रही गाद के कारण जलप्रवाह प्रभावित होता है। इससे जल निकासी की समस्या बढ़ती है और कई क्षेत्रों में मौसमी बाढ़ का खतरा भी गंभीर हो जाता है।
सरकार की नई योजना के तहत नदियों से वैज्ञानिक तरीके से गाद निकाली जाएगी। इसके बाद उपयुक्त गाद का इस्तेमाल राष्ट्रीय राजमार्गों के निर्माण में किया जाएगा। इस तरह नदी प्रबंधन और सड़क निर्माण को एक ही विकास योजना से जोड़ने की कोशिश की गई है।
केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी के मुताबिक, इस पहल से नदियों की जल-वहन क्षमता में सुधार होगा और राजमार्ग परियोजनाओं के लिए निर्माण सामग्री का एक वैकल्पिक स्रोत उपलब्ध होगा।
16 निर्माणाधीन हाईवे परियोजनाओं में इस्तेमाल होगी 243 लाख घन मीटर गाद
समझौते के तहत बिहार में फिलहाल चल रही 16 राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं में नदियों से निकाली गई कुल 243 लाख घन मीटर गाद का इस्तेमाल किया जाएगा। यह गाद निर्माण कार्य के लिए मुफ्त उपलब्ध कराई जाएगी।
इसके अलावा भविष्य में शुरू होने वाली 27 परियोजनाओं में लगभग 835 लाख घन मीटर गाद के उपयोग की योजना है। इस व्यवस्था से राजमार्ग निर्माण के लिए जरूरी सामग्री की उपलब्धता बढ़ेगी और परियोजनाओं की लागत कम करने में भी सहायता मिल सकती है।
सरकार का मानना है कि इस पहल से प्राकृतिक ऊपरी मिट्टी यानी टॉपसॉइल के अनावश्यक इस्तेमाल को सीमित किया जा सकेगा। साथ ही, निर्माण सामग्री के लिए दूसरे संसाधनों पर निर्भरता भी कम होगी।
बिहार में 58 हजार करोड़ से अधिक की 39 हाईवे परियोजनाओं पर काम
बिहार में राष्ट्रीय राजमार्गों के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए बड़े स्तर पर काम चल रहा है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, राज्य में एनएचएआई की 39 परियोजनाएं निर्माणाधीन हैं। इनकी कुल लंबाई लगभग 1,561 किलोमीटर है और इन पर करीब 58,340 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं।
इसके अलावा लगभग 1,982 किलोमीटर लंबाई की 11 नई परियोजनाएं प्रस्तावित हैं। इनकी अनुमानित लागत 1,85,200 करोड़ रुपये बताई गई है।
केंद्र सरकार का कहना है कि वर्ष 2014 के बाद से बिहार में सड़क और पुलों के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने पर विशेष जोर दिया गया है। इसी क्रम में राज्य की प्रमुख नदियों पर करीब 29 नए पुलों का निर्माण किया जा रहा है, जिससे अलग-अलग क्षेत्रों के बीच संपर्क बेहतर बनाने में मदद मिलेगी।
वैज्ञानिक तरीके से होगी नदियों से गाद की निकासी
इस समझौते के तहत भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) आधुनिक और वैज्ञानिक तरीकों से गाद निकालने की प्रक्रिया का नेतृत्व करेगा। इसके बाद निर्माण के लिए उपयुक्त गाद को संबंधित राजमार्ग परियोजनाओं तक पहुंचाया जाएगा।
इस पहल के कई संभावित फायदे बताए गए हैं। नदियों से अतिरिक्त गाद हटने पर जलप्रवाह और जल निकासी की स्थिति बेहतर हो सकती है। वहीं, सड़क निर्माण में इसका इस्तेमाल होने से परियोजनाओं के लिए निर्माण सामग्री की उपलब्धता बढ़ेगी।
इस योजना का एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि नदी प्रबंधन और बुनियादी ढांचे के विकास को अलग-अलग काम मानने के बजाय एक-दूसरे से जोड़कर आगे बढ़ाया जाएगा। इससे संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल और पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने में मदद मिल सकती है।
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी बोले- पानी का प्रबंधन बिहार की बड़ी चुनौती
समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर के दौरान मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने बिहार में बाढ़ और जल प्रबंधन की समस्या को राज्य की बड़ी चुनौतियों में शामिल बताया।
उन्होंने कहा, “बिहार की कमजोरी सिर्फ दो हैं, जिनमें एक आबादी और दूसरा पानी है। आज केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी के नेतृत्व में इतना बड़ा समझौता हो रहा है, इसके लिए मैं धन्यवाद देता हूं। अगर यहां हमने नदियों को व्यवस्थित कर लिया तो डर 100 प्रतिशत खत्म हो जाएगा।”
मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि बिहार के सामने पानी का प्रबंधन दूसरी बड़ी चुनौती है। उन्होंने भरोसा जताया कि नदी संजीवनी से जुड़ा यह समझौता राज्य की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने में मददगार साबित होगा।
बाढ़ प्रबंधन और सड़क विकास को जोड़ने वाला नया मॉडल
बिहार में नदियों से गाद निकालकर उसका इस्तेमाल राजमार्ग निर्माण में करना संसाधनों के दोहरे उपयोग की दिशा में एक अहम पहल है। इससे एक ओर नदियों की सफाई और जल निकासी की समस्या पर काम किया जा सकेगा, तो दूसरी ओर हाईवे परियोजनाओं के लिए निर्माण सामग्री भी उपलब्ध होगी।
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हालांकि, इस योजना की सफलता गाद की वैज्ञानिक निकासी, उसके पर्यावरणीय प्रभाव के आकलन और निर्माण में उसकी उपयुक्तता पर निर्भर करेगी। यदि इसे प्रभावी तरीके से लागू किया जाता है, तो यह बिहार में बाढ़ प्रबंधन, सड़क संपर्क और आर्थिक विकास को नई दिशा देने वाला मॉडल बन सकता है।








