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लिव-इन रिलेशनशिप पर इलाहाबाद हाईकोर्ट की बड़ी टिप्पणी 

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण मामले की सुनवाई करते हुए स्पष्ट किया है कि अंतरधार्मिक जोड़ों का लिव-इन रिलेशनशिप में रहना कानूनन अपराध नहीं है।

Gautam Rishi by Gautam Rishi
30 March 2026
in राज्यों से
0
लिव-इन रिलेशनशिप पर इलाहाबाद हाईकोर्ट की बड़ी टिप्पणी - Panchayati Times

इलाहाबाद हाईकोर्ट

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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण मामले की सुनवाई करते हुए स्पष्ट किया है कि अंतरधार्मिक जोड़ों का लिव-इन रिलेशनशिप में रहना कानूनन अपराध नहीं है। अदालत ने यह टिप्पणी ऐसे जोड़े की याचिका पर सुनवाई के दौरान की, जिन्होंने अपनी सुरक्षा की मांग की थी।

संविधान के तहत अधिकारों की पुष्टि

अदालत ने कहा कि अनुच्छेद 14, अनुच्छेद 15 और अनुच्छेद 21 के तहत हर व्यक्ति को समानता, भेदभाव से सुरक्षा और जीवन व व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार प्राप्त है। इन अधिकारों के मद्देनजर किसी भी बालिग व्यक्ति को अपनी पसंद के साथ रहने की स्वतंत्रता है।

लिव-इन को अपराध नहीं माना जा सकता

हाईकोर्ट ने अपने अवलोकन में कहा कि मौजूदा कानूनों और 2021 के संबंधित अधिनियम को देखते हुए यह नहीं कहा जा सकता कि अलग-अलग धर्मों के दो वयस्कों का साथ रहना अवैध है। अदालत ने स्पष्ट किया कि जब तक कोई अपराध नहीं किया गया है, तब तक ऐसे जोड़ों को संरक्षण मिलना चाहिए।

सुरक्षा देने का निर्देश

कोर्ट ने कहा कि यदि याचिकाकर्ताओं को किसी भी प्रकार का खतरा है, तो प्रशासन को उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करनी चाहिए। साथ ही यह भी निर्देश दिया गया कि यदि कोई व्यक्ति जबरन धर्म परिवर्तन या दबाव बनाने की कोशिश करता है, तो इसकी शिकायत पुलिस में दर्ज कराई जा सकती है।

बालिग होने पर अपनी पसंद का अधिकार

मामले की सुनवाई जस्टिस विवेक कुमार सिंह की एकल पीठ ने की। कोर्ट ने कहा कि एक बार जब व्यक्ति बालिग हो जाता है, तो उसे अपने जीवन के फैसले लेने की पूरी स्वतंत्रता होती है, और उसमें किसी भी प्रकार का हस्तक्षेप उचित नहीं है।

क्या था मामला?

एक हिंदू युवती और मुस्लिम युवक ने कोर्ट में याचिका दायर कर यह मांग की थी कि उनके परिवार या अन्य लोग उनके संबंध में दखल न दें और उन्हें शांतिपूर्ण जीवन जीने दिया जाए। साथ ही उन्होंने सुरक्षा की भी मांग की थी।

यह भी पढ़ें: सोने-चांदी के दामों में गिरावट, जानें आज का रेट

इलाहाबाद हाईकोर्ट का यह फैसला व्यक्तिगत स्वतंत्रता और संवैधानिक अधिकारों को मजबूत करने वाला माना जा रहा है। यह निर्णय स्पष्ट करता है कि बालिग व्यक्तियों के निजी जीवन के चुनाव में अनावश्यक हस्तक्षेप स्वीकार्य नहीं है।

Tags: इलाहाबाद हाईकोर्टलिव इन रिलेशनशिप
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