लीड्स टेस्ट में इंग्लैंड के हाथों करारी हार झेलने के बाद भारतीय क्रिकेट टीम एक बार फिर सवालों के घेरे में है। टीम इंडिया की यह पिछले नौ टेस्ट मैचों में सातवीं हार रही, जिससे फैंस और विशेषज्ञों में चिंता बढ़ गई है। इस हार के बाद भारतीय टीम के नए हेड कोच गौतम गंभीर ने पहली बार खुलकर अपनी बात रखी।
गंभीर ने गेंदबाजों का किया बचाव
पोस्ट मैच प्रेस कॉन्फ्रेंस में गौतम गंभीर ने साफ शब्दों में कहा कि भारतीय तेज गेंदबाजी आक्रमण अनुभवहीन है और उन्हें वक्त देना होगा। उन्होंने कहा, “अगर आप जसप्रीत बुमराह और मोहम्मद सिराज को छोड़ दें, तो हमारे बाकी तेज गेंदबाजों ने मुश्किल से कुछ ही टेस्ट खेले हैं। प्रसिद्ध कृष्णा ने केवल चार, हर्षित राणा ने दो और अर्शदीप सिंह ने अब तक एक भी टेस्ट नहीं खेला है। इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में खेलना ऐसा है जैसे किसी युवा को सीधे समंदर में फेंक देना।”
गंभीर ने प्रसिद्ध कृष्णा की गेंदबाजी की तारीफ करते हुए कहा, “उसने 5 विकेट लिए, हां रन जरूर ज्यादा लुटे, लेकिन उसने दिखाया कि उसमें क्षमता है। उसे उछाल का फायदा है और वह अनुभव के साथ एक बेहतरीन टेस्ट गेंदबाज बन सकता है।”

फील्डिंग बनी हार की बड़ी वजह
इस टेस्ट में भारत की फील्डिंग बेहद खराब रही, खासकर यशस्वी जायसवाल के चार कैच छोड़ने ने इंग्लैंड को बड़ी बढ़त दिलाई। इस पर गंभीर ने कहा, “दुनिया के सबसे बेहतरीन फील्डर भी कभी-कभी कैच छोड़ते हैं। कोई भी जानबूझकर कैच नहीं छोड़ता। लेकिन हां, ये निराशाजनक था क्योंकि हमारी बल्लेबाजी भी दोनों पारियों में अचानक ढह गई। पहली पारी में 41 रन पर 7 विकेट और दूसरी पारी में 31 रन पर 6 विकेट गिरना किसी भी टीम के लिए खतरे की घंटी है।”
शुभमन गिल को लेकर भी रखी बात
गौतम गंभीर ने कप्तान शुभमन गिल का समर्थन किया और कहा कि उन्हें समय देना जरूरी है। उन्होंने गिल की शतकीय पारी की सराहना की और कहा, “शुभमन ने नेतृत्व के साथ-साथ बल्लेबाजी में भी जिम्मेदारी निभाई। लेकिन हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि चाहे टीम युवा हो या अनुभवी, हार हमेशा बुरी ही होती है। हम 140 करोड़ भारतीयों की उम्मीदों का भार लेकर मैदान में उतरते हैं, इसलिए कोई भी हार स्वीकार्य नहीं हो सकती।”
दूसरे टेस्ट में सुधार की उम्मीद
गंभीर ने अंत में कहा कि टीम को पहले टेस्ट से सीख लेनी होगी और दूसरे टेस्ट में बेहतर प्रदर्शन करना होगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि कोई भी खिलाड़ी परफेक्ट नहीं होता, लेकिन सुधार की गुंजाइश हमेशा बनी रहती है।
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भारतीय टीम अब दूसरे टेस्ट में उतरने से पहले काफी सोच-विचार और रणनीति बदलाव कर सकती है, क्योंकि टेस्ट क्रिकेट में लगातार मिल रही हार अब गंभीर चिंता का विषय बन चुकी है।









