LPG Price Hike: देशभर में घरेलू रसोई का खर्च एक बार फिर बढ़ गया है। तेल विपणन कंपनियों ने घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में नई वृद्धि लागू कर दी है, जिससे लाखों परिवारों के मासिक बजट पर अतिरिक्त बोझ पड़ने की आशंका है। नई दरें 7 जून से प्रभावी हो चुकी हैं।
राजधानी दिल्ली में 14.2 किलोग्राम वाले घरेलू गैस सिलेंडर की कीमत अब 942 रुपये पहुंच गई है। यह वृद्धि ऐसे समय में हुई है जब अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार में अस्थिरता लगातार बनी हुई है और कच्चे तेल तथा गैस की आपूर्ति को लेकर चिंताएं बढ़ रही हैं।
वैश्विक हालात का घरेलू बाजार पर असर
ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव और समुद्री व्यापार मार्गों पर बढ़ते जोखिम का सीधा प्रभाव ईंधन की वैश्विक कीमतों पर पड़ रहा है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गैस और तेल की लागत बढ़ने से भारतीय कंपनियों पर भी दबाव बढ़ा है, जिसका असर अब उपभोक्ताओं तक पहुंच रहा है।
पिछले कुछ महीनों में यह दूसरी बड़ी बढ़ोतरी है। इससे पहले मार्च में भी घरेलू गैस के दाम बढ़ाए गए थे। लगातार बढ़ती कीमतों ने मध्यम वर्ग और निम्न आय वर्ग के परिवारों की चिंता बढ़ा दी है।
दिल्ली, मुंबई और अन्य महानगरों में बढ़े दाम
नई दरों के बाद दिल्ली सहित कई प्रमुख शहरों में घरेलू एलपीजी सिलेंडर महंगा हो गया है। महानगरों में रहने वाले परिवारों को अब रसोई गैस पर पहले की तुलना में अधिक खर्च करना पड़ेगा। ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में भी इसका प्रभाव देखने को मिल सकता है, जहां घरेलू गैस पर निर्भरता लगातार बढ़ रही है।
व्यवसायों पर भी पड़ रहा प्रभाव
घरेलू सिलेंडर के साथ-साथ वाणिज्यिक गैस सिलेंडरों की कीमतों में भी हाल के महीनों में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। इसका असर होटल, रेस्टोरेंट, ढाबों और छोटे खाद्य व्यवसायों पर पड़ रहा है। कई कारोबारी संगठनों ने बढ़ती परिचालन लागत को लेकर चिंता व्यक्त की है।
छोटे सिलेंडर उपभोक्ताओं को भी झटका
5 किलोग्राम वाले छोटे एलपीजी सिलेंडर, जिनका उपयोग अक्सर छात्र, प्रवासी मजदूर और छोटे परिवार करते हैं, उनके दामों में भी हालिया संशोधन किया गया है। इससे सीमित आय वाले उपभोक्ताओं की जेब पर अतिरिक्त भार पड़ सकता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में ऊर्जा कीमतों का दबाव जारी रहता है, तो आने वाले महीनों में भी ईंधन दरों में उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। ऐसे में उपभोक्ताओं की निगाहें सरकार और तेल कंपनियों की आगामी मूल्य समीक्षा पर टिकी रहेंगी।
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बढ़ती गैस कीमतों ने एक बार फिर महंगाई को लेकर बहस तेज कर दी है, क्योंकि इसका सीधा असर हर घर की रसोई और दैनिक खर्चों पर पड़ता है।








