आज पूरे देश में राष्ट्रीय खेल दिवस के रूप में हॉकी के जादूगर मेजर ध्यानचंद जी की 120वीं जयंती धूमधाम से मनाई गई। इस अवसर पर देशभर में विभिन्न खेल आयोजनों, सम्मान समारोहों और जागरूकता अभियानों का आयोजन किया गया। खिलाड़ियों, स्कूलों, खेल संगठनों और सरकारी संस्थानों ने मिलकर खेलों के महत्व को रेखांकित किया और मेजर ध्यानचंद जी के अद्वितीय योगदान को श्रद्धांजलि अर्पित की।
मेजर ध्यानचंद: भारतीय हॉकी के स्वर्णिम अध्याय
मेजर ध्यानचंद का नाम भारतीय खेल इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में दर्ज है। 1928, 1932 और 1936 के ओलंपिक में भारत को हॉकी में स्वर्ण पदक दिलाने वाले ध्यानचंद जी को उनके अद्वितीय कौशल और अनुशासन के लिए आज भी याद किया जाता है। उनकी जयंती को राष्ट्रीय खेल दिवस के रूप में मनाने का उद्देश्य युवाओं को खेलों के प्रति प्रेरित करना और देश में खेल संस्कृति को बढ़ावा देना है।
राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री ने दी श्रद्धांजलि
राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री समेत कई राष्ट्रीय नेताओं ने आज मेजर ध्यानचंद जी को श्रद्धांजलि अर्पित की और खिलाड़ियों को बधाई दी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट के माध्यम से कहा, “मेजर ध्यानचंद जी की जयंती पर उन्हें नमन करता हूं। उन्होंने अपने खेल कौशल से भारत को वैश्विक मंच पर गौरवान्वित किया। राष्ट्रीय खेल दिवस पर सभी खिलाड़ियों और खेल प्रेमियों को शुभकामनाएं।”
देशभर में हुए आयोजन
- स्कूल और कॉलेजों में खेल प्रतियोगिताएं, दौड़, कबड्डी, फुटबॉल और हॉकी मैच आयोजित किए गए।
- खेल मंत्रालय और भारतीय खेल प्राधिकरण (SAI) की ओर से फिटनेस जागरूकता अभियान चलाया गया।
- कई जगहों पर खिलाड़ियों को ‘खेल रत्न’, ‘अर्जुन पुरस्कार’ और ‘द्रोणाचार्य पुरस्कार’ से सम्मानित किया गया।
दिल्ली में विशेष आयोजन
राजधानी दिल्ली में भी राष्ट्रीय खेल दिवस के उपलक्ष्य में विविध कार्यक्रम हुए। इंटरनेशनल माइंड स्पोर्ट्स एसोसिएशन (IMSA) के अध्यक्ष और SOGF के संस्थापक एवं सलाहकार, अधिवक्ता नंदन झा ने इस अवसर पर मेजर ध्यानचंद को श्रद्धांजलि अर्पित की और एक मैत्रीपूर्ण हॉकी मैच में भाग लिया। उन्होंने बच्चों को सम्मानित कर खेलों में उनकी रुचि और प्रतिभा को प्रोत्साहित किया।

नंदन झा ने कहा, “राष्ट्रीय खेल दिवस हमें यह याद दिलाता है कि खेल न केवल शारीरिक स्वास्थ्य के लिए जरूरी हैं, बल्कि यह चरित्र निर्माण, अनुशासन और टीम भावना के भी प्रतीक हैं। मेजर ध्यानचंद जी हमारे लिए प्रेरणा हैं।”
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राष्ट्रीय खेल दिवस ने एक बार फिर देश को यह अहसास दिलाया कि खेल केवल प्रतियोगिता नहीं, बल्कि राष्ट्रीय गर्व, अनुशासन और एकता का माध्यम हैं। मेजर ध्यानचंद जी की जयंती पर उन्हें श्रद्धा से याद करना और खेल भावना को आगे बढ़ाना, हर भारतीय का कर्तव्य है।









