बांग्लादेश की राजनीति में मंगलवार को बड़ा और ऐतिहासिक बदलाव देखने को मिला। बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) के अध्यक्ष तारिक रहमान ने देश के 11वें प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ली। वह पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया के पुत्र हैं और अब आधिकारिक तौर पर देश की बागडोर संभाल चुके हैं।
यह शपथ ग्रहण समारोह ढाका स्थित संसद भवन के साउथ प्लाजा में शाम 4 बजे आयोजित किया गया, जहां राष्ट्रपति मोहम्मद शहाबुद्दीन ने उन्हें पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। तारिक रहमान ने अंतरिम सरकार के प्रमुख मोहम्मद यूनुस की जगह ली है।
नई कैबिनेट के साथ सत्ता की शुरुआत
प्रधानमंत्री के साथ ही नई मंत्रिपरिषद ने भी शपथ ली। प्रमुख मंत्रियों में शामिल हैं:
- डॉ. खलीलुर रहमान – विदेश मंत्री
- सलाहुद्दीन अहमद – गृह मंत्री
- डॉ. अमीर खसरू महमूद – वित्त एवं योजना मंत्री
- शमा ओबैद – विदेश राज्य मंत्री
इसके अलावा कैबिनेट में मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर, अमीर खोशरू महमूद चौधरी, इकबाल हसन महमूद, हाफिज उद्दीन अहमद, अब्दुल अव्वल मिंटू, काजी शाह मोफज्जल हुसैन कैकोबाद, निताई रॉय चौधरी (हिंदू नेता), दीपेन दीवान (अल्पसंख्यक प्रतिनिधि) सहित कई वरिष्ठ नेता शामिल किए गए हैं।
राज्य मंत्रियों में एम रशीदुज्जमां मिल्लत, शमा ओबैद इस्लाम, बैरिस्टर कैसर कमाल, नुरुल हक नूर, बॉबी हज्जाज और अन्य नेताओं को जगह मिली है।
अंतरराष्ट्रीय उपस्थिति ने बढ़ाई गरिमा
शपथ ग्रहण समारोह में कई देशों के प्रतिनिधि मौजूद रहे। भारत की ओर से लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला और विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने हिस्सा लिया।
इसके अलावा मलेशिया, पाकिस्तान, मालदीव, तुर्की और श्रीलंका के प्रतिनिधि भी कार्यक्रम में शामिल हुए। चीन, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात और ब्रुनेई को भी समारोह के लिए आमंत्रित किया गया था।
संसदीय दल का नेता चुने गए तारिक रहमान
शपथ से पहले सुबह 11:30 बजे बीएनपी संसदीय दल की बैठक हुई, जिसमें औपचारिक रूप से तारिक रहमान को दल का नेता चुना गया। उन्होंने विपक्षी दलों के नेताओं से भी मुलाकात की, जिनमें जमात-ए-इस्लामी के प्रमुख शफीकुर रहमान और नेशनल सिटिजन पार्टी के संयोजक नाहिद इस्लाम शामिल थे।
भारी बहुमत के साथ सत्ता में वापसी
हालिया आम चुनाव में बीएनपी ने जबरदस्त जीत दर्ज की। 297 सीटों में से पार्टी को 209 सीटें मिलीं, जबकि जमात-ए-इस्लामी 68 सीटों तक सीमित रही। चुनाव 12 फरवरी को आयोजित हुए थे।
पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना की पार्टी आवामी लीग को इस चुनाव में भाग लेने की अनुमति नहीं दी गई थी। उल्लेखनीय है कि राजनीतिक अस्थिरता और छात्र आंदोलनों के बाद शेख हसीना को पद छोड़ना पड़ा था, जिसके बाद देश में अंतरिम व्यवस्था लागू की गई थी।
अल्पसंख्यक समुदाय से चार उम्मीदवारों की जीत भी इस चुनाव की खास बात रही, जिनमें दो हिंदू उम्मीदवार बीएनपी के टिकट पर विजयी हुए।
क्या बदलेगा बांग्लादेश की राजनीति में?
नई सरकार के गठन के साथ बांग्लादेश में राजनीतिक स्थिरता की उम्मीदें बढ़ी हैं। लंबे समय से चल रही अस्थिरता के बाद अब देश में लोकतांत्रिक प्रक्रिया के तहत प्रशासनिक कामकाज को गति मिलने की संभावना है।
विशेषज्ञों का मानना है कि तारिक रहमान के नेतृत्व में बीएनपी सरकार को आर्थिक सुधार, राजनीतिक समावेशन और अंतरराष्ट्रीय संबंधों को संतुलित करने की बड़ी चुनौती का सामना करना होगा।









