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होर्मुज स्ट्रेट क्या है? जिसके बंद होने पर आएगा तेल का संकट, भारत पर भी पड़ेगा असर

ईरान द्वारा होर्मुज स्ट्रेट को बंद करने की चेतावनी के बाद दुनिया भर में तेल आपूर्ति को लेकर चिंता गहराती जा रही है। आइए जानते हैं होर्मुज स्ट्रेट क्या है?

Gautam Rishi by Gautam Rishi
2 March 2026
in दुनिया, बिज़नेस, शिक्षा / जॉब
0
होर्मुज स्ट्रेट में भारतीय नाविक की मौत पर सरकार सख्त - Panchayati Times

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज

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अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव का असर अब वैश्विक ऊर्जा बाज़ार पर साफ दिखने लगा है। हाल के दिनों में कच्चे तेल की कीमतों में लगभग 12 प्रतिशत तक बढ़ोतरी दर्ज की गई है। ईरान द्वारा होर्मुज स्ट्रेट को बंद करने की चेतावनी के बाद दुनिया भर में तेल आपूर्ति को लेकर चिंता गहराती जा रही है। यह समुद्री मार्ग वैश्विक तेल व्यापार का सबसे अहम रास्ता माना जाता है, ऐसे में यहां किसी भी तरह की रुकावट के गंभीर परिणाम हो सकते हैं।

भारत के पास कितना कच्चा तेल भंडार?

रिपोर्टों के अनुसार, भारत के पास फिलहाल करीब 10 दिनों की जरूरत पूरी करने लायक कच्चे तेल का भंडार मौजूद है। यह भंडार अचानक आपूर्ति बाधित होने की स्थिति में अस्थायी राहत दे सकता है।

हालांकि यदि जलडमरूमध्य लंबे समय तक बंद रहता है, तो भारत को अपने आयात के स्रोतों में बदलाव करना पड़ सकता है। ऐसी स्थिति में रूस या अन्य देशों से खरीद बढ़ाई जा सकती है।

होर्मुज मार्ग पर भारत की निर्भरता

भारत हर दिन लगभग 25 से 27 लाख बैरल कच्चा तेल इसी मार्ग से आयात करता है। यह तेल मुख्य रूप से  इराक, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात और कुवैत जैसे देशों से आता है।

कच्चे तेल के अलावा भारत अपनी 90 से 100 प्रतिशत रसोई गैस और लगभग 60 प्रतिशत द्रवीकृत प्राकृतिक गैस की आपूर्ति के लिए भी इसी समुद्री रास्ते पर निर्भर है। यही कारण है कि यह मार्ग न केवल परिवहन ईंधन बल्कि घरेलू रसोई और औद्योगिक ऊर्जा के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण है।

रणनीतिक भंडार से कितने दिन की राहत?

भारत के पास रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार मौजूद हैं, जो करीब 10 दिनों की मांग पूरी कर सकते हैं। यह भंडार आपात स्थिति में उपयोग के लिए बनाए गए हैं।

लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि यदि संकट लंबा खिंचता है, तो ये भंडार पर्याप्त नहीं होंगे और वैकल्पिक आपूर्ति सुनिश्चित करनी पड़ेगी।

वैकल्पिक आपूर्ति के विकल्प

अगर हालात सामान्य नहीं होते, तो भारत रूस से आयात बढ़ा सकता है। हालांकि रूस से आने वाले जहाजों को भारत पहुंचने में लगभग एक महीना लग सकता है, जबकि पश्चिम एशिया से आपूर्ति लगभग पांच दिन में पहुंच जाती है।

इसके अलावा भारत वेनेजुएला, ब्राजील और अफ्रीकी उत्पादक देशों से भी आयात बढ़ाने पर विचार कर सकता है।

वैश्विक कीमतों में उछाल का खतरा

दुनिया की लगभग 20 प्रतिशत तेल आपूर्ति इसी जलमार्ग से गुजरती है। यदि यह पूरी तरह बंद हो जाता है, तो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर जा सकती हैं।

भारत अपनी कुल जरूरत का करीब 88 प्रतिशत कच्चा तेल आयात करता है। ऐसे में कीमतों में मामूली बढ़ोतरी भी देश के आयात बिल पर भारी पड़ती है। अनुमान है कि प्रति बैरल एक डॉलर की वृद्धि से सालाना आयात खर्च में करोड़ों डॉलर का अतिरिक्त बोझ बढ़ सकता है।

आम जनता पर क्या होगा असर?

तेल महंगा होने का सीधा असर परिवहन लागत पर पड़ेगा। इससे खाद्य पदार्थों, दैनिक उपयोग की वस्तुओं और अन्य जरूरी सामानों की कीमतें बढ़ सकती हैं। महंगाई दर में उछाल से आम परिवारों का बजट प्रभावित होना तय है।

यह भी पढ़ें: यह राज्य सरकार होली पर देने जा रही फ्री सिलेंडर

होर्मुज जलडमरूमध्य में संभावित संकट केवल पश्चिम एशिया तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका प्रभाव वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है। भारत जैसे आयात पर निर्भर देश के लिए यह स्थिति चुनौतीपूर्ण है। आने वाले दिनों में सरकार की रणनीति और वैश्विक कूटनीतिक प्रयास ही तय करेंगे कि यह संकट कितना गहराता है और उससे देश को कितनी राहत मिल पाती है।

Tags: अमेरिकाईरानहोर्मुज स्ट्रेटहोर्मुज स्ट्रेट क्या है?
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