अमित शाह ने लोकसभा में नक्सलवाद के मुद्दे पर जोरदार बयान देते हुए स्पष्ट किया कि देश में हिंसा और हथियार के रास्ते को किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में अपनी बात रखने के लिए संवैधानिक संस्थाएं मौजूद हैं, ऐसे में बंदूक उठाना किसी भी रूप में उचित नहीं है।
“संविधान से ऊपर कुछ नहीं”
गृह मंत्री ने कहा कि अगर किसी को अन्याय महसूस होता है तो उसके समाधान के लिए अदालतें और संवैधानिक व्यवस्थाएं मौजूद हैं। लेकिन जो लोग हथियार उठाकर व्यवस्था को चुनौती देते हैं, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने दो टूक कहा कि यह नरेंद्र मोदी की सरकार है और हिंसा का जवाब कानून के तहत दिया जाएगा।
रेड कॉरिडोर और आदिवासी क्षेत्रों का मुद्दा
अमित शाह ने रेड कॉरिडोर से जुड़े राज्यों और आदिवासी समुदायों का जिक्र करते हुए कहा कि वर्षों से ये क्षेत्र विकास से वंचित रहे। उन्होंने सवाल उठाया कि लंबे समय तक सत्ता में रहने वाली सरकारों ने इन इलाकों के लिए पर्याप्त काम क्यों नहीं किया।
उन्होंने कहा कि बस्तर जैसे क्षेत्रों में नक्सलवाद के कारण विकास बाधित रहा और हजारों लोगों को इसका खामियाजा भुगतना पड़ा।
नक्सलवाद की जड़ पर टिप्पणी
गृह मंत्री ने कहा कि नक्सलवाद सिर्फ विकास की कमी का मुद्दा नहीं है, बल्कि यह एक विचारधारा से जुड़ी समस्या है। उन्होंने आरोप लगाया कि अतीत में राजनीतिक कारणों से इस विचारधारा को बढ़ावा मिला, जिसका नुकसान देश को लंबे समय तक उठाना पड़ा।
पिछली सरकारों पर निशाना
अमित शाह ने पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के उस बयान का जिक्र किया, जिसमें माओवादी हिंसा को देश की सबसे बड़ी आंतरिक सुरक्षा चुनौती बताया गया था। उन्होंने कहा कि इसके बावजूद उस समय ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
सरकार की उपलब्धियां गिनाईं
गृह मंत्री ने कहा कि 2014 के बाद देश में कई बड़े फैसले लिए गए हैं। इनमें अनुच्छेद 370 हटाना, राम मंदिर का निर्माण, जीएसटी लागू करना और नागरिकता संशोधन अधिनियम जैसे कदम शामिल हैं। उन्होंने कहा कि अब देश नक्सलवाद से मुक्त होने की दिशा में भी तेजी से आगे बढ़ रहा है।
सुरक्षा बलों और युवाओं को श्रद्धांजलि
अपने संबोधन के अंत में अमित शाह ने उन जवानों और युवाओं को श्रद्धांजलि दी, जिन्होंने आंतरिक सुरक्षा के लिए अपने प्राणों की आहुति दी। उन्होंने कहा कि देश उनके बलिदान को कभी नहीं भूलेगा।
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लोकसभा में अमित शाह का यह बयान साफ संकेत देता है कि केंद्र सरकार नक्सलवाद के खिलाफ सख्त रुख अपनाए हुए है। साथ ही, सरकार विकास और सुरक्षा दोनों को साथ लेकर इस समस्या के स्थायी समाधान की दिशा में काम कर रही है।









