उत्तराखंड में आगामी चुनावों से पहले चुनाव आयोग ने बड़ा प्रशासनिक कदम उठाते हुए 17 पंजीकृत गैर-मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों (RUPP) का पंजीकरण रद्द कर दिया है। आयोग की इस कार्रवाई के बाद ये दल आगामी चुनावी प्रक्रिया में भाग नहीं ले सकेंगे। यह फैसला उन दलों पर लिया गया है जो लंबे समय से निष्क्रिय थे और आयोग के रिकॉर्ड में दर्ज पते पर भी मौजूद नहीं मिले।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम चुनावी व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और सक्रिय बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
क्यों रद्द किया गया पंजीकरण?
चुनाव आयोग के अनुसार, जिन दलों पर कार्रवाई की गई, उन्होंने पिछले छह वर्षों में किसी भी राजनीतिक गतिविधि में भाग नहीं लिया। इसके अलावा कई दल अपने पंजीकृत कार्यालय के पते पर मौजूद नहीं पाए गए।
आयोग ने कार्रवाई से पहले संबंधित दलों को कारण बताओ नोटिस जारी कर जवाब देने का अवसर भी दिया था। संतोषजनक जवाब नहीं मिलने और निर्धारित मानकों का पालन न करने पर उनका पंजीकरण समाप्त कर दिया गया।
उत्तराखंड में RUPP दलों की संख्या घटी
वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव के दौरान उत्तराखंड में 42 पंजीकृत गैर-मान्यता प्राप्त राजनीतिक दल (RUPP) मौजूद थे। ताजा कार्रवाई के बाद इनकी संख्या घटकर 25 रह गई है।
यह संकेत देता है कि चुनाव आयोग केवल कागजों पर मौजूद या निष्क्रिय दलों की पहचान कर चुनावी सूची को व्यवस्थित करने की प्रक्रिया तेज कर रहा है।
सात नए दलों ने किया आवेदन
एक ओर जहां निष्क्रिय दलों का पंजीकरण समाप्त किया गया है, वहीं दूसरी ओर राज्य में सात नए राजनीतिक दलों ने पंजीकरण के लिए आवेदन किया है।
इनमें उमेश कुमार की जन निर्माण पार्टी का पंजीकरण पहले ही पूरा हो चुका है, जबकि अन्य छह आवेदनों की जांच अभी जारी है।
किन परिस्थितियों में रद्द हो सकता है किसी दल का पंजीकरण?
चुनाव आयोग के नियमों के अनुसार निम्न स्थितियों में किसी राजनीतिक दल के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है—
- लगातार छह वर्ष तक कोई राजनीतिक गतिविधि न करना।
- आयोग के नोटिस का जवाब न देना।
- पंजीकृत कार्यालय के पते पर पार्टी का अस्तित्व न मिलना।
- आवश्यक दस्तावेज और जानकारी समय पर जमा न करना।
- गलत या भ्रामक जानकारी देकर पंजीकरण प्राप्त करना।
इन 17 राजनीतिक दलों पर हुई कार्रवाई
चुनाव आयोग द्वारा जिन दलों का पंजीकरण समाप्त किया गया, उनमें प्रमुख नाम शामिल हैं—
- भारतीय परिवार पार्टी
- भारतीय सम्राट सुभाष सेना
- हमारी जनमंच पार्टी
- भारतीय ग्राम नगर विकास पार्टी
- भारतीय मूल निवासी समाज पार्टी
- पीपुल्स पार्टी
- प्रजातंत्र पार्टी ऑफ इंडिया
- राष्ट्रीय जन सहाय दल
- उत्तराखंड जनशक्ति पार्टी
- भारतीय जनक्रांति पार्टी
- भारत कौमी दल
- भारतीय अंत्योदय पार्टी
- गोरखा डेमोग्राफिक फ्रंट
- मैदानी क्रांति दल
- प्रजामंडल दल
- राष्ट्रीय ग्राम विकास पार्टी
- सुराज सेवा दल
चुनावी राजनीति पर क्या होगा असर?
विशेषज्ञों का मानना है कि आयोग की यह कार्रवाई चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ाने और केवल सक्रिय राजनीतिक दलों को चुनावी व्यवस्था में बनाए रखने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इससे चुनावी रिकॉर्ड अधिक व्यवस्थित होगा और निष्क्रिय संगठनों की संख्या में कमी आएगी।









