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संसद से पास हुआ जन्म और मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) विधेयक, देर से रजिस्ट्रेशन के नियम हुए और सख्त

राज्यसभा ने जन्म और मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) विधेयक को मंजूरी दे दी है। नए नियमों के तहत देर से जन्म या मृत्यु का पंजीकरण कराने के लिए अब सक्षम अधिकारियों या न्यायिक मजिस्ट्रेट की अनुमति आवश्यक होगी। जानिए नए कानून में क्या बदलाव हुए हैं।

Gautam Rishi by Gautam Rishi
4 August 2026
in भारत
0
संसद से पास हुआ जन्म और मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) विधेयक, देर से रजिस्ट्रेशन के नियम हुए और सख्त - Panchayati Times

केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय

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संसद के मानसून सत्र में जन्म और मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) विधेयक को मंगलवार को राज्यसभा की भी मंजूरी मिल गई। इससे पहले यह विधेयक लोकसभा से पारित हो चुका था। नए संशोधन का उद्देश्य जन्म और मृत्यु पंजीकरण अधिनियम, 1969 के प्रावधानों को अधिक प्रभावी बनाना और जन्म एवं मृत्यु की घटनाओं का समय पर पंजीकरण सुनिश्चित करना है।

सदन में विधेयक को केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने पेश किया। उन्होंने कहा कि संशोधन का मुख्य उद्देश्य विलंब से होने वाले पंजीकरण की प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनाना है।

क्या बदलेगा नए कानून में?

सरकार द्वारा लाए गए संशोधन के अनुसार यदि किसी जन्म या मृत्यु की सूचना एक वर्ष के बाद लेकिन दो वर्ष के भीतर दी जाती है, तो उसका पंजीकरण अब सामान्य प्रक्रिया से नहीं होगा।

ऐसे मामलों में पंजीकरण के लिए निम्न अधिकारियों की अनुमति आवश्यक होगी—

  • जिला मजिस्ट्रेट (DM)
  • उप मंडल दंडाधिकारी (SDM)
  • जिला मजिस्ट्रेट द्वारा अधिकृत कार्यकारी मजिस्ट्रेट

इस प्रावधान का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि विलंब से दर्ज होने वाले मामलों की उचित जांच के बाद ही उन्हें रिकॉर्ड में शामिल किया जाए।

#MonsoonSession2026

MoS Nityanand Rai moves The Registration of Births and Deaths (Amendment) Bill, 2026 in #RajyaSabha for consideration and passing.@nityanandraibjp @AmitShah @HMOIndia pic.twitter.com/k6xh3NmzMB

— SansadTV (@sansad_tv) August 4, 2026

दो साल से अधिक देरी पर क्या होगा?

संशोधन के तहत यदि जन्म या मृत्यु की घटना के दो वर्ष से अधिक समय बाद पंजीकरण के लिए आवेदन किया जाता है, तो अब प्रथम श्रेणी के न्यायिक मजिस्ट्रेट (JMFC) का आदेश अनिवार्य होगा।

सरकार का कहना है कि अनुमति देने से पहले संबंधित अधिकारियों द्वारा प्रस्तुत दस्तावेजों और जानकारी की सत्यता की जांच भी की जाएगी, ताकि गलत या फर्जी पंजीकरण की संभावना को रोका जा सके।

सरकार ने क्यों किया संशोधन?

गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने सदन में कहा कि समय पर जन्म और मृत्यु का पंजीकरण नागरिक सेवाओं, सरकारी योजनाओं, जनगणना, सामाजिक सुरक्षा और प्रशासनिक रिकॉर्ड के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।

सरकार का मानना है कि नए नियम समय पर रिपोर्टिंग को बढ़ावा देंगे और पंजीकरण प्रणाली को अधिक विश्वसनीय बनाएंगे।

लोकसभा से पहले ही मिल चुकी थी मंजूरी

इस विधेयक को 31 जुलाई को लोकसभा से भी पारित किया जा चुका था। उस दौरान विपक्षी दलों ने सदन में चर्चा की मांग करते हुए हंगामा किया था। विपक्ष का कहना था कि इतने महत्वपूर्ण विधेयक पर विस्तृत चर्चा होनी चाहिए और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को स्वयं सदन में उपस्थित रहना चाहिए।

हालांकि, हंगामे के बीच संक्षिप्त चर्चा के बाद विधेयक को लोकसभा से भी मंजूरी मिल गई थी।

यह भी पढ़ें: ऑल इंडिया चैंपियनशिप 2026 (ईस्पोर्ट्स) का सफल समापन, देशभर के खिलाड़ियों ने दिखाया दमखम

आम नागरिकों पर क्या होगा असर?

विशेषज्ञों के अनुसार, नए प्रावधानों के लागू होने के बाद जन्म और मृत्यु के पंजीकरण में अनावश्यक देरी करने वाले लोगों को अधिक औपचारिक प्रक्रिया से गुजरना होगा। इससे रिकॉर्ड की विश्वसनीयता बढ़ेगी और सरकारी दस्तावेजों में पारदर्शिता सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी।

Tags: Birth and Death Registration BillBirth Registration Rules 2026hindi newsजन्म और मृत्यु पंजीकरण संशोधन विधेयकजन्म प्रमाण पत्र नियमनित्यानंद रायमृत्यु प्रमाण पत्र नियमराज्यसभालोकसभा
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