राजधानी में खराब मौसम से प्रभावित किसानों को राहत देने के लिए सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। रेखा गुप्ता के नेतृत्व में दिल्ली सरकार ने गेहूं खरीद के नियमों में ढील दी है, जिससे उन किसानों को सहारा मिलेगा जिनकी फसल गुणवत्ता मानकों पर खरी नहीं उतर पा रही थी।
केंद्र की मंजूरी के बाद लागू हुआ फैसला
राज्य सरकार के प्रस्ताव को केंद्र की सहमति मिलने के बाद रबी मार्केटिंग सीजन 2026-27 के लिए विशेष छूट लागू की गई है। इस बदलाव का उद्देश्य ज्यादा से ज्यादा किसानों की उपज को सरकारी खरीद प्रणाली में शामिल करना है, ताकि उन्हें आर्थिक नुकसान से बचाया जा सके।
गुणवत्ता मानकों में दी गई बड़ी छूट
नई व्यवस्था के तहत अब ऐसे गेहूं की भी खरीद की जाएगी जिसकी चमक काफी हद तक खत्म हो चुकी है। पहले ऐसी फसल को सीधे अस्वीकार कर दिया जाता था। इसके अलावा सिकुड़े और टूटे दानों की सीमा को बढ़ाकर 15 प्रतिशत कर दिया गया है, जो पहले 6 प्रतिशत थी। हालांकि पूरी तरह टूटे दानों के लिए कुछ सीमाएं अभी भी लागू रहेंगी।
अलग स्टॉक और पारदर्शिता पर जोर
सरकार ने स्पष्ट किया है कि इस श्रेणी के गेहूं को सामान्य भंडार से अलग रखा जाएगा और इसके लिए अलग रिकॉर्ड तैयार किया जाएगा। इसका उद्देश्य खरीद प्रक्रिया को पारदर्शी बनाए रखना है। साथ ही, इस गेहूं को लंबे समय तक स्टोर करने के बजाय जल्द उपयोग में लाने की योजना बनाई गई है।
गुणवत्ता की जिम्मेदारी सरकार पर
इस विशेष श्रेणी के गेहूं का इस्तेमाल मुख्य रूप से राजधानी की जरूरतों को पूरा करने के लिए किया जाएगा। भंडारण के दौरान गुणवत्ता में किसी भी गिरावट की स्थिति में इसकी जिम्मेदारी सरकार की होगी।
किसानों को समय पर भुगतान का निर्देश
मुख्यमंत्री ने कहा कि किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य दिलाना सरकार की प्राथमिकता है। खराब मौसम के कारण फसल को हुए नुकसान को देखते हुए यह कदम उठाया गया है। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि खरीद प्रक्रिया तय समय सीमा में पूरी हो और किसानों को भुगतान में देरी न हो।
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किसानों और उपभोक्ताओं दोनों को लाभ
इस फैसले से एक ओर किसानों को आर्थिक राहत मिलेगी, वहीं दूसरी ओर दिल्ली की खाद्य आपूर्ति भी मजबूत होगी। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम उन किसानों के लिए विशेष रूप से फायदेमंद साबित होगा, जिनकी फसल इस बार मौसम की मार झेल चुकी है।









