उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के अलीगंज क्षेत्र स्थित पुरनिया इलाके में सोमवार को हुए भीषण अग्निकांड ने पूरे प्रदेश को झकझोर दिया। एक निजी कोचिंग एवं प्रशिक्षण केंद्र में लगी आग ने देखते ही देखते विकराल रूप ले लिया, जिसके चलते 15 लोगों की दर्दनाक मौत हो गई, जबकि कई अन्य घायल हो गए। इस हादसे ने न केवल कई परिवारों के सदस्यों को उनसे छीन लिया, बल्कि कई अधूरे सपनों को भी हमेशा के लिए खत्म कर दिया।
धुएं और अफरा-तफरी के बीच फंसे छात्र और कर्मचारी
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार दोपहर बाद बहुमंजिला इमारत में अचानक आग लग गई। कुछ ही मिनटों में पूरे भवन में घना धुआं भर गया, जिससे अंदर मौजूद छात्रों और कर्मचारियों को बाहर निकलने का मौका तक नहीं मिला। लोगों ने जान बचाने के लिए छत और खिड़कियों की ओर दौड़ लगाई, लेकिन धुएं और आग की वजह से स्थिति लगातार बिगड़ती चली गई।
सूचना मिलते ही दमकल विभाग, पुलिस, एसडीआरएफ और एनडीआरएफ की टीमें मौके पर पहुंचीं और बड़े स्तर पर राहत एवं बचाव अभियान शुरू किया।
शादी से पहले बिछड़ गए नीलेश और अनामिका
इस हादसे की सबसे भावुक कहानी उन दो युवाओं की है, जिनकी शादी इसी वर्ष दिसंबर में होने वाली थी। दोनों एक ही संस्थान में कार्यरत थे और अपने भविष्य की योजनाएं बना रहे थे। लेकिन नियति को कुछ और मंजूर था। आग की इस त्रासदी ने दोनों की जिंदगी एक साथ समाप्त कर दी, जिससे उनके परिवारों पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा।
परिवार का इकलौता सहारा भी छिन गया
मृतकों में शामिल अब्दुल रहमान अपने परिवार के एकमात्र कमाने वाले सदस्य थे। लंबे समय तक रोजगार की तलाश के बाद उन्हें तकनीकी क्षेत्र में काम मिला था। उनकी असामयिक मृत्यु ने परिवार को आर्थिक और मानसिक संकट में डाल दिया है। बताया जा रहा है कि उनके माता-पिता की तबीयत खराब होने के कारण वे अंतिम प्रक्रियाओं में भी शामिल नहीं हो सके।
मृतकों और घायलों की पहचान
प्रशासन द्वारा जारी जानकारी के अनुसार हादसे में जान गंवाने वालों में कई युवा छात्र और कर्मचारी शामिल हैं। वहीं घायल लोगों का इलाज लखनऊ के प्रमुख चिकित्सा संस्थानों में चल रहा है। कुछ घायलों की हालत अभी भी गंभीर बताई जा रही है।
10 दमकल गाड़ियों ने घंटों की मशक्कत के बाद पाया काबू
आग बुझाने के लिए दमकल विभाग की लगभग 10 गाड़ियों को लगाया गया। बचावकर्मियों ने इमारत की पिछली दीवार तोड़कर अंदर फंसे लोगों तक पहुंचने की कोशिश की। इसी रास्ते से कई लोगों को बाहर निकाला गया। लंबे ऑपरेशन के बाद आग पर नियंत्रण पाया जा सका।
सरकार का एक्शन: गिरफ्तारियां और निलंबन
घटना के बाद प्रशासनिक कार्रवाई तेज हो गई है। भवन मालिक, व्यवसाय संचालक और प्रशिक्षण केंद्र से जुड़े जिम्मेदार लोगों को हिरासत में लिया गया है। वहीं मुख्यमंत्री के निर्देश पर संबंधित विभागों के अधिकारियों के खिलाफ भी कार्रवाई की गई है।
सरकार ने मामले की गहन जांच के लिए विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया है, जिसे निर्धारित समय सीमा में रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया गया है।
पीड़ित परिवारों के लिए आर्थिक सहायता
राज्य सरकार ने मृतकों के परिजनों को आर्थिक सहायता प्रदान करने की घोषणा की है। गंभीर रूप से घायल लोगों के इलाज और पुनर्वास के लिए भी सहायता राशि उपलब्ध कराई जा रही है। प्रशासन का कहना है कि पीड़ित परिवारों को हर संभव मदद दी जाएगी।
चश्मदीद ने सुनाई भयावह कहानी
घटना में घायल हुई एक महिला ने बताया कि आग लगने के बाद पूरी इमारत धुएं से भर गई थी। लोगों को समझ नहीं आ रहा था कि किस दिशा में जाएं। जान बचाने की कोशिश में कई लोग ऊपरी मंजिलों की ओर भागे। कुछ ने खिड़कियों और तारों के सहारे नीचे उतरने का प्रयास किया। अफरा-तफरी के बीच कई लोग घायल हो गए।
बड़ा सवाल: क्या सुरक्षा मानकों की अनदेखी बनी हादसे की वजह?
इस दर्दनाक घटना के बाद सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि क्या भवन में अग्नि सुरक्षा व्यवस्था पर्याप्त थी। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि आग कैसे लगी और क्या सुरक्षा नियमों का पालन किया गया था। यदि लापरवाही सामने आती है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जा सकती है।
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लखनऊ का यह अग्निकांड केवल एक दुर्घटना नहीं, बल्कि सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करने वाली त्रासदी है। 15 लोगों की मौत ने कई परिवारों की खुशियां छीन ली हैं। अब पूरे प्रदेश की नजर जांच रिपोर्ट पर है, जिससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि इस भयावह हादसे के लिए आखिर जिम्मेदार कौन है।









