सीआरपीएफ के जवानों से जुड़ा एक बड़ा सड़क हादसा जम्मू-कश्मीर के गांदरबल जिले में सामने आया है। सोनमर्ग सुरंग के पास सीआरपीएफ का वाहन सड़क से फिसलकर पलट गया, जिसमें छह जवान घायल हो गए। सभी घायलों को प्राथमिक उपचार के बाद अस्पताल और सीआरपीएफ शिविर में भर्ती कराया गया है।
अधिकारियों के अनुसार हादसा श्रीनगर-लेह राष्ट्रीय राजमार्ग पर हुआ, जहां मौसम और पहाड़ी रास्तों की वजह से अक्सर वाहन संचालन चुनौतीपूर्ण माना जाता है।
कैसे हुआ हादसा?
जानकारी के मुताबिक सीआरपीएफ का वाहन सोनमर्ग सुरंग के पास अचानक नियंत्रण खो बैठा और सड़क से फिसल गया। हादसे में वाहन में सवार छह जवान घायल हो गए।
घटना के तुरंत बाद:
- राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया गया
- घायल जवानों को मौके पर प्राथमिक उपचार दिया गया
- बाद में उन्हें गुंड स्थित सीआरपीएफ शिविर ले जाया गया
अधिकारियों ने बताया कि सभी जवानों की हालत स्थिर बताई जा रही है।
श्रीनगर-लेह राजमार्ग पर हुआ हादसा
सोनमर्ग के पास स्थित यह इलाका ऊंचाई और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के लिए जाना जाता है। श्रीनगर-लेह राष्ट्रीय राजमार्ग रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण मार्ग माना जाता है, जहां सुरक्षा बलों की नियमित आवाजाही होती रहती है।
सीआरपीएफ ने बनाया बड़ा रिकॉर्ड
इस हादसे के बीच सीआरपीएफ ने सुरक्षा अभियानों को लेकर एक बड़ी उपलब्धि भी हासिल की है।
सीआरपीएफ के महानिदेशक जी.पी. सिंह ने बताया कि वर्ष 2026 की पहली छमाही में किसी भी अभियान के दौरान बल का कोई जवान शहीद नहीं हुआ।
उन्होंने सोशल मीडिया मंच एक्स पर लिखा कि कई दशकों में यह पहली बार हुआ है जब:
- एक जनवरी से 30 जून 2026 तक
- किसी अभियान में सीआरपीएफ को जान का नुकसान नहीं उठाना पड़ा
नक्सल विरोधी अभियानों का भी जिक्र
महानिदेशक ने कहा कि नक्सलवाद के खिलाफ लगातार चलाए गए अभियानों और बेहतर रणनीति के कारण पिछले नौ महीनों से किसी ऑपरेशन में जवानों की जान नहीं गई है।
उन्होंने इसे बल के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि बताया।
देशभर में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभाती है सीआरपीएफ
सीआरपीएफ देश का सबसे बड़ा अर्धसैनिक बल माना जाता है। इसमें करीब साढ़े तीन लाख के आसपास जवान तैनात हैं।
सीआरपीएफ की मुख्य जिम्मेदारियों में शामिल हैं:
- नक्सल विरोधी अभियान
- जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद विरोधी ऑपरेशन
- पूर्वोत्तर राज्यों में उग्रवाद विरोधी कार्रवाई
- आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखना
आजादी से पहले हुई थी स्थापना
सीआरपीएफ की स्थापना वर्ष 1939 में ब्रिटिश शासन के दौरान की गई थी। आजादी के बाद इसका नाम बदलकर केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल रखा गया।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार अब तक बल के हजारों जवान और अधिकारी ड्यूटी के दौरान देश के लिए अपने प्राण न्योछावर कर चुके हैं।
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सुरक्षा चुनौतियों के बीच अहम भूमिका
विशेषज्ञों का मानना है कि कठिन भौगोलिक परिस्थितियों और लगातार सुरक्षा अभियानों के बावजूद सीआरपीएफ देश की आंतरिक सुरक्षा में बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।









