Red Fort Blast Case: दिल्ली के लाल किला इलाके में नवंबर 2025 में हुए कार ब्लास्ट की जांच में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) की चार्जशीट में कई महत्वपूर्ण दावे सामने आए हैं। एजेंसी के मुताबिक, धमाके में इस्तेमाल कार को Vehicle-Borne Improvised Explosive Device (VBIED) के रूप में इस्तेमाल किया गया था। जांच में फॉरेंसिक साक्ष्यों, DNA रिपोर्ट और अन्य बरामद सामग्रियों के आधार पर पूरे घटनाक्रम की कड़ियों को जोड़ने का दावा किया गया है।
NIA ने इस मामले में मई 2026 में करीब 7,500 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की थी। इसमें 588 गवाहों के बयान, 395 से अधिक दस्तावेज और 200 से ज्यादा जब्त किए गए एग्जिबिट का उल्लेख है।
कार में मौजूद व्यक्ति की DNA से पहचान
चार्जशीट के मुताबिक, घटनास्थल से प्राप्त जैविक नमूनों की फॉरेंसिक जांच के जरिए कार में मौजूद व्यक्ति की पहचान उमर उन नबी के तौर पर की गई।
NIA के अनुसार, DNA फिंगरप्रिंटिंग से उसकी पहचान स्थापित हुई। एजेंसी का दावा है कि इससे यह निष्कर्ष निकालने में मदद मिली कि धमाके के समय उमर उन नबी उसी वाहन में मौजूद था।
NIA की शुरुआती चार्जशीट में उमर उन नबी को मामले का प्रमुख आरोपी बताया गया है। उसकी मौत धमाके में ही हो गई थी, जिसके कारण उसके खिलाफ चल रही कानूनी कार्यवाही को समाप्त करने की प्रक्रिया अपनाई गई।
कमांड मैकेनिज्म भी जांच का अहम हिस्सा
जांच एजेंसी ने घटनास्थल के आसपास से बरामद एक कथित कमांड मैकेनिज्म का भी उल्लेख किया है। NIA के अनुसार, इस बरामदगी और फॉरेंसिक जांच से वाहन में लगाए गए विस्फोटक उपकरण के संचालन को लेकर महत्वपूर्ण सुराग मिले।
चार्जशीट में एजेंसी ने फॉरेंसिक साक्ष्यों और घटनास्थल से मिली सामग्री को जोड़ते हुए वाहन को VBIED के तौर पर इस्तेमाल किए जाने का दावा किया है।
जैसिर बिलाल वानी की भूमिका पर भी जांच
चार्जशीट में जैसिर बिलाल वानी की कथित भूमिका का भी विस्तार से उल्लेख किया गया है। NIA के अनुसार, वह मामले में तकनीकी सहायता देने वाले आरोपियों में शामिल था।
जांच एजेंसी ने आरोप लगाया है कि वानी ने डिजिटल प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल विस्फोटक उपकरणों और रॉकेट से संबंधित जानकारी हासिल करने के लिए किया। NIA ने अपनी जांच में उसके द्वारा कथित तौर पर तैयार किए गए उपकरणों और उनके परीक्षण से जुड़े साक्ष्यों का भी उल्लेख किया है।
एजेंसी के अनुसार, उमर उन नबी ने वानी को ड्रोन भी उपलब्ध कराए थे और उनकी क्षमता बढ़ाने से जुड़ा काम सौंपा था। यह पहलू भी कथित साजिश की जांच का हिस्सा है।
नौगाम पुलिस स्टेशन मामले का भी जिक्र
चार्जशीट में जम्मू-कश्मीर के नौगाम पुलिस स्टेशन केस से जुड़ी घटनाओं का भी उल्लेख किया गया है। जांच के दौरान एक आरोपी से जुड़े ठिकाने से कथित तौर पर ऐसी सामग्री बरामद होने की बात कही गई, जिसकी जांच की जा रही थी।
NIA की चार्जशीट में नवंबर 2025 में नौगाम पुलिस स्टेशन परिसर में हुई घटना को भी जांच की व्यापक कड़ियों से जोड़ा गया है। एजेंसी ने विभिन्न मामलों में बरामद सामग्री और आरोपियों के बीच संबंधों की जांच की है।
फॉरेंसिक जांच पर NIA का खास जोर
इस मामले की जांच में वैज्ञानिक और फॉरेंसिक साक्ष्यों को महत्वपूर्ण आधार बनाया गया है। NIA ने अपनी चार्जशीट में घटनास्थल से मिले अवशेषों, जैविक नमूनों और अन्य जब्त सामग्री की प्रयोगशाला जांच का उल्लेख किया है।
एजेंसी का कहना है कि अलग-अलग फॉरेंसिक जांचों से मिले परिणामों ने विस्फोट में इस्तेमाल सामग्री और वाहन के संबंध में जांच को आगे बढ़ाने में मदद की।
यह जांच इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि NIA ने मामले में केवल घटनास्थल के साक्ष्यों पर निर्भर रहने के बजाय अलग-अलग राज्यों से जुटाए गए सबूतों, डिजिटल साक्ष्यों और गवाहों के बयानों को एक साथ जोड़ने का प्रयास किया है।
Signal ऐप और कोड नेम का भी उल्लेख
चार्जशीट में आरोपियों के बीच डिजिटल संचार से जुड़े साक्ष्यों का भी जिक्र है। जांच एजेंसी के अनुसार, कुछ आरोपियों ने आपसी संपर्क के लिए एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल किया।
NIA ने कथित तौर पर बरामद डिजिटल सामग्री और अन्य दस्तावेजों के आधार पर आरोपियों के बीच संपर्क और विचारधारा से जुड़े पहलुओं की भी जांच की है।
कट्टरपंथी साहित्य और आतंकी संगठन से कनेक्शन का दावा
NIA ने चार्जशीट में आरोप लगाया है कि मामले में नामजद आरोपी Ansar Ghazwat-ul-Hind (AGuH) से जुड़े थे, जिसे एजेंसी ने Al-Qaida in the Indian Subcontinent (AQIS) से संबंधित संगठन बताया है। NIA के मुताबिक, आरोपियों के बीच कथित कट्टरपंथी विचारधारा और संगठनात्मक गतिविधियों से जुड़े साक्ष्य मिले हैं।
एजेंसी ने डिजिटल उपकरणों और अन्य स्रोतों से कथित तौर पर बरामद साहित्य को भी जांच का हिस्सा बनाया है। हालांकि, चार्जशीट में लगाए गए आरोपों का अंतिम न्यायिक निर्धारण अदालत की प्रक्रिया के बाद ही होगा।
उमर उन नबी के खिलाफ कार्यवाही समाप्त
NIA की चार्जशीट में उमर उन नबी को प्रमुख आरोपी के तौर पर नामित किया गया था। चूंकि उसकी मौत नवंबर 2025 के धमाके में ही हो गई थी, इसलिए उसके खिलाफ कानूनी कार्यवाही को उसकी मृत्यु के कारण समाप्त करने का प्रस्ताव रखा गया।
बाकी आरोपियों के खिलाफ विभिन्न धाराओं के तहत कार्रवाई जारी है। मई में दाखिल चार्जशीट के बाद अगस्त 2026 में विशेष NIA अदालत ने मामले में दाखिल चार्जशीट का संज्ञान भी लिया। अदालत ने मामले में अगली सुनवाई के लिए 9 सितंबर की तारीख तय की थी।
जांच में सामने आई बड़ी तस्वीर
NIA की जांच के अनुसार, रेड फोर्ट ब्लास्ट मामले में कई स्तरों पर साक्ष्य जुटाए गए हैं—घटनास्थल की फॉरेंसिक जांच, DNA पहचान, डिजिटल संचार, बरामद सामग्री और आरोपियों के बीच कथित संपर्क।
एजेंसी का दावा है कि इन सभी कड़ियों को जोड़कर नवंबर 2025 के हमले की व्यापक साजिश को सामने लाया गया है। हालांकि, चार्जशीट में लगाए गए आरोप अभी न्यायिक जांच और सुनवाई की प्रक्रिया के अधीन हैं।









