Water Sufficient Gram Panchayat: ग्राम पंचायतों को जल के लिहाज से आत्मनिर्भर और सुरक्षित बनाने की दिशा में पंचायती राज मंत्रालय की पहल के तहत तीन दिवसीय Training of Trainers (ToT) – Phase II का आयोजन किया जा रहा है। प्रशिक्षण का विषय “जल बजटिंग और जल सुरक्षा योजनाओं के माध्यम से जल-पर्याप्त ग्राम पंचायतें” है। कार्यक्रम झारखंड के रांची स्थित केंद्रीय प्रशिक्षण संस्थान में आयोजित हो रहा है।
कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र को पंचायती राज मंत्रालय की संयुक्त सचिव पालका साहनी ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से संबोधित किया।
जमीनी जरूरतों के आधार पर बने Water Budget
पालका साहनी ने जोर दिया कि ग्राम पंचायतों के लिए जल बजट और जल सुरक्षा योजना तैयार करते समय स्थानीय परिस्थितियों और वास्तविक जरूरतों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
उन्होंने कहा कि जल बजट तैयार करने की प्रक्रिया जमीनी स्तर से शुरू होनी चाहिए और इसमें संबंधित ग्राम पंचायत में उपलब्ध वास्तविक जल संसाधनों, स्थानीय परिस्थितियों तथा समुदाय की जरूरतों को ध्यान में रखा जाना चाहिए।
इस तरह की स्थानीय योजना ग्राम पंचायतों को अपने जल संसाधनों की बेहतर समझ विकसित करने, पानी के संरक्षण की प्रभावी रणनीति बनाने और भविष्य की जल जरूरतों के लिए तैयारी करने में मदद कर सकती है।
पीएम मोदी के ‘जल शक्ति’ विजन को जमीनी स्तर पर लागू करने पर जोर
पालका साहनी ने कहा कि स्थानीय स्तर पर तैयार किए गए जल बजट और जल सुरक्षा प्लान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जल शक्ति संबंधी विजन को ग्राम पंचायत स्तर पर व्यावहारिक रूप देने में मदद कर सकते हैं।
इसका उद्देश्य केवल पानी की उपलब्धता का आकलन करना नहीं, बल्कि उपलब्ध संसाधनों के आधार पर ग्राम पंचायतों को बेहतर योजना बनाने और जल संरक्षण के लिए स्थानीय स्तर पर ठोस कदम उठाने में सक्षम बनाना है।
सामुदायिक भागीदारी को बताया अहम
पंचायती राज मंत्रालय के निदेशक विपुल उज्ज्वल ने स्थानीय जल चुनौतियों से निपटने में सामुदायिक भागीदारी और Peer Learning की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया।
उन्होंने कहा कि Water Budgets और Water Security Plans केवल दस्तावेज बनकर नहीं रहने चाहिए, बल्कि इन्हें जल संरक्षण और जल संसाधनों के विवेकपूर्ण इस्तेमाल के लिए व्यावहारिक Action Plans के रूप में विकसित किया जाना चाहिए।
इससे ग्राम पंचायतों में स्थानीय समुदाय की भागीदारी बढ़ाने और एक-दूसरे के सफल अनुभवों से सीखने का अवसर मिलेगा।
5 राज्यों के 30 प्रतिभागी ले रहे प्रशिक्षण
झारखंड सरकार के पंचायती राज विभाग की ओर से पंचायती राज मंत्रालय के सहयोग से आयोजित इस प्रशिक्षण में पांच राज्यों के कुल 30 प्रतिभागी हिस्सा ले रहे हैं।
इन राज्यों में शामिल हैं:
- बिहार
- झारखंड
- छत्तीसगढ़
- मध्य प्रदेश
- पश्चिम बंगाल
प्रशिक्षण का उद्देश्य इन प्रतिभागियों की क्षमता को मजबूत करना है, ताकि वे ग्राम पंचायत स्तर पर जल प्रबंधन, संरक्षण और दीर्घकालिक जल सुरक्षा से जुड़ी योजनाओं को प्रभावी तरीके से आगे बढ़ा सकें।
5 राज्यों की 500 ग्राम पंचायतों को बनाया जाएगा Water-Sufficient
इस पहल के तहत पांचों सहभागी राज्यों में कुल 500 ग्राम पंचायतों को जल पर्याप्त ग्राम पंचायत के रूप में विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है।
प्रत्येक राज्य की 100 ग्राम पंचायतों को इस पहल में शामिल किया जाएगा।
| राज्य | लक्षित ग्राम पंचायतें |
|---|---|
| बिहार | 100 |
| झारखंड | 100 |
| छत्तीसगढ़ | 100 |
| मध्य प्रदेश | 100 |
| पश्चिम बंगाल | 100 |
| कुल | 500 |
इस पहल के जरिए स्थानीय स्तर पर जल संरक्षण, उपलब्ध जल संसाधनों के बेहतर प्रबंधन और भविष्य की जरूरतों के अनुरूप जल सुरक्षा की योजना को मजबूत करने पर जोर दिया जाएगा।
PRADAN दे रहा तकनीकी सहयोग
प्रशिक्षण कार्यक्रम को PRADAN की तकनीकी सहायता प्राप्त है। यह पहल पंचायती राज मंत्रालय के सहयोग से संचालित की जा रही है।
Training of Trainers मॉडल के जरिए प्रतिभागियों को आवश्यक ज्ञान और कौशल प्रदान करने का प्रयास किया जा रहा है, ताकि आगे ग्राम पंचायत स्तर पर जल बजट और जल सुरक्षा योजनाओं को तैयार करने और लागू करने की क्षमता विकसित हो सके।
क्यों महत्वपूर्ण है Water Budgeting?
जल बजटिंग के जरिए ग्राम पंचायत किसी क्षेत्र में उपलब्ध जल और उसकी संभावित मांग का स्थानीय स्तर पर आकलन कर सकती है। इसके आधार पर जल संरक्षण, उपयोग और भविष्य की जरूरतों को लेकर प्राथमिकताएं तय करने में मदद मिलती है।
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वहीं, Water Security Plan स्थानीय जल संसाधनों की सुरक्षा और टिकाऊ इस्तेमाल के लिए एक दीर्घकालिक कार्ययोजना का आधार बन सकता है। यही वजह है कि इस पहल में स्थानीय परिस्थितियों, समुदाय की भागीदारी और व्यावहारिक कार्ययोजना को प्रमुखता दी जा रही है।









