मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर कांग्रेस और बीजेपी के बीच विवाद बढ़ता जा रहा है। कांग्रेस कार्यसमिति (CWC) की बैठक के बाद पार्टी ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर कई सवाल उठाए। इसके बाद बीजेपी ने कांग्रेस के आरोपों पर पलटवार करते हुए उस पर चुनाव आयोग और लोकतांत्रिक संस्थाओं को निशाना बनाने का आरोप लगाया।
बीजेपी की ओर से महासचिव स्मृति ईरानी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कांग्रेस के आरोपों पर जवाब दिया। वहीं कांग्रेस सांसद जयराम रमेश ने CWC की बैठक के बाद पार्टी की ओर से उठाए गए मुद्दों और मांगों की जानकारी दी।
स्मृति ईरानी का कांग्रेस पर हमला
स्मृति ईरानी ने कहा कि कांग्रेस चुनावों में मिली हार की समीक्षा करने के बजाय चुनाव आयोग पर हमला कर रही है। उन्होंने सवाल उठाया कि जिन राज्यों में कांग्रेस की सरकार नहीं है, वहां क्या चुनाव आयोग को लेकर पार्टी का रुख अलग है।
ईरानी ने मतदाता सूची में मृत और डुप्लीकेट नामों का मुद्दा उठाते हुए कांग्रेस से सवाल किया कि वह ऐसे नामों को मतदाता सूची में बनाए रखने की मांग क्यों कर रही है।
उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग ने मतदाता सूची के सत्यापन को लेकर अपनी प्रक्रिया स्पष्ट की है। उनके मुताबिक, जिन मामलों में सत्यापन की जरूरत है, वहां बूथ लेवल अधिकारी संबंधित मतदाताओं के घर जाकर दस्तावेजों की जांच और जानकारी की पुष्टि कर सकते हैं।
13.30 करोड़ नामों को लेकर विवाद
SIR प्रक्रिया के दौरान मतदाता सूची से करीब 13 करोड़ 30 लाख नाम हटाए जाने को लेकर कांग्रेस और बीजेपी के बीच राजनीतिक विवाद है।
बीजेपी का कहना है कि हटाए गए नामों में मृत लोगों, डुप्लीकेट प्रविष्टियों और अन्य कारणों से अयोग्य नाम शामिल हैं। दूसरी ओर, कांग्रेस इस पूरी प्रक्रिया और इतने बड़े पैमाने पर नाम हटाए जाने को लेकर सवाल उठा रही है।
कांग्रेस का कहना है कि जिन मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए हैं, उनके अधिकारों की रक्षा और उचित सत्यापन सुनिश्चित किया जाना चाहिए।
कांग्रेस ने की मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग
CWC की बैठक के बाद कांग्रेस ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की। पार्टी ने SIR प्रक्रिया को तत्काल रोकने और मतदाता सूची से हटाए गए नामों को दोबारा शामिल करने की मांग भी उठाई।
कांग्रेस की प्रमुख मांगें हैं:
- मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार तत्काल इस्तीफा दें।
- SIR प्रक्रिया को तत्काल रोका जाए।
- मतदाता सूची से हटाए गए करीब 13.30 करोड़ नामों को बहाल किया जाए।
- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी इस्तीफा दें।
कांग्रेस ने इन मांगों को मतदाता सूची और चुनाव प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं से जुड़े अपने अभियान के साथ जोड़ा है।
जयराम रमेश बोले- दो साल से उठा रहे हैं ‘वोट चोरी’ का मुद्दा
कांग्रेस सांसद जयराम रमेश ने कहा कि राहुल गांधी पिछले करीब दो वर्षों से कथित ‘वोट चोरी’ के मुद्दे को उठा रहे हैं। उन्होंने कर्नाटक के महादेवपुरा, हरियाणा और महाराष्ट्र के चुनावों का जिक्र करते हुए कहा कि कांग्रेस ने इन मामलों से जुड़ी जानकारी जनता के सामने रखी है।
रमेश ने आरोप लगाया कि देश में हो रहे चुनाव निष्पक्ष नहीं हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का नाम लेते हुए चुनाव प्रक्रिया में मिलीभगत का आरोप लगाया।
उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस की राजनीति केवल विरोध तक सीमित नहीं है। उनके मुताबिक, पार्टी संसद में विरोध और सड़कों पर प्रतिरोध जारी रखेगी।
स्मृति ईरानी ने 2019 के बयान का किया जिक्र
स्मृति ईरानी ने अपने बयान में 2019 में कांग्रेस नेतृत्व की ओर से नरेंद्र मोदी की राजनीतिक छवि को नुकसान पहुंचाने से संबंधित एक पुराने बयान का भी उल्लेख किया।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने पहले भी राजनीतिक विरोधियों से उन पर हमला करने, लेकिन लोकतंत्र और संवैधानिक संस्थाओं पर हमला नहीं करने की अपील की थी।
ईरानी ने चुनाव आयोग को देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा बताते हुए कहा कि संस्थाओं को मजबूत करना जरूरी है।
कांग्रेस के इतिहास का भी किया जिक्र
बीजेपी महासचिव ने कांग्रेस के इतिहास का उल्लेख करते हुए उसके गठन और ब्रिटिश शासन के दौर से जुड़े ऐतिहासिक संदर्भों को सामने रखा। उन्होंने कांग्रेस द्वारा लाहौर अधिवेशन का उल्लेख किए जाने पर पार्टी के शुरुआती इतिहास की चर्चा की।
ईरानी ने कांग्रेस पर चुनाव आयोग को लेकर राजनीतिक हमला करने का आरोप लगाया और कहा कि लोकतांत्रिक संस्थाओं पर सवाल उठाते समय इतिहास के दूसरे पहलुओं को भी सामने रखना चाहिए।
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SIR को लेकर जारी है राजनीतिक टकराव
SIR और मतदाता सूची का मुद्दा अब बीजेपी और कांग्रेस के बीच बड़े राजनीतिक विवाद का रूप ले चुका है। कांग्रेस प्रक्रिया में पारदर्शिता, मतदाताओं के अधिकार और बड़ी संख्या में नाम हटाए जाने पर सवाल उठा रही है। वहीं बीजेपी का कहना है कि मतदाता सूची को साफ और सही रखना जरूरी है तथा मृत और डुप्लीकेट नामों को हटाने की प्रक्रिया का विरोध नहीं किया जाना चाहिए।








