‘पीस बॉन्ड पर हस्ताक्षर नहीं करेंगे’
नेहा बोरा ने कहा कि पिछले कुछ दिनों में देशभर में SIR के खिलाफ और ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर आंदोलन देखने को मिला है। उन्होंने आरोप लगाया कि लोगों से लोकतांत्रिक तरीके से असहमति जताने का अधिकार छीना जा रहा है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि वे पीस बॉन्ड पर हस्ताक्षर नहीं करेंगी और इस मुद्दे को चुनौती देती रहेंगी। उनके मुताबिक, इस तरह के बॉन्ड का इस्तेमाल शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक प्रदर्शनों को रोकने के लिए नहीं किया जाना चाहिए।
नेहा बोरा ने कहा कि अगर ऐसे बॉन्ड पर हस्ताक्षर किए जाते हैं, तो इससे यह संदेश जा सकता है कि लोकतांत्रिक विरोध प्रदर्शनों को रोकने के लिए इस तरह की शर्तों का इस्तेमाल किया जा सकता है।
‘लोकतंत्र का मतलब सिर्फ वोट देना नहीं’
प्रेस कॉन्फ्रेंस में नेहा बोरा ने लोकतंत्र और नागरिक अधिकारों को लेकर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र को आम लोग मुख्य रूप से दो अधिकारों से जोड़कर देखते हैं। पहला, वोट देने का अधिकार और दूसरा, अपने अधिकारों पर हमले के खिलाफ आवाज उठाने की आजादी।
उन्होंने आरोप लगाया कि SIR प्रक्रिया के जरिए लोगों के मतदान के अधिकार पर असर पड़ रहा है। नेहा बोरा ने दावा किया कि करीब 13 करोड़ लोगों के नाम मतदाता सूची से हटाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि चुनाव लोकतंत्र का महत्वपूर्ण आधार हैं और मतदाता सूची से जुड़े फैसलों का सीधा संबंध नागरिकों के मतदान के अधिकार से है।
नोटिस को हाई कोर्ट में दी चुनौती
नेहा बोरा ने बताया कि उन्हें जो नोटिस मिला, उसे चुनौती देने के लिए वे हाई कोर्ट गईं। उन्होंने कहा कि नोटिस को चुनौती देना जरूरी था और इसी वजह से उन्होंने कानूनी रास्ता अपनाया।
उन्होंने सरकार की ओर से प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए उठाए गए कदमों पर भी सवाल खड़े किए। उनके अनुसार, लोकतांत्रिक व्यवस्था में लोगों को अपनी बात रखने और शांतिपूर्ण तरीके से विरोध जताने का अधिकार मिलना चाहिए।
SIR और लोकतांत्रिक अधिकारों पर उठाए सवाल
नेहा बोरा ने अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस में SIR प्रक्रिया को लेकर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि मतदाता सूची से नाम हटाए जाने के मुद्दे पर पारदर्शिता और जवाबदेही जरूरी है।
उन्होंने लोकतंत्र में असहमति के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि नागरिकों को अपने अधिकारों से जुड़े मुद्दों पर सवाल उठाने की स्वतंत्रता होनी चाहिए। AISA अध्यक्ष ने पीस बॉन्ड पर हस्ताक्षर न करने के फैसले को इसी अधिकार की रक्षा से जोड़कर पेश किया।
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नेहा बोरा के बयान के केंद्र में मतदान का अधिकार, शांतिपूर्ण प्रदर्शन और सरकार की नीतियों का विरोध करने की स्वतंत्रता रही। SIR को लेकर उनके आरोपों और मतदाता सूची से नाम हटाए जाने के दावे पर संबंधित आधिकारिक आंकड़ों की पुष्टि अलग से किया जाना जरूरी है।









