आगामी फिल्म ‘इक्कीस (Ikkis) की शूटिंग पूरी हो चुकी है और यह दिसंबर 2025 में रिलीज़ होने जा रही है। ये फिल्म द्वितीय लेफ्टिनेंट अरुण खेतरपाल के जीवन पर आधारित है। फिल्म का निर्देशन श्रीराम राघवन ने किया है और इसे मैडॉक फिल्म्स ने प्रोड्यूस किया है। फिल्म में अगस्त्य नंदा मुख्य भूमिका में नजर आएंगे, जबकि धर्मेंद्र भी अहम किरदार में हैं।
अरुण खेतरपाल भारत के सबसे कम उम्र के परमवीर चक्र प्राप्तकर्ता थे, उन्होंने 1971 के भारत-पाक युद्ध में मात्र 21 वर्ष की उम्र में शहादत दी थी। उनकी जयंती (14 अक्टूबर) के मौके पर फिल्म निर्माताओं ने अगस्त्य नंदा का फर्स्ट लुक पोस्टर जारी करते हुए शूटिंग पूरी होने की घोषणा की।
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फिल्म का परिचय
‘इक्कीस’ आगस्त्य नंदा की पहली थिएट्रिकल रिलीज़ होगी। इससे पहले उन्होंने अपने करियर की शुरुआत जोया अख्तर की नेटफ्लिक्स फिल्म ‘द आर्चीज़’ (2023) से की थी। इस फिल्म में उनके साथ खुशी कपूर और सुहाना खान भी डेब्यू करती नजर आई थीं। भले ही ‘द आर्चीज़’ को मिश्रित प्रतिक्रियाएं मिलीं, लेकिन आगस्त्या की परफॉर्मेंस की काफी सराहना की गई थी।
‘इक्कीस’ में आगस्त्य के साथ सिकंदर खेर, जयदीप अहलावत, श्री बिश्नोई, एकावली खन्ना, और मोहन गोडारा जैसे कलाकार भी नजर आएंगे।
अरुण खेतरपाल की वीर गाथा
द्वितीय लेफ्टिनेंट अरुण खेतरपाल का जन्म पुणे में एक ऐसे परिवार में हुआ था, जिसकी कई पीढ़ियाँ भारतीय सेना से जुड़ी रहीं। उनके परदादा सिख ख़ालसा सेना में थे, दादा ने प्रथम विश्व युद्ध में भाग लिया था और पिता लेफ्टिनेंट कर्नल एम.एल. खेतरपाल भारतीय सेना के इंजीनियर्स कोर में अधिकारी थे।
अरुण खेतरपाल ने पढ़ाई के साथ-साथ खेल और अन्य गतिविधियों में भी उत्कृष्ट प्रदर्शन किया और बाद में उन्होंने नेशनल डिफेंस एकेडमी (NDA) में प्रवेश लिया। प्रशिक्षण के बाद उन्हें 17 पूना हॉर्स रेजिमेंट में कमीशन मिला।
1971 का भारत-पाक युद्ध
दिसंबर 1971 में भारत-पाक युद्ध के दौरान अरुण खेतरपाल और उनकी यूनिट को बसान्तर नदी पार कर एक ब्रिजहेड (सैन्य ठिकाना) स्थापित करने का आदेश मिला। ऑपरेशन के दौरान उन्हें घने माइनों और भारी दुश्मन हमले का सामना करना पड़ा। इस मुश्किल घड़ी में खेतरपाल ने खुद कमान संभाली और अपने टैंक से सीधे पाकिस्तानी टैंकों पर हमला बोल दिया। उन्होंने अपनी टुकड़ी के साथ मिलकर दस दुश्मन टैंकों को नष्ट किया, लेकिन इस दौरान गंभीर रूप से घायल हो गए और वीरगति को प्राप्त हुए।
उनके असाधारण साहस और नेतृत्व के लिए उन्हें मरणोपरांत परमवीर चक्र से सम्मानित किया गया, वे इस सर्वोच्च सैन्य सम्मान को पाने वाले भारत के सबसे युवा योद्धा हैं।









