भारतीय जनता पार्टी ने बांकीपुर विधानसभा सीट पर होने वाले उपचुनाव के लिए अपने उम्मीदवार के नाम का ऐलान कर दिया है। पार्टी ने मंगलवार को अभिषेक कुमार को प्रत्याशी बनाकर राजनीतिक हलकों में नई चर्चा छेड़ दी।
बीजेपी के इस फैसले को इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि उम्मीदवार को लेकर लंबे समय से कई बड़े नाम चर्चा में थे, लेकिन पार्टी ने अंत में एक नए चेहरे पर भरोसा जताया।
अभिषेक कुमार के नाम ने सबको चौंकाया
राजनीतिक गलियारों में अभिषेक कुमार का नाम पहले प्रमुख दावेदारों में शामिल नहीं माना जा रहा था। ऐसे में जब पार्टी की आधिकारिक सूची जारी हुई, तो कई लोगों के लिए यह फैसला चौंकाने वाला साबित हुआ।
सूत्रों के अनुसार, पार्टी के भीतर कई वरिष्ठ और चर्चित नामों पर विचार चल रहा था, लेकिन अंतिम समय में बीजेपी नेतृत्व ने अभिषेक कुमार को मैदान में उतारने का फैसला किया।
नील रतन घोष और अजय आलोक के नाम थे चर्चा में
नील रतन घोष का नाम सबसे मजबूत दावेदारों में माना जा रहा था। राजनीतिक चर्चाओं में कहा जा रहा था कि वह इस सीट पर बीजेपी की पहली पसंद हो सकते हैं।
इसके अलावा अजय आलोक के नाम को लेकर भी अटकलें चल रही थीं। हालांकि पार्टी ने अंततः इन दोनों नेताओं को टिकट नहीं दिया।
RJD पहले ही घोषित कर चुकी है उम्मीदवार
इससे पहले राष्ट्रीय जनता दल ने रेखा गुप्ता को उम्मीदवार बनाने का ऐलान कर दिया था।
अब बांकीपुर उपचुनाव में बीजेपी और RJD के बीच सीधा मुकाबला देखने को मिल सकता है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह सीट इस बार काफी हाई प्रोफाइल बन चुकी है।
प्रशांत किशोर की भूमिका पर भी नजर
चुनाव में प्रशांत किशोर और उनकी राजनीतिक रणनीति पर भी नजर बनी हुई है। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि तीसरे मोर्चे या अन्य उम्मीदवारों की मौजूदगी चुनावी समीकरणों को प्रभावित कर सकती है।
ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि विपक्षी वोट किस तरह बंटते हैं और इसका फायदा किस दल को मिलता है।
क्यों अहम है बांकीपुर सीट?
बांकीपुर विधानसभा सीट राजधानी पटना की प्रमुख सीटों में गिनी जाती है। इस सीट का राजनीतिक प्रभाव राज्य की राजनीति में काफी अहम माना जाता है।
यह सीट नितिन नवीन के राज्यसभा जाने के बाद खाली हुई थी, जिसके कारण यहां उपचुनाव कराया जा रहा है।
कांटे की टक्कर के आसार
राजनीतिक समीकरणों और उम्मीदवारों की घोषणा के बाद अब यह साफ माना जा रहा है कि बांकीपुर उपचुनाव में मुकाबला बेहद दिलचस्प और करीबी हो सकता है।
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बीजेपी जहां सीट बचाने की कोशिश करेगी, वहीं विपक्ष इसे सत्ता पक्ष के खिलाफ बड़ा राजनीतिक संदेश बनाने की तैयारी में है। अब सभी की नजर चुनाव प्रचार और मतदाताओं के रुख पर टिकी हुई है।








