कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी को कथित आय से अधिक संपत्ति मामले में सुप्रीम कोर्ट से फिलहाल राहत मिली है। यह मामला हाई कोर्ट के उस आदेश से जुड़ा है, जिसमें केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) और प्रवर्तन निदेशालय (ED) को मामले की जांच से संबंधित कार्रवाई के निर्देश दिए गए थे।
राहुल गांधी ने हाई कोर्ट के आदेश को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। सुनवाई के दौरान शीर्ष अदालत ने CBI और ED को निर्देश दिया कि वे इस मामले में इलाहाबाद हाई कोर्ट के समक्ष फिलहाल कोई रिपोर्ट दाखिल न करें।
सुप्रीम कोर्ट ने क्या निर्देश दिया?
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि राहुल गांधी की याचिका की प्रति मामले के शिकायतकर्ता को उपलब्ध कराई जाए। साथ ही CBI और ED को निर्देश दिया गया कि वे आय से अधिक संपत्ति के आरोपों से जुड़े मामले में इलाहाबाद हाई कोर्ट के समक्ष कोई रिपोर्ट पेश न करें।
मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि यदि पुलिस या कोई जांच एजेंसी किसी व्यक्ति के खिलाफ प्रथम दृष्टया मामला पाती है, तो वह कानून के मुताबिक मामला दर्ज कर जांच आगे बढ़ा सकती है। इसके लिए हर स्थिति में अदालत की अनुमति आवश्यक नहीं होती। सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी का केंद्र प्राकृतिक न्याय का सिद्धांत रहा।
हालांकि, यदि अदालत स्वयं किसी जांच एजेंसी को कोई विशेष निर्देश देना चाहती है, तो संबंधित पक्षों को सुनने और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का पालन करने की आवश्यकता होती है।
कपिल सिब्बल ने हाई कोर्ट की कार्यवाही पर उठाए सवाल
राहुल गांधी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने सुप्रीम कोर्ट में दलीलें रखीं। उन्होंने इलाहाबाद हाई कोर्ट की कार्यवाही को कानून की स्थापित प्रक्रिया के अनुरूप नहीं बताया।
सिब्बल ने शिकायतकर्ता की याचिका की वैधता और उसके पीछे की मंशा पर भी सवाल उठाए। उन्होंने अदालत को बताया कि शिकायतकर्ता राहुल गांधी के खिलाफ लगातार याचिकाएं दायर करता रहा है।
राहुल गांधी की ओर से यह भी आरोप लगाया गया कि याचिकाकर्ता ने अपनी राजनीतिक संबद्धता से जुड़ी जानकारी अदालत के समक्ष पूरी तरह स्पष्ट नहीं की। इन दलीलों के जरिए बचाव पक्ष ने हाई कोर्ट में याचिका दाखिल करने वाले व्यक्ति की विश्वसनीयता और अधिकार क्षेत्र पर सवाल उठाया।
क्या है आय से अधिक संपत्ति का मामला?
यह मामला बीजेपी कार्यकर्ता विग्नेश शिशिर की ओर से दायर याचिका से जुड़ा है। याचिका में राहुल गांधी की विदेश यात्राओं और उनकी घोषित आय के बीच कथित असंगति का दावा किया गया था।
शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी ने विदेश यात्राओं पर करीब 60 करोड़ रुपये खर्च किए हैं और यह राशि उनकी घोषित आय की तुलना में काफी अधिक है। इसी आधार पर मामले की जांच की मांग की गई थी।
इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ बेंच ने मामले में CBI और ED से जुड़ी जांच को लेकर निर्देश जारी किए थे। राहुल गांधी ने इसी आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है।
हाई कोर्ट में 20 अगस्त को होनी थी सुनवाई
मामले में इलाहाबाद हाई कोर्ट ने जांच एजेंसियों को जांच की प्रगति से अदालत को अवगत कराने का निर्देश दिया था। इसके बाद 20 जुलाई को पारित एक आदेश में हाई कोर्ट ने CBI की ओर से दाखिल हलफनामे पर असंतोष जताया था और कहा था कि वह पहले दिए गए निर्देश के अनुरूप नहीं था।
हाई कोर्ट ने यह भी कहा था कि ED ने आवश्यक कदम उठाए हैं और जांच के दौरान यदि कोई प्रासंगिक जानकारी सामने आती है, तो एजेंसी कानून के तहत आवश्यक कार्रवाई कर सकती है।
इसके बाद मामले को आगे की सुनवाई के लिए 20 अगस्त को सूचीबद्ध किया गया था। अब सुप्रीम कोर्ट के ताजा निर्देश के बाद इस कार्यवाही पर फिलहाल विराम लग गया है।
राहुल गांधी ने ट्रांसफर याचिका भी दायर की
राहुल गांधी ने सुप्रीम कोर्ट में एक अलग ट्रांसफर याचिका भी दायर की है। इसमें उन्होंने आय से अधिक संपत्ति से जुड़े मामले को इलाहाबाद हाई कोर्ट से दिल्ली हाई कोर्ट स्थानांतरित करने की मांग की है।
फिलहाल सुप्रीम कोर्ट में मुख्य सवाल हाई कोर्ट द्वारा जांच एजेंसियों को दिए गए निर्देश और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों से जुड़ा है। शीर्ष अदालत की अगली कार्यवाही से यह स्पष्ट होगा कि मामले की जांच और हाई कोर्ट की आगे की सुनवाई किस दिशा में जाएगी।
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सुप्रीम कोर्ट के मौजूदा निर्देश का अर्थ यह नहीं है कि राहुल गांधी के खिलाफ लगाए गए आरोपों पर अंतिम फैसला हो गया है। फिलहाल अदालत ने हाई कोर्ट की प्रस्तावित कार्यवाही और जांच एजेंसियों की रिपोर्ट दाखिल करने पर रोक जैसी राहत दी है। मामले के आरोपों की अंतिम वैधता या जांच के निष्कर्ष पर अभी कोई अंतिम निर्णय नहीं हुआ है।








