असम विधानसभा चुनाव से ठीक पहले कांग्रेस पार्टी को बड़ा राजनीतिक नुकसान हुआ है। पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष भूपेन बोरा ने कांग्रेस की प्राथमिक सदस्यता और सभी पदों से इस्तीफा दे दिया है। उनके इस फैसले से राज्य की सियासत में हलचल तेज हो गई है।
मल्लिकार्जुन खरगे को भेजा त्यागपत्र
समाचार एजेंसी Press Trust of India (PTI) की रिपोर्ट के मुताबिक, भूपेन बोरा ने अपना इस्तीफा कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे को भेजा है।
बताया जा रहा है कि उन्होंने पत्र में पार्टी नेतृत्व द्वारा लगातार अनदेखी और राज्य इकाई में उचित स्थान न दिए जाने की बात कही है।
मीडिया से क्या बोले भूपेन बोरा?
गुवाहाटी में पत्रकारों से बातचीत के दौरान भूपेन बोरा ने कहा कि उन्होंने सुबह 8 बजे कांग्रेस आलाकमान को अपना इस्तीफा भेज दिया और विस्तार से बताया कि किन परिस्थितियों में उन्हें यह कदम उठाना पड़ा।
उन्होंने कहा कि यह उनका निजी निर्णय है और जब उचित लगेगा तब वे विस्तार से कारणों पर चर्चा करेंगे।
किन नेताओं ने किया संपर्क?
इस्तीफे के बाद राज्य के कई नेताओं ने उनसे संपर्क किया। बोरा ने बताया कि:
- अखिल गोगोई ने कहा कि उनके दरवाजे खुले हैं।
- लुरिन गोगोई ने भी उन्हें फोन किया।
- CPI(M) की ओर से भी संपर्क किया गया।
- कांग्रेस हाईकमान ने भी बातचीत की।
हालांकि उन्होंने यह स्पष्ट किया कि यह कोई असाधारण बात नहीं है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि पार्टी के भीतर समन्वय की कमी और निर्णय प्रक्रिया को लेकर असंतोष लंबे समय से था।
उन्होंने कहा कि यदि पार्टी यह तय नहीं कर पा रही कि माजुली यात्रा में किसे शामिल किया जाए, तो भविष्य को लेकर गंभीरता से विचार करने की आवश्यकता है।
कौन हैं भूपेन बोरा?
भूपेन बोरा 2021 से 2025 तक असम कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष रहे। बाद में उनकी जगह गौरव गोगोई को जिम्मेदारी दी गई।
वे असम में दो बार विधायक रह चुके हैं और राज्य की राजनीति में प्रभावशाली चेहरा माने जाते हैं। उनके इस्तीफे से कांग्रेस संगठन को चुनावी तैयारी के बीच बड़ा झटका लगा है।
रिपुन बोरा ने भी छोड़ी कांग्रेस
इसी बीच असम कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और पूर्व राज्यसभा सांसद रिपुन बोरा ने भी पार्टी से इस्तीफा दे दिया है। सूत्रों के मुताबिक उन्होंने भी शीर्ष नेतृत्व को अपना निर्णय बता दिया है, हालांकि उनके इस्तीफे के कारणों की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।
चुनावी रणनीति पर असर?
असम विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस अपनी रणनीति को धार देने में जुटी थी। ऐसे समय में वरिष्ठ नेताओं के इस्तीफे से पार्टी की चुनावी तैयारियों और संगठनात्मक मजबूती पर असर पड़ सकता है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह घटनाक्रम असम की सियासत में नए समीकरण बना सकता है।
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असम में चुनावी माहौल के बीच कांग्रेस को लगातार झटके लग रहे हैं। भूपेन बोरा और रिपुन बोरा जैसे बड़े चेहरों का पार्टी छोड़ना आने वाले दिनों में राज्य की राजनीति को नई दिशा दे सकता है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि कांग्रेस नेतृत्व इस संकट से कैसे उबरता है और आगामी चुनाव में क्या रणनीति अपनाता है।









