ओलंपिक पदक विजेता और देश के चर्चित पहलवान सुशील कुमार को सागर धनकड़ हत्या मामले में सुप्रीम कोर्ट से करारा झटका मिला है। शीर्ष अदालत ने दिल्ली हाई कोर्ट से मिली उनकी जमानत को रद्द करते हुए उन्हें एक सप्ताह के भीतर आत्मसमर्पण करने का आदेश दिया है।
सागर के पिता की याचिका पर सुनवाई
यह फैसला उस याचिका पर सुनवाई के बाद आया, जिसे सागर धनकड़ के पिता अशोक धनकड़ ने दाखिल किया था। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में दलील दी थी कि सुशील कुमार की रिहाई से केस के गवाहों पर खतरा बढ़ गया है। जस्टिस संजय करोल और जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा की बेंच ने इस याचिका पर सुनवाई की।
दोनों पक्षों की दलीलें
अशोक धनकड़ की ओर से वरिष्ठ वकील सिद्धार्थ मृदुल ने अदालत में तर्क दिया कि आरोपी की रिहाई से केस कमजोर हो सकता है और गवाहों को प्रभावित किया जा सकता है। वहीं, सुशील कुमार की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता महेश जेठमलानी ने कहा कि निचली अदालत में गवाहों के परीक्षण में हो रही देरी उनके मुवक्किल की वजह से नहीं है और इसलिए जमानत रद्द नहीं की जानी चाहिए।
हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने सागर के पिता की दलीलों को गंभीरता से लेते हुए मार्च 2024 में दिल्ली हाई कोर्ट द्वारा दी गई जमानत को निरस्त कर दिया।
हाई कोर्ट ने किन आधारों पर दी थी जमानत?
मार्च 2024 में जस्टिस संजीव नरूला की अदालत ने सुशील कुमार को यह कहते हुए जमानत दी थी कि वह साढ़े तीन साल से अधिक समय से जेल में है और ट्रायल की गति बहुत धीमी है। कोर्ट ने माना था कि न्याय में देरी आरोपी के अधिकारों का उल्लंघन करती है।

क्या है पूरा मामला?
4 मई 2021 की रात दिल्ली के छत्रसाल स्टेडियम की पार्किंग में पूर्व जूनियर नेशनल कुश्ती चैंपियन सागर धनकड़ के साथ मारपीट की गई थी। आरोप है कि सुशील कुमार ने अपने कुछ साथियों के साथ मिलकर सागर की बुरी तरह पिटाई की, जिससे उसकी बाद में मौत हो गई। इस वारदात का वीडियो भी सामने आया था, जिसने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया था।
यह भी पढ़ें: बीजेपी बनाम बीजेपी के चुनाव में पुराने सांसद ने अमित शाह के उम्मीदवार को हराया
अब आगे क्या?
सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश के बाद सुशील कुमार को एक हफ्ते के भीतर सरेंडर करना होगा। यदि वह ऐसा नहीं करते, तो उनकी गिरफ्तारी की प्रक्रिया शुरू हो सकती है। अब निगाहें इस पर टिकी हैं कि वह अदालत के आदेश का पालन कब और कैसे करते हैं।









