मेरठ के चर्चित नीला ड्रम हत्याकांड में अदालत ने मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला को मृत्युदंड की सजा सुनाई है। मर्चेंट नेवी में काम करने वाले सौरभ राजपूत की हत्या के इस मामले में अदालत ने 30 सितंबर 2026 को दोनों आरोपियों को दोषी ठहराया था। इसके बाद 14 अक्टूबर को सजा का ऐलान किया गया। फैसले के दौरान दोनों के भावुक होने की जानकारी सामने आई है, जबकि सौरभ के परिवार ने अदालत के निर्णय पर संतोष जताया।
इस हत्याकांड का खुलासा मार्च 2025 में हुआ था। पुलिस जांच के अनुसार, सौरभ की हत्या के बाद उनके शव के टुकड़े कर नीले प्लास्टिक ड्रम में रखे गए और सीमेंट से ढक दिया गया। घटना की क्रूरता और मामले से जुड़े घटनाक्रम के कारण यह केस देशभर में चर्चा का विषय बना रहा।
क्या है मेरठ का नीला ड्रम हत्याकांड?
सौरभ राजपूत और मुस्कान रस्तोगी की शादी वर्ष 2016 में हुई थी। दोनों की एक बेटी है। सौरभ नौकरी के सिलसिले में विदेश में रहते थे। जांच एजेंसियों के मुताबिक, मुस्कान के साहिल शुक्ला से संबंध थे और दोनों पर सौरभ की हत्या की साजिश रचने का आरोप लगा।
पुलिस के अनुसार, सौरभ की हत्या के बाद शव को कई टुकड़ों में काटकर नीले ड्रम में छिपाया गया। बाद में सौरभ के परिवार की शिकायत और घर से दुर्गंध आने के बाद पुलिस ने जांच की। घर से शव के अवशेष मिलने के बाद मामला सामने आया और मुस्कान व साहिल को गिरफ्तार कर लिया गया।
सौरभ राजपूत हत्याकांड की पूरी टाइमलाइन
24 फरवरी 2025: लंदन से मेरठ लौटे सौरभ
सौरभ राजपूत विदेश से मेरठ के इंदिरा नगर स्थित अपने घर लौटे। इसके बाद परिवार में जन्मदिन का कार्यक्रम भी मनाया गया।
25 फरवरी 2025: मुस्कान का जन्मदिन मनाया गया
परिवार ने मुस्कान का जन्मदिन मनाया। कुछ दिन बाद उनकी बेटी का जन्मदिन भी मनाया गया।
3 मार्च 2025: हत्या की वारदात
पुलिस जांच के मुताबिक, मुस्कान ने सौरभ के खाने में नींद की दवा मिलाई। उनके बेहोश होने के बाद साहिल को घर बुलाया गया। अभियोजन पक्ष के अनुसार, दोनों ने चाकू से हमला कर सौरभ की हत्या कर दी।
4 मार्च 2025: शव को ड्रम में छिपाया गया
जांच के मुताबिक, हत्या के बाद शव के टुकड़े किए गए और उन्हें नीले ड्रम में रखकर सीमेंट और रेत से ढक दिया गया। बताया गया कि बेटी को उसके ननिहाल भेज दिया गया था।
5 मार्च 2025: घूमने चले गए आरोपी
पुलिस की जांच में सामने आया कि मुस्कान और साहिल हिमाचल प्रदेश घूमने गए थे। उनकी यात्रा से जुड़ी तस्वीरें और वीडियो भी बाद में चर्चा में आए।
17–19 मार्च 2025: मामले का खुलासा और गिरफ्तारी
17 मार्च को दोनों के लौटने की जानकारी सामने आई। 18 मार्च को सौरभ के भाई राहुल की शिकायत के बाद पुलिस ने जांच की और घर से नीले ड्रम में शव के अवशेष बरामद किए। 19 मार्च को मुस्कान और साहिल को गिरफ्तार कर लिया गया।
12 मई 2025: पुलिस ने दाखिल की चार्जशीट
पुलिस ने मामले में विस्तृत आरोपपत्र दाखिल किया। इसमें हत्या, साक्ष्य मिटाने और आपराधिक साजिश से जुड़े आरोप शामिल थे।
जुलाई 2025: अदालत में सुनवाई शुरू
मेरठ की जिला अदालत में मामले की सुनवाई आगे बढ़ी। अभियोजन पक्ष ने गवाहों और जांच से जुड़े साक्ष्यों के माध्यम से अपना पक्ष रखा।
नवंबर 2025: जेल में दूसरी बेटी का जन्म
मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, मुस्कान ने जेल में दूसरी बेटी को जन्म दिया।
30 सितंबर 2026: दोनों दोषी करार
अदालत ने मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला को हत्या और साक्ष्य छिपाने समेत संबंधित अपराधों में दोषी ठहराया। सजा पर फैसला बाद के लिए सुरक्षित रखा गया।
14 अक्टूबर 2026: अदालत ने सुनाई फांसी की सजा
जिला एवं सत्र न्यायालय ने दोनों को मृत्युदंड की सजा सुनाई। फैसले के समय सौरभ की मां और भाई अदालत में मौजूद थे। सजा सुनाए जाने के बाद परिवार ने संतोष जताया।
126 पेशियों के बाद सुनाया गया फैसला
इस मामले में करीब 13 महीने तक सुनवाई चली। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, अदालत में 126 पेशियां हुईं और 22 से अधिक गवाहों के बयान दर्ज किए गए। अभियोजन पक्ष ने फॉरेंसिक साक्ष्यों और जांच के दौरान जुटाई गई जानकारी के आधार पर आरोप साबित करने की कोशिश की।
30 सितंबर को दोषसिद्धि के बाद अदालत ने सजा की मात्रा पर सुनवाई की। अभियोजन पक्ष ने अपराध की गंभीरता का हवाला देते हुए मृत्युदंड की मांग की थी। 14 अक्टूबर को अदालत ने दोनों को फांसी की सजा सुनाई।
क्यों सुर्खियों में रहा यह मामला?
हत्या के बाद शव को टुकड़ों में बांटकर ड्रम में छिपाने और फिर आरोपियों के घूमने जाने से जुड़ी जानकारी ने इस मामले को व्यापक चर्चा में ला दिया था। पुलिस जांच और अदालत की कार्यवाही के दौरान सामने आए घटनाक्रम ने भी लोगों का ध्यान खींचा।
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हालांकि, मृत्युदंड सुनाए जाने के बाद भी मामले की कानूनी प्रक्रिया पूरी होना बाकी है। भारत में सत्र न्यायालय द्वारा सुनाई गई मौत की सजा को लागू करने से पहले उच्च न्यायालय की पुष्टि जरूरी होती है। ऐसे में आगे की न्यायिक कार्यवाही इस मामले का महत्वपूर्ण हिस्सा होगी।









