इन पहलों का उद्देश्य केवल जल संरक्षण तक सीमित नहीं है, बल्कि स्थानीय समुदायों को जल प्रबंधन से जोड़ना, ग्रामीण क्षेत्रों में जल सुरक्षा बढ़ाना और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से निपटने की क्षमता मजबूत करना भी है।
क्या है कैच द रेन अभियान?
‘जल शक्ति अभियान: कैच द रेन’ की शुरुआत 22 मार्च 2021 को विश्व जल दिवस के अवसर पर की गई थी। इसका प्रमुख संदेश है- “कैच द रेन, व्हेयर इट फॉल्स, व्हेन इट फॉल्स”, यानी बारिश का पानी जहां और जब गिरे, उसे वहीं संचित किया जाए।
यह अभियान वर्ष 2019 में शुरू किए गए जल शक्ति अभियान के अनुभवों पर आधारित है। उस अभियान में वर्षा जल संचयन को बढ़ावा देने के लिए 256 जिलों के 1,592 जल-संकटग्रस्त ब्लॉकों को शामिल किया गया था।
कैच द रेन अभियान के तहत वर्षा जल को संरक्षित करने के साथ-साथ भूजल पुनर्भरण, जलग्रहण क्षेत्रों का विकास, जल निकायों का पुनरुद्धार, वनीकरण और जनभागीदारी पर जोर दिया जाता है। इसे हर साल अलग-अलग प्राथमिकताओं और विषयों के साथ लागू किया जाता है।
जल संरक्षण के लिए कौन-कौन से उपाय अपनाए जाते हैं?
कैच द रेन अभियान के अंतर्गत घरों, संस्थानों और सार्वजनिक स्थानों पर वर्षा जल संचयन को प्रोत्साहित किया जाता है। इसके लिए स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार कई तरह के उपाय अपनाए जा सकते हैं।
- वर्षा जल संचयन प्रणाली: घरों, आवासीय परिसरों और कार्यस्थलों पर बारिश के पानी को इकट्ठा करने की व्यवस्था करना।
- रिचार्ज पिट और शाफ्ट: उपयुक्त स्थानों पर ऐसी संरचनाएं बनाना, जिनसे वर्षा जल जमीन के भीतर पहुंच सके।
- अनुपयोगी बोरवेल की मरम्मत: उपयुक्त और सुरक्षित व्यवस्था के माध्यम से भूजल पुनर्भरण को बढ़ावा देना।
- पारंपरिक जल स्रोतों का पुनरुद्धार: बावड़ियों, कुओं और पुराने जल निकायों को संरक्षित करना।
- तालाबों से गाद निकालना: तालाबों और जलाशयों की जल संग्रहण क्षमता बढ़ाने के लिए उनकी सफाई और गाद निकालने का काम करना।
- वृक्षारोपण: जल संचयन और भूजल पुनर्भरण वाले क्षेत्रों में हरित आवरण बढ़ाना।
इन उपायों का उद्देश्य बारिश के पानी को बहकर व्यर्थ जाने से रोकना और भविष्य में इस्तेमाल के लिए जल उपलब्धता बढ़ाना है।
जल संचय जन भागीदारी पहल से कितना फायदा हुआ?
जल संचय जन भागीदारी (JSJB) पहल के तहत देशभर में कृत्रिम भूजल पुनर्भरण और जल भंडारण से जुड़ी 1.55 करोड़ से अधिक संरचनाओं का निर्माण किया गया है।
इस पहल के प्रभाव का आकलन करने के लिए जेएसजेबी 1.0 का मूल्यांकन अध्ययन भी किया गया। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इस अध्ययन में 1 जून 2025 से 31 दिसंबर 2025 के बीच के वर्षा संबंधी आंकड़ों का उपयोग करते हुए 23 लाख संरचनाओं का मूल्यांकन किया गया।
अध्ययन में अनुमान लगाया गया कि इन संरचनाओं और उनसे जुड़े प्रयासों के परिणामस्वरूप लगभग 2.43 अरब घन मीटर भूजल का पुनर्भरण हुआ। यह आंकड़ा अध्ययन के अनुमान पर आधारित है।
जल संचय जन भागीदारी: कैच द रेन 2026 की शुरुआत
जल संचय जन भागीदारी: कैच द रेन (JSJB: CTR) पहल की शुरुआत 1 जून 2026 को की गई। इसके माध्यम से जल संचय जन भागीदारी के प्रयासों को जल शक्ति अभियान: कैच द रेन के साथ जोड़ा गया।
इस पहल का प्रमुख उद्देश्य वर्षा जल संचयन, भूजल पुनर्भरण, जल संरक्षण, जल परिसंपत्तियों के निर्माण और सामुदायिक भागीदारी को बढ़ावा देना है। इसमें स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप कम लागत वाले उपाय अपनाने पर जोर दिया गया है, ताकि जल प्रबंधन को अधिक प्रभावी और टिकाऊ बनाया जा सके।
इस अभियान के तहत विभिन्न सरकारी योजनाओं के बीच तालमेल स्थापित करने का प्रयास किया जाता है। इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं:
- वीबी-जी राम जी।
- प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना (PMKSY) के तहत ‘पर ड्रॉप मोर क्रॉप’।
- पीएमकेएसवाई के अंतर्गत जल निकायों की मरम्मत, नवीनीकरण और पुनर्स्थापन।
- सीएएमपीए।
- वित्त आयोग के अनुदान।
- राज्य सरकारों की अन्य संबंधित योजनाएं।
विभिन्न योजनाओं के संसाधनों और प्रयासों को एक साथ लाकर जल संरक्षण से जुड़े कार्यों को व्यापक स्तर पर आगे बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया है।
जल संरक्षण में पंचायतों और स्थानीय समुदायों की भूमिका
जल संचय जन भागीदारी: कैच द रेन पहल में स्थानीय समुदायों की भागीदारी को विशेष महत्व दिया गया है। इसके तहत पंचायती राज संस्थाओं, शहरी स्थानीय निकायों, महिला समूहों, युवाओं, शैक्षणिक संस्थानों, नागरिक समाज संगठनों और स्थानीय समुदायों को जोड़ने का प्रयास किया जाता है।
ये समूह जल संरक्षण से संबंधित योजनाओं के निर्माण, कार्यान्वयन और निगरानी में सहयोग करते हैं। स्थानीय स्तर पर लोगों की भागीदारी से उन क्षेत्रों की जरूरतों को समझने में मदद मिलती है, जहां पानी की कमी या भूजल स्तर में गिरावट जैसी समस्याएं अधिक गंभीर हैं।
इस पहल में डिजिटल माध्यमों का भी इस्तेमाल किया जा रहा है। जेएसजेबी: सीटीआर पोर्टल और मोबाइल एप्लिकेशन के जरिए कार्यों की निगरानी, पारदर्शिता और लोगों से प्रतिक्रिया प्राप्त करने पर जोर दिया गया है।
जल शक्ति केंद्र क्या हैं और इनका क्या काम है?
जल शक्ति केंद्र (JSK) जिला स्तर पर ज्ञान और सुविधा केंद्रों के रूप में काम करते हैं। इनका उद्देश्य स्थानीय प्रशासन और समुदायों को जल संरक्षण के उपायों के बारे में जानकारी देना तथा तकनीकी सहयोग उपलब्ध कराना है।
जल शक्ति केंद्रों की प्रमुख भूमिकाएं हैं:
- वर्षा जल संचयन की तकनीकों के बारे में जानकारी देना।
- जल संरक्षण के लिए तकनीकी मार्गदर्शन उपलब्ध कराना।
- स्थानीय स्तर पर जल संरक्षण योजनाओं के निर्माण में सहयोग करना।
- योजनाओं के क्रियान्वयन में समुदाय और प्रशासन की मदद करना।
इन केंद्रों के माध्यम से लोगों को जल संरक्षण के व्यावहारिक उपाय अपनाने और स्थानीय संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल करने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है।
जल संरक्षण से ग्रामीण आजीविका और जलवायु अनुकूलन को बढ़ावा
वर्षा जल संचयन और भूजल पुनर्भरण ग्रामीण क्षेत्रों में जल उपलब्धता बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। जल स्रोतों का संरक्षण होने से खेती और घरेलू जरूरतों के लिए पानी की उपलब्धता को सहारा मिल सकता है।
कैच द रेन और जल संचय जन भागीदारी जैसी पहलें जल संरक्षण को सरकारी कार्यक्रम से आगे बढ़ाकर जनभागीदारी पर आधारित अभियान बनाने का प्रयास करती हैं। इनमें वैज्ञानिक योजना, स्थानीय समुदायों की जिम्मेदारी, विभिन्न सरकारी योजनाओं का समन्वय और डिजिटल निगरानी को महत्व दिया गया है।
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इन प्रयासों का व्यापक लक्ष्य जल सुरक्षा मजबूत करना, जल परिसंपत्तियों का संरक्षण करना और ग्रामीण क्षेत्रों को बदलती जलवायु परिस्थितियों के प्रति अधिक सक्षम बनाना है। जल संरक्षण के लिए सरकार और समुदायों की साझा भागीदारी आने वाले वर्षों में देश की जल जरूरतों को पूरा करने की दिशा में अहम हो सकती है।








