सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय के तहत संचालित इस योजना में वृद्धाश्रमों, चिकित्सा सुविधाओं, प्रशिक्षण, राष्ट्रीय हेल्पलाइन और सहायक उपकरण वितरण जैसे कई कार्यक्रम शामिल हैं। आइए जानते हैं कि अटल वयो अभ्युदय योजना क्या है, इसके प्रमुख घटक कौन-से हैं और बुजुर्गों को इससे किस तरह सहायता मिलती है।
क्या है अटल वयो अभ्युदय योजना?
अटल वयो अभ्युदय योजना को वर्ष 2021 में शुरू किया गया था। इसके तहत वरिष्ठ नागरिकों के कल्याण से जुड़ी पहले से चल रही योजनाओं को एक व्यापक ढांचे में शामिल किया गया। इसमें पूर्ववर्ती राष्ट्रीय वरिष्ठ नागरिक कार्य योजना (NAPSRC) का विलय और विस्तार भी किया गया।
इस योजना का मुख्य उद्देश्य 60 वर्ष और उससे अधिक आयु के लोगों के जीवन की गुणवत्ता में सुधार करना है। इसके लिए जरूरतमंद बुजुर्गों को भोजन, आश्रय, स्वास्थ्य देखभाल, मनोरंजन और अन्य आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने पर ध्यान दिया जाता है।
योजना में केंद्र और राज्य सरकारों के साथ गैर-सरकारी संगठनों, स्थानीय निकायों और सामुदायिक संस्थाओं की भागीदारी को भी महत्व दिया गया है। इसके माध्यम से बुजुर्गों की देखभाल के लिए उपलब्ध संसाधनों को मजबूत करने और उन्हें सामाजिक रूप से सक्रिय बनाए रखने का प्रयास किया जाता है।
भारत में क्यों जरूरी है बुजुर्गों की देखभाल?
वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार, भारत में 60 वर्ष या उससे अधिक आयु के लोगों की संख्या 10.38 करोड़ थी। इनमें 5.11 करोड़ पुरुष और 5.27 करोड़ महिलाएं शामिल थीं। उपलब्ध अनुमानों के मुताबिक, वर्ष 2036 तक देश में वरिष्ठ नागरिकों की आबादी बढ़कर लगभग 23 करोड़ हो सकती है।
बढ़ती उम्र के साथ कई लोगों को रोजमर्रा के काम करने, स्वास्थ्य सेवाएं प्राप्त करने और आर्थिक जरूरतें पूरी करने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। दूसरी ओर, शहरीकरण, रोजगार के लिए पलायन और एकल परिवारों की बढ़ती संख्या के कारण बुजुर्गों को मिलने वाला पारंपरिक पारिवारिक सहयोग भी प्रभावित हो सकता है।
ऐसे में अटल वयो अभ्युदय योजना का उद्देश्य संस्थागत देखभाल और समुदाय आधारित सहायता के जरिए वरिष्ठ नागरिकों की जरूरतों को पूरा करना है। योजना में इस बात पर भी जोर दिया गया है कि बुजुर्ग संभव हो तो अपने घर और परिचित समुदाय में ही सुरक्षित तथा सम्मानजनक जीवन बिता सकें।
अटल वयो अभ्युदय योजना के प्रमुख घटक
यह योजना वरिष्ठ नागरिकों की अलग-अलग जरूरतों को ध्यान में रखते हुए कई घटकों के माध्यम से काम करती है।
1. वरिष्ठ नागरिकों के लिए एकीकृत कार्यक्रम (IPSrC)
वरिष्ठ नागरिकों के लिए एकीकृत कार्यक्रम योजना का प्रमुख कार्यान्वयन घटक है। इसके तहत पात्र गैर-सरकारी संगठनों, पंचायती राज संस्थाओं और स्थानीय निकायों को वृद्धाश्रमों तथा अन्य देखभाल सुविधाओं के संचालन और रखरखाव के लिए सहायता अनुदान दिया जाता है।
इस कार्यक्रम में निम्नलिखित सुविधाओं को सहयोग दिया जाता है:
- वरिष्ठ नागरिक गृह और वृद्धाश्रम।
- सतत देखभाल केंद्र।
- सचल चिकित्सा इकाइयां।
- फिजियोथेरेपी क्लीनिक।
- क्षेत्रीय संसाधन एवं प्रशिक्षण केंद्र।
उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, इस कार्यक्रम के तहत 764 वरिष्ठ नागरिक गृहों, 13 सतत देखभाल केंद्रों, 17 सचल चिकित्सा इकाइयों और 3 फिजियोथेरेपी क्लीनिकों को सहायता दी जा रही है। इन सुविधाओं का उद्देश्य जरूरतमंद बुजुर्गों को आश्रय, देखभाल और स्वास्थ्य संबंधी सहायता उपलब्ध कराना है।
2. वरिष्ठ नागरिकों के लिए राज्य कार्य योजना (SAPSRC)
इस घटक के तहत राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों को वरिष्ठ नागरिकों के कल्याण के लिए अपनी कार्य योजनाएं तैयार करने और लागू करने में सहायता दी जाती है।
इसके अंतर्गत बुजुर्गों की देखभाल करने वाले प्रशिक्षित लोगों को तैयार करना, मोतियाबिंद सर्जरी के लिए विशेष अभियान चलाना और राज्य की जरूरतों के अनुरूप कल्याणकारी कार्यक्रम लागू करना शामिल है।
राज्य और केंद्र शासित प्रदेश अपने आवंटित धन का 20 प्रतिशत तक राज्य-विशेष कार्यक्रमों पर खर्च कर सकते हैं। हालांकि, इन कार्यक्रमों के लिए वित्तीय सहायता उन्हीं गतिविधियों पर मिलती है जिन्हें योजना के तहत मंजूरी दी गई हो। राज्यों से यह भी अपेक्षा की जाती है कि वे वरिष्ठ नागरिकों के कल्याण के लिए अपने संसाधनों का योगदान करें।
3. क्षेत्रीय संसाधन एवं प्रशिक्षण केंद्र (RRTC)
क्षेत्रीय संसाधन एवं प्रशिक्षण केंद्र योजना के कार्यान्वयन में तकनीकी और संस्थागत सहयोग प्रदान करते हैं। सरकार द्वारा नामित ये केंद्र वरिष्ठ नागरिकों से जुड़े विषयों पर प्रशिक्षण, अनुसंधान, दस्तावेजीकरण और जागरूकता बढ़ाने का काम करते हैं।
इनकी प्रमुख जिम्मेदारियों में शामिल हैं:
- वरिष्ठ नागरिकों की देखभाल से जुड़े संगठनों की क्षमता बढ़ाना।
- योजनाओं और परियोजनाओं की निगरानी में सहायता करना।
- वृद्धावस्था और वरिष्ठ नागरिकों के कल्याण से जुड़े आंकड़े जुटाना।
- राज्य सरकारों, केंद्र शासित प्रदेशों और कार्यान्वयन एजेंसियों के बीच समन्वय स्थापित करना।
- शोध और उपलब्ध प्रमाणों के आधार पर कार्यक्रमों को बेहतर बनाने में सहयोग देना।
योजना के दिशानिर्देशों के अनुसार, प्रत्येक क्षेत्रीय संसाधन एवं प्रशिक्षण केंद्र को 19.58 लाख रुपये की वार्षिक वित्तीय सहायता दी जाती है।
4. राष्ट्रीय वयोश्री योजना (RVY)
राष्ट्रीय वयोश्री योजना को वर्ष 2017 में एक स्वतंत्र केंद्रीय क्षेत्र योजना के रूप में शुरू किया गया था। बाद में इसे अटल वयो अभ्युदय योजना के प्रमुख घटकों में शामिल कर लिया गया।
इस योजना के तहत उम्र से संबंधित शारीरिक कमजोरी या दिव्यांगता का सामना कर रहे पात्र वरिष्ठ नागरिकों को सहायक उपकरण उपलब्ध कराए जाते हैं। इन उपकरणों का उद्देश्य उनकी रोजमर्रा की गतिविधियों को आसान बनाना और जीवन में आत्मनिर्भरता बढ़ाना है।
उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, इस योजना के माध्यम से 10.45 लाख से अधिक वरिष्ठ नागरिकों को लाभ पहुंचाया गया है। उन्हें कुल 55,87,653 सहायक उपकरण दिए गए हैं। इनका वितरण प्रधानमंत्री दिव्याशा वयोश्री केंद्रों के जरिए शिविरों और केंद्रों पर किया जाता है। इन केंद्रों का संचालन भारतीय कृत्रिम अंग निर्माण निगम (एलिम्को) करता है।
बुजुर्गों के लिए राष्ट्रीय हेल्पलाइन ‘एल्डरलाइन 14567’
वरिष्ठ नागरिकों को सहायता उपलब्ध कराने के लिए सरकार ने राष्ट्रीय हेल्पलाइन ‘एल्डरलाइन’ शुरू की है। यह सेवा अक्टूबर 2021 में शुरू हुई थी और इसका हेल्पलाइन नंबर 14567 है।
एल्डरलाइन के जरिए बुजुर्गों को जानकारी, मार्गदर्शन और भावनात्मक सहयोग उपलब्ध कराया जाता है। जरूरत पड़ने पर उनकी समस्याओं के समाधान के लिए जिला प्रशासन और गैर-सरकारी संगठनों के साथ समन्वय किया जाता है। कुछ मामलों में वरिष्ठ नागरिकों की सहायता के लिए मौके पर जाकर हस्तक्षेप भी किया जाता है।
उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, इस हेल्पलाइन पर 8.66 लाख से अधिक ऐसी कॉल प्राप्त हुई हैं जिन पर कार्रवाई की गई। इनमें जानकारी देने, मार्गदर्शन, भावनात्मक सहयोग और मौके पर सहायता जैसी सेवाएं शामिल हैं।
अटल वयो अभ्युदय योजना की निगरानी कैसे होती है?
योजना के तहत सहायता प्राप्त करने वाली परियोजनाओं की निगरानी और जवाबदेही के लिए विभिन्न व्यवस्थाएं बनाई गई हैं। इनका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सरकारी अनुदान का उपयोग निर्धारित उद्देश्यों के लिए हो और वरिष्ठ नागरिकों को उचित सुविधाएं मिलें।
प्रमुख व्यवस्थाओं में शामिल हैं:
- परियोजना निगरानी इकाई (PMU): यह समय-समय पर क्षेत्रीय निरीक्षण कर परियोजनाओं की प्रामाणिकता और कामकाज की जांच करती है।
- वित्तीय दस्तावेज: कार्यान्वयन करने वाले गैर-सरकारी संगठनों को प्रगति रिपोर्ट, उपयोगिता प्रमाणपत्र और लेखापरीक्षित वित्तीय विवरण जमा करने होते हैं।
- ई-अनुदान पोर्टल: इसके जरिए परियोजनाओं की निगरानी की जाती है।
- बायोमेट्रिक उपस्थिति: संबंधित संस्थानों के लिए निवासियों से जुड़ी क्लाउड आधारित संपर्क-रहित बायोमेट्रिक उपस्थिति प्रणाली का उपयोग अनिवार्य बताया गया है।
- सीसीटीवी निगरानी: पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए संस्थानों को अपनी वेबसाइट या पोर्टल पर लाइव सीसीटीवी फीड उपलब्ध करानी होती है।
इन व्यवस्थाओं का उद्देश्य योजना के क्रियान्वयन में पारदर्शिता बढ़ाना और उपलब्ध सुविधाओं की निगरानी को मजबूत करना है।
वित्त वर्ष 2026-27 में योजना के लिए कितनी राशि जारी हुई?
सरकार की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, वित्त वर्ष 2026-27 में 30 सितंबर 2026 को समाप्त हुई तिमाही के लिए अटल वयो अभ्युदय योजना के एक घटक, वरिष्ठ नागरिकों के लिए एकीकृत कार्यक्रम, के तहत 755 परियोजनाओं को सहायता अनुदान के रूप में 77.98 करोड़ रुपये जारी किए गए।
यह राशि वरिष्ठ नागरिकों के लिए चल रही परियोजनाओं को सहायता देने के उद्देश्य से जारी की गई। योजना के जरिए वृद्धाश्रमों, देखभाल केंद्रों और अन्य संबंधित सुविधाओं को मजबूत करने पर ध्यान दिया जा रहा है।
अटल वयो अभ्युदय योजना का उद्देश्य क्या है?
अटल वयो अभ्युदय योजना का व्यापक उद्देश्य वरिष्ठ नागरिकों को सुरक्षित, स्वस्थ, सक्रिय और सम्मानजनक जीवन उपलब्ध कराने के लिए एकीकृत सहायता प्रणाली विकसित करना है। इसमें आश्रय, स्वास्थ्य देखभाल, सहायक उपकरण, हेल्पलाइन सेवाएं, प्रशिक्षण और सामुदायिक सहयोग को एक साथ जोड़ा गया है।
यह भी पढ़ें: Krishak Durghatna Kalyan Yojana: किसान की मौत या दिव्यांगता पर मिलेंगे 5 लाख रुपये तक, जानें आवेदन का तरीका
बुजुर्गों की बढ़ती आबादी को देखते हुए ऐसी योजनाओं की भूमिका महत्वपूर्ण है। इनके जरिए जरूरतमंद वरिष्ठ नागरिकों को सहायता देने के साथ-साथ उनकी गरिमा, आत्मनिर्भरता और समाज में सक्रिय भागीदारी को बढ़ावा देने का प्रयास किया जाता है।









