क्या है मुख्यमंत्री कृषक दुर्घटना कल्याण योजना?
उत्तर प्रदेश सरकार ने वर्ष 2020 में मुख्यमंत्री कृषक दुर्घटना कल्याण योजना शुरू की थी। इसका उद्देश्य दुर्घटना में जान गंवाने वाले या दिव्यांग होने वाले पात्र किसानों और उनके परिवारों को आर्थिक सहायता देना है, ताकि मुश्किल समय में उन्हें आर्थिक सहारा मिल सके।
इस योजना में केवल जमीन के मालिक किसान ही नहीं, बल्कि निर्धारित शर्तों के तहत बटाई पर खेती करने वाले और पट्टे की जमीन पर खेती करने वाले किसान भी शामिल हो सकते हैं।
किन किसानों को मिलेगा योजना का लाभ?
मुख्यमंत्री कृषक दुर्घटना कल्याण योजना का लाभ उत्तर प्रदेश के 18 से 70 वर्ष की आयु के पात्र किसानों को मिल सकता है। इसमें निम्नलिखित श्रेणियों के किसान शामिल हो सकते हैं:
- खतौनी में दर्ज जमीन के मालिक किसान।
- कृषि भूमि के सह-खातेदार।
- खेती पर निर्भर परिवार के पात्र सदस्य।
- बटाई पर खेती करने वाले किसान।
- पट्टे की जमीन पर खेती करने वाले पात्र किसान।
हालांकि, योजना का लाभ लेने के लिए संबंधित पात्रता शर्तों को पूरा करना जरूरी है। आवेदन के दौरान किसान को खेती और दुर्घटना से संबंधित आवश्यक प्रमाण भी देने पड़ सकते हैं।
दुर्घटना होने पर कितनी आर्थिक सहायता मिलेगी?
योजना के तहत दुर्घटना के कारण मृत्यु या दिव्यांगता होने पर सहायता राशि निर्धारित श्रेणी के अनुसार दी जाती है।
| दुर्घटना की स्थिति | संभावित आर्थिक सहायता |
|---|---|
| किसान की दुर्घटना में मृत्यु | ₹5 लाख तक |
| दोनों हाथ, दोनों पैर या दोनों आंखें खोने जैसी गंभीर स्थायी दिव्यांगता | ₹5 लाख तक |
| आंशिक दिव्यांगता | ₹1.25 लाख से ₹2.5 लाख तक |
आंशिक दिव्यांगता के मामलों में सहायता राशि दुर्घटना से हुए नुकसान और निर्धारित श्रेणी के आधार पर तय होती है। अंतिम राशि संबंधित अधिकारियों की जांच और योजना के नियमों के अनुसार निर्धारित की जाती है।
किन दुर्घटनाओं में मिल सकता है लाभ?
खेती और रोजमर्रा के कृषि कार्यों के दौरान होने वाली कई तरह की दुर्घटनाएं इस योजना के दायरे में आ सकती हैं। इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं:
- खेत में काम करते समय सांप का काटना।
- बिजली गिरने से दुर्घटना होना।
- जंगली या अन्य जानवरों के हमले में चोट लगना।
- कृषि मशीनों से गंभीर चोट लगना।
- पानी में डूबने की घटना।
- पेड़ से गिरने के कारण गंभीर चोट या दिव्यांगता होना।
ध्यान रहे कि प्रत्येक मामले में दुर्घटना की परिस्थितियों, दस्तावेजों और पात्रता की जांच की जाती है। केवल दुर्घटना होने से सहायता मिलना सुनिश्चित नहीं होता।
आवेदन के लिए कौन-कौन से दस्तावेज जरूरी हैं?
मुख्यमंत्री कृषक दुर्घटना कल्याण योजना के तहत आवेदन करते समय किसान या उनके परिजनों को कुछ जरूरी दस्तावेज देने होते हैं। इनमें शामिल हो सकते हैं:
- आधार कार्ड।
- बैंक पासबुक या बैंक खाते का विवरण।
- खतौनी या खेती से संबंधित दस्तावेज।
- दुर्घटना से जुड़े प्रमाण।
- मृत्यु के मामले में पोस्टमार्टम रिपोर्ट और पुलिस से संबंधित दस्तावेज, जहां आवश्यक हों।
- दिव्यांगता के मामले में संबंधित सक्षम अधिकारी द्वारा जारी प्रमाणपत्र।
दुर्घटना के प्रकार और मामले की परिस्थितियों के अनुसार अतिरिक्त दस्तावेज भी मांगे जा सकते हैं।
मुख्यमंत्री कृषक दुर्घटना कल्याण योजना में आवेदन कैसे करें?
योजना का लाभ लेने के लिए किसान या उनके परिजन संबंधित राजस्व विभाग के ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से आवेदन कर सकते हैं। आवेदन की प्रक्रिया में मदद के लिए लेखपाल या तहसील कार्यालय से भी संपर्क किया जा सकता है।
आवेदन करते समय इन बातों का ध्यान रखें:
- दुर्घटना से संबंधित सभी जरूरी दस्तावेज तैयार रखें।
- किसान की पहचान और खेती से जुड़े प्रमाण उपलब्ध कराएं।
- मृत्यु या दिव्यांगता के मामले में संबंधित रिपोर्ट और प्रमाणपत्र संलग्न करें।
- निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार आवेदन जमा करें।
- आवेदन की जांच और स्वीकृति के बाद पात्र लाभार्थी के बैंक खाते में सहायता राशि भेजी जाती है।
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, दुर्घटना के 45 दिनों के भीतर आवेदन करना जरूरी होता है। इसलिए किसान या उनके परिजनों को दुर्घटना होने के बाद आवेदन में देरी नहीं करनी चाहिए। आवेदन करने से पहले संबंधित तहसील या राजस्व विभाग से समय-सीमा और वर्तमान नियमों की पुष्टि कर लेना उचित रहेगा।
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किसानों के परिवारों को मिलता है आर्थिक सहारा
मुख्यमंत्री कृषक दुर्घटना कल्याण योजना का उद्देश्य दुर्घटना के कारण आर्थिक संकट झेल रहे पात्र किसान परिवारों को सहायता उपलब्ध कराना है। योजना के तहत 5 लाख रुपये तक की मदद मिलने से ऐसे परिवारों को मुश्किल समय में आर्थिक सहारा मिल सकता है। हालांकि, सहायता राशि और पात्रता का निर्धारण योजना के लागू नियमों और संबंधित अधिकारियों की जांच के आधार पर होता है।








