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दिल्ली में बढ़ सकते हैं बिजली बिल, DERC की मंजूरी के बाद गैर-सब्सिडी उपभोक्ताओं पर बढ़ेगा असर

दिल्ली: DERC ने बिजली वितरण कंपनियों को अतिरिक्त ईंधन एवं बिजली खरीद लागत की भरपाई के लिए अधिभार वसूलने की अनुमति दे दी है।

Gautam Rishi by Gautam Rishi
13 June 2026
in राज्यों से
0
दिल्ली में बढ़ सकते हैं बिजली बिल, उपभोक्ताओं पर बढ़ेगा असर - Panchayati Times

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दिल्ली के बिजली उपभोक्ताओं के लिए आने वाले महीनों में बिजली बिल महंगा हो सकता है। राजधानी में बिजली दरों पर प्रभाव डालने वाले एक महत्वपूर्ण फैसले के तहत दिल्ली विद्युत विनियामक आयोग (DERC) ने बिजली वितरण कंपनियों को अतिरिक्त ईंधन एवं बिजली खरीद लागत की भरपाई के लिए अधिभार वसूलने की अनुमति दे दी है।

इस निर्णय के बाद विशेष रूप से वे उपभोक्ता प्रभावित हो सकते हैं जो सब्सिडी योजना के दायरे से बाहर हैं और जिनकी मासिक बिजली खपत अपेक्षाकृत अधिक है।

क्यों बढ़ सकते हैं बिजली के बिल?

ऊर्जा क्षेत्र से जुड़े अधिकारियों के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय बाजार में ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी और बिजली खरीद लागत में वृद्धि के कारण वितरण कंपनियों पर वित्तीय दबाव बढ़ा है। इसी लागत को समायोजित करने के लिए फ्यूल एंड पावर परचेज एडजस्टमेंट सरचार्ज (FPPAS) लागू किया जा रहा है।

नए प्रावधान के तहत बिजली कंपनियां बढ़ी हुई लागत का कुछ हिस्सा उपभोक्ताओं से वसूल सकेंगी, जिससे बिजली बिल में 1% से 3.30% तक की बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है।

किन उपभोक्ताओं पर पड़ेगा सबसे ज्यादा असर?

विशेषज्ञों के अनुसार, निम्नलिखित श्रेणियों के उपभोक्ताओं पर इस फैसले का सबसे अधिक प्रभाव पड़ सकता है:

  • 500 यूनिट से अधिक मासिक बिजली खपत करने वाले घरेलू उपभोक्ता
  • व्यावसायिक (Commercial) उपभोक्ता
  • औद्योगिक (Industrial) इकाइयां
  • गैर-सब्सिडी श्रेणी के बिजली उपभोक्ता

इन वर्गों के उपभोक्ताओं को आगामी बिलों में अतिरिक्त शुल्क का सामना करना पड़ सकता है।

सब्सिडी पाने वालों को राहत

दिल्ली सरकार की बिजली सब्सिडी योजना के अंतर्गत आने वाले उपभोक्ताओं के लिए फिलहाल राहत की खबर है। जिन परिवारों को पूर्ण या 50 प्रतिशत बिजली सब्सिडी मिल रही है, उनके बिजली बिल पर इस अतिरिक्त शुल्क का सीधा प्रभाव नहीं पड़ेगा।

विशेष रूप से 0 से 200 यूनिट और 200 से 400 यूनिट तक बिजली उपयोग करने वाले अधिकांश घरेलू उपभोक्ताओं को तत्काल किसी बड़े वित्तीय बोझ का सामना नहीं करना पड़ेगा।

PPAC शुल्क को मिली मंजूरी

DERC ने अप्रैल 2026 के लिए बिजली वितरण कंपनियों को पावर परचेज एडजस्टमेंट कॉस्ट (PPAC) शुल्क लागू करने की मंजूरी दी है। यह शुल्क बिजली उत्पादन और खरीद की बढ़ी हुई लागत की भरपाई के उद्देश्य से लगाया जाता है।

विश्लेषकों का मानना है कि इस कदम से बिजली कंपनियों की वित्तीय स्थिति को कुछ राहत मिल सकती है, लेकिन इसका असर उन उपभोक्ताओं पर दिखाई देगा जो सब्सिडी लाभार्थी नहीं हैं।

ऊर्जा संकट का असर दिल्ली तक

वैश्विक स्तर पर ऊर्जा आपूर्ति से जुड़ी चुनौतियों और ईंधन लागत में उतार-चढ़ाव का असर भारत के कई राज्यों की बिजली व्यवस्था पर पड़ रहा है। दिल्ली भी इससे अछूती नहीं है। बढ़ती बिजली खरीद लागत और ईंधन कीमतों के कारण वितरण कंपनियां अतिरिक्त वित्तीय दबाव झेल रही हैं।

इसी पृष्ठभूमि में नियामक आयोग ने कंपनियों को सीमित दायरे में अतिरिक्त शुल्क वसूलने की अनुमति प्रदान की है।

उपभोक्ताओं के लिए क्या मायने हैं?

यदि आपकी बिजली खपत अधिक है और आप किसी सब्सिडी योजना का लाभ नहीं लेते हैं, तो आने वाले महीनों में आपके बिजली बिल में वृद्धि देखने को मिल सकती है। वहीं कम खपत वाले और सब्सिडी प्राप्त करने वाले उपभोक्ताओं के लिए फिलहाल स्थिति स्थिर बनी हुई है।

यह भी पढ़ें: पेपर लीक और बेरोजगारी के मुद्दे पर कांग्रेस का राष्ट्रव्यापी अभियान, राहुल गांधी करेंगे छात्र सम्मेलनों को संबोधित

दिल्ली में बिजली दरों को लेकर लिया गया नया नियामकीय फैसला गैर-सब्सिडी और उच्च खपत वाले उपभोक्ताओं की जेब पर असर डाल सकता है। हालांकि सरकार की सब्सिडी योजना से जुड़े लाखों उपभोक्ताओं को तत्काल राहत मिलेगी। आने वाले समय में ऊर्जा बाजार की स्थिति और बिजली खरीद लागत के आधार पर बिजली दरों में आगे भी बदलाव संभव हैं।

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