“सबसे अच्छा समय 20 साल पहले था, दूसरा सबसे अच्छा आज है”—चीन का यह मशहूर मुहावरा इन दिनों कमोडिटी मार्केट पर बिल्कुल फिट बैठता नजर आ रहा है। 1980 के दशक के बाद एक बार फिर चांदी में बड़ी टूट देखने को मिल रही है। बजट के दिन आए भूचाल के बाद सोने और चांदी दोनों की कीमतें लगातार धड़ाम हो रही हैं। हालात ऐसे बन गए हैं कि कुछ ही दिनों में निवेशकों की बड़ी रकम साफ हो गई है।
चांदी की कीमतों में भारी तबाही
चांदी की गिरावट ने बाजार में हड़कंप मचा दिया है। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर 5 मार्च एक्सपायरी वाली सिल्वर में 12% से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई।
बजट वाले दिन रविवार को तेज गिरावट के बाद 1 किलो चांदी का भाव 2.65 लाख रुपये के आसपास बंद हुआ था। इसके अगले ही दिन सोमवार को 15% का लोअर सर्किट लग गया और कीमत फिसलकर करीब 2.25 लाख रुपये प्रति किलो पर पहुंच गई। मतलब, सिर्फ एक दिन में चांदी लगभग 40 हजार रुपये प्रति किलो सस्ती हो गई।
4 दिन में करीब 2 लाख रुपये की गिरावट
बजट से ठीक पहले गुरुवार को चांदी ने इतिहास रचते हुए पहली बार 4 लाख रुपये प्रति किलो का आंकड़ा पार किया था। कारोबार खत्म होते-होते इसका भाव 4.20 लाख रुपये प्रति किलो के ऑल टाइम हाई पर पहुंच गया था।
लेकिन वहां से अब तक देखें तो महज चार दिनों में चांदी लगभग 1.94 लाख रुपये टूट चुकी है। यानी जिन निवेशकों ने ऊंचे स्तर पर खरीदारी की थी, उनकी पूंजी करीब आधी रह गई है।
सोना भी नहीं दे पा रहा सहारा
चांदी के साथ-साथ सोने की कीमतों में भी भारी दबाव देखने को मिल रहा है। बजट के दिन बड़ी गिरावट के बाद सोमवार को बाजार खुलते ही गोल्ड फिर कमजोर पड़ गया।
MCX पर 24 कैरेट सोना (2 अप्रैल एक्सपायरी) पहले करीब 1.47 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ था, जो गिरकर 1.38 लाख रुपये के स्तर तक आ गया। यानी एक ही दिन में लगभग 8,800 रुपये की गिरावट।
अगर इसके हाई लेवल से तुलना करें, तो बीते हफ्ते गुरुवार को सोना करीब 1.93 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम तक पहुंच गया था। वहां से अब तक इसमें 54 हजार रुपये से ज्यादा की गिरावट आ चुकी है।
क्यों टूट रहे हैं Gold और Silver?
सोना-चांदी में आई इस बड़ी गिरावट के पीछे कई वजहें मानी जा रही हैं:
- मुनाफावसूली: रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंचने के बाद निवेशकों ने जमकर प्रॉफिट बुकिंग की, जिससे तेज सेलऑफ देखने को मिला।
- इंडस्ट्रियल डिमांड में कमी: खासकर चीन और यूरोप में औद्योगिक मांग घटने से चांदी पर ज्यादा दबाव पड़ा।
- डॉलर की मजबूती: अमेरिकी डॉलर मजबूत हुआ है, जिससे कीमती धातुओं की चमक फीकी पड़ी।
- US फेड से जुड़ी अटकलें: अमेरिका में फेड चेयरमैन को लेकर चर्चाओं के बीच डॉलर में मजबूती आई, जिसका असर गोल्ड-सिल्वर पर नकारात्मक पड़ा।
निवेशकों के लिए क्या है संकेत?
विशेषज्ञों का मानना है कि इतनी तेज गिरावट के बाद बाजार में अस्थिरता बनी रह सकती है। ऐसे में जल्दबाजी में फैसले लेने के बजाय निवेशकों को सतर्क रहना चाहिए और आगे की रणनीति सोच-समझकर बनानी चाहिए।
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Gold-Silver Crash ने साफ कर दिया है कि ऊंचे स्तर पर निवेश जितना आकर्षक दिखता है, उतना ही जोखिम भरा भी हो सकता है। आने वाले दिनों में वैश्विक संकेत और आर्थिक घटनाएं ही तय करेंगी कि कीमती धातुओं में स्थिरता लौटेगी या गिरावट का दौर अभी और जारी रहेगा।







