रबी सीजन में गेहूं की कटाई के बाद किसानों की सबसे बड़ी चिंता उचित दाम और समय पर भुगतान को लेकर रहती है। इसी को ध्यान में रखते हुए सरकार ने 2026-27 के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) तय करने के साथ-साथ भुगतान प्रक्रिया को भी तेज और पारदर्शी बनाया है। अब किसानों को अपनी उपज बेचने के बाद लंबा इंतजार नहीं करना पड़ेगा।
48 से 72 घंटे में भुगतान का प्रावधान
सरकारी नियमों के अनुसार, गेहूं की तौल के बाद अधिकतम 48 से 72 घंटे यानी तीन कार्य दिवस के भीतर भुगतान किसान के बैंक खाते में पहुंच जाना चाहिए। इस बार गेहूं का MSP 2585 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित किया गया है।
पूरी भुगतान प्रक्रिया Public Financial Management System (PFMS) के जरिए की जा रही है, जिससे पैसा सीधे किसानों के आधार से जुड़े बैंक खातों में ट्रांसफर होता है।
डिजिटल सिस्टम से पारदर्शिता बढ़ी
सरकार ने डिजिटल तकनीक का उपयोग कर बिचौलियों की भूमिका लगभग खत्म कर दी है। अब जैसे ही किसान की फसल खरीदी जाती है, भुगतान प्रक्रिया तुरंत शुरू हो जाती है। कुछ राज्यों में छंटाई, सफाई और लोडिंग के लिए प्रति क्विंटल अतिरिक्त 20 रुपये तक का बोनस भी दिया जा रहा है।
रजिस्ट्रेशन कराना है जरूरी
सरकारी खरीद केंद्रों पर गेहूं बेचने के लिए किसानों को पहले कृषि विभाग के पोर्टल पर ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन कराना अनिवार्य है। रजिस्ट्रेशन के दौरान सही बैंक खाता और आधार लिंक जानकारी देना जरूरी है, ताकि भुगतान में किसी तरह की तकनीकी दिक्कत न आए।
भुगतान में देरी हो तो क्या करें
यदि तय समय सीमा के बाद भी किसान के खाते में पैसा नहीं पहुंचता है, तो उन्हें तुरंत संबंधित क्रय केंद्र प्रभारी या पैक्स (PACS) कार्यालय से संपर्क करना चाहिए। इसके अलावा किसान ऑनलाइन पोर्टल या हेल्पलाइन के जरिए भी अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं।
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किसानों के लिए राहत भरा कदम
सरकार की यह नई व्यवस्था किसानों को समय पर भुगतान सुनिश्चित करने की दिशा में बड़ा कदम मानी जा रही है। इससे न केवल पारदर्शिता बढ़ेगी, बल्कि किसानों को आर्थिक रूप से भी राहत मिलेगी।









