बिहार की राजनीति में सोमवार सुबह बड़ा घटनाक्रम सामने आया जब मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने विधान परिषद की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने अपना इस्तीफा विधान परिषद के सभापति अवधेश नारायण सिंह को सौंपा। इस कदम के बाद राज्य की सियासत में नए समीकरणों की चर्चाएं तेज हो गई हैं।
राज्यसभा चुनाव जीतने के बाद लिया फैसला
हाल ही में हुए राज्यसभा चुनाव 2026 में जीत दर्ज करने के बाद नीतीश कुमार अब संसद के उच्च सदन के सदस्य बन चुके हैं। नियमों के अनुसार, किसी भी नेता को संसद सदस्य बनने के बाद 14 दिनों के भीतर राज्य विधानमंडल की सदस्यता छोड़नी होती है। इसी प्रक्रिया के तहत उन्होंने एमएलसी पद से इस्तीफा दिया।
मुख्यमंत्री पद छोड़ने की अटकलें तेज
एमएलसी पद छोड़ने के बाद अब यह कयास लगाए जा रहे हैं कि नीतीश कुमार जल्द ही मुख्यमंत्री पद से भी इस्तीफा दे सकते हैं। संवैधानिक प्रावधानों के मुताबिक, यदि कोई व्यक्ति राज्य विधानसभा या विधान परिषद का सदस्य नहीं रहता, तो वह मुख्यमंत्री पद पर बने नहीं रह सकता।
सूत्रों के अनुसार, 13 अप्रैल के बाद किसी भी समय या अधिकतम 30 अप्रैल तक वे मुख्यमंत्री पद छोड़ सकते हैं।
‘समृद्धि यात्रा’ के दौरान नहीं किया था खुलासा
नीतीश कुमार ने हाल ही में अपनी ‘समृद्धि यात्रा’ के जरिए पूरे बिहार का दौरा किया था। इस दौरान उन्होंने कई जनसभाओं को संबोधित किया, लेकिन राज्यसभा जाने या पद छोड़ने के संकेत सार्वजनिक रूप से नहीं दिए। यात्रा का समापन 26 मार्च को पटना में हुआ था।
आगे क्या होगा?
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि नीतीश कुमार के इस्तीफे के बाद बिहार का अगला मुख्यमंत्री कौन होगा। राजनीतिक गलियारों में इसको लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। आने वाले दिनों में सत्तारूढ़ दल की रणनीति और नए नेतृत्व पर स्थिति साफ हो सकती है।
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एमएलसी पद से इस्तीफा देने के साथ ही नीतीश कुमार ने बिहार की राजनीति में एक नया मोड़ ला दिया है। अब सबकी नजर उनके अगले कदम और राज्य के नए नेतृत्व पर टिकी हुई है।









