Shivraj Chouhan on pushpak viman: केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने हाल ही में दावा किया कि राइट बंधुओं द्वारा हवाई जहाज का आविष्कार किए जाने से बहुत पहले भारत के पास ‘पुष्पक विमान’ नामक एक प्राचीन उड़ने वाला वाहन था। इसका जिक्र एक नामी मीडिया की रिपोर्ट में किया गया है।
‘इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस, एजुकेशन एंड रिसर्च’ (IISER) के दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए बीजेपी नेता ने कहा, ‘भारत कोई आधुनिक राष्ट्र नहीं है, यह हजारों साल पुराना है। जब दुनिया अंधकार में थी, तब भारत ने प्रकाश दिया। हमारी विज्ञान और तकनीक बहुत उन्नत थी। हमारे देश के पास पुष्पक विमान जैसा हवाई वाहन था, जिसका उल्लेख महाभारत में मिलता है।’
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रिपोर्ट के अनुसार, प्राचीन भारत में अस्त्र-शस्त्र तकनीक पर बोलते हुए चौहान ने दावा किया, ‘आपने भारत में अग्न्यास्त्र, वरुणास्त्र और ब्रह्मास्त्र के बारे में पढ़ा होगा। इनका उपयोग महाभारत में हुआ। और ये ऐसे हथियार थे कि लक्ष्य भेदने के बाद वापस तरकश में लौट आते थे। आज जब मिसाइल दागी जा रही हैं और ड्रोन भेजे जा रहे हैं, तो हमारे देश ने यह सब बहुत पहले ही हासिल कर लिया था।’
अपनी टिप्पणी के दौरान शिवराज सिंह चौहान ने यह भी कहा कि पश्चिमी देशों ने विज्ञान से बहुत बाद में परिचय किया और लोगों से यह मान्यता त्यागने की अपील की कि विकसित पश्चिमी राष्ट्रों ने भारत को विज्ञान सिखाया।
कृषि मंत्री ने आगे ज़ोर देकर कहा कि लोगों को भारत में बने उत्पादों का उपयोग करना चाहिए, क्योंकि इससे भारतीयों को रोज़गार मिलेगा और अर्थव्यवस्था मजबूत होगी।
इससे पहले केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर भी सुर्खियों में आए थे, जब एक वीडियो में उन्होंने दावा किया था कि भगवान हनुमान पहले अंतरिक्ष यात्री थे। राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस के अवसर पर पीएम श्री स्कूल में छात्रों को संबोधित करते हुए 50 वर्षीय मंत्री ने पूछा, ‘अंतरिक्ष में यात्रा करने वाला पहला कौन था?’ फिर उन्होंने खुद ही जवाब दिया,
‘मुझे तो लगता है हनुमान जी थे।’
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सोवियत संघ के यूरी गगारिन को अंतरिक्ष में जाने वाला पहला मानव माना जाता है। 12 अप्रैल 1961 को वो वोस्तोक-1 यान से पृथ्वी की एक परिक्रमा पूरी कर लौटे थे।
नासा के अनुसार, गगारिन का अंतरिक्ष यान 27,400 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से यात्रा कर रहा था और पूरा मिशन 108 मिनट तक चला। पुनः प्रवेश (re-entry) के बाद कैप्सूल से बाहर निकलकर उन्होंने पैराशूट की मदद से सुरक्षित लैंडिंग की।









