राजस्थान में ग्यारहवीं और बारहवीं कक्षा के लिए प्रकाशित इतिहास की किताब ‘आजादी के बाद का स्वर्णिम भारत’ को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। राज्य सरकार ने इस किताब पर पाबंदी लगाने का फैसला किया है। शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने बुधवार को घोषणा करते हुए कहा कि इस किताब में गांधी परिवार का महिमामंडन किया गया है और ऐसे ‘जहरीले’ कंटेंट को राज्य में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
“करोड़ों रुपये बर्बाद हो जाएं, फिर भी चलेगा”
मदन दिलावर ने स्पष्ट किया कि इस किताब की चार लाख से अधिक प्रतियां पहले ही छप चुकी हैं और कुछ स्कूलों में इसे पढ़ाया भी जाने लगा था। लेकिन उन्होंने दो टूक कहा, “अगर करोड़ों रुपये खर्च करके जहर खरीद लिया गया है, तो उसे पिया नहीं जा सकता। किताब में इतिहास को तोड़-मरोड़ कर पेश किया गया है, इसलिए इसे तुरंत प्रभाव से प्रतिबंधित किया जाता है।”
“अब अकबर को ‘महान’ नहीं पढ़ाया जाएगा”
शिक्षा मंत्री ने यह भी ऐलान किया कि राज्य के स्कूलों में अब अकबर को ‘अकबर महान’ के तौर पर नहीं पढ़ाया जाएगा। उन्होंने अकबर को “बलात्कारी” बताते हुए कहा कि ऐसा इतिहास युवाओं को गुमराह करता है। उन्होंने कहा कि छात्रों को सच्चा और प्रेरणादायक इतिहास पढ़ाया जाएगा, न कि पक्षपातपूर्ण व्याख्यान।

कांग्रेस का पलटवार
राज्य सरकार के इस फैसले पर कांग्रेस पार्टी ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। कांग्रेस नेता और पूर्व मंत्री प्रताप सिंह खाचरियावास ने कहा, “मदन दिलावर की अपने ही विभाग में नहीं चलती। यह फैसला शिक्षा को राजनीतिक रंग देने की कोशिश है।” कांग्रेस ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार इतिहास को अपने हिसाब से गढ़ने की कोशिश कर रही है और यह कदम भाजपा की विचारधारा को थोपने का प्रयास है।
किताब के कंटेंट पर विवाद
बताया जा रहा है कि किताब में आजादी के बाद भारत के इतिहास के संदर्भ में इंदिरा गांधी, राजीव गांधी और सोनिया गांधी के योगदान को प्रमुखता से दिखाया गया था, जिसे लेकर भाजपा सरकार ने आपत्ति जताई है। सरकार का दावा है कि इतिहास को राजनीतिक एजेंडे के तहत लिखा गया है, जिसे छात्रों पर थोपना उचित नहीं है।
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राजस्थान में स्कूल स्तर पर इतिहास की पढ़ाई को लेकर खड़ा हुआ यह विवाद राजनीतिक और वैचारिक टकराव का प्रतीक बनता जा रहा है। जहां एक ओर सरकार इतिहास को ‘सच्चाई’ के आधार पर पढ़ाने की बात कर रही है, वहीं विपक्ष इसे शिक्षा का भगवाकरण करार दे रहा है। अब देखना यह होगा कि इस विवाद का क्या समाधान निकलता है और छात्रों की शिक्षा पर इसका क्या असर पड़ता है।









