खरीफ सीजन 2026 की शुरुआत से पहले केंद्र सरकार ने किसानों को बड़ी राहत दी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में पोषक तत्व आधारित सब्सिडी (NBS) की नई दरों को मंजूरी दी गई है।
इस फैसले का उद्देश्य किसानों को उचित दाम पर गुणवत्तापूर्ण खाद उपलब्ध कराना और बुवाई के समय किसी भी तरह की कमी से बचाना है।
सब्सिडी बजट में बड़ा इजाफा
सरकार ने इस बार खरीफ सीजन के लिए सब्सिडी बजट में उल्लेखनीय बढ़ोतरी की है। वर्ष 2026 के लिए लगभग ₹41,533.81 करोड़ की राशि मंजूर की गई है, जो पिछले साल की तुलना में करीब ₹4,300 करोड़ अधिक है।
इस बढ़े हुए बजट का सीधा फायदा किसानों को मिलेगा, क्योंकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों में उतार-चढ़ाव का बोझ उन पर नहीं डाला जाएगा।
28 प्रकार की खाद पर मिलेगा लाभ
नई नीति के तहत केवल डीएपी या यूरिया ही नहीं, बल्कि कुल 28 प्रकार की फॉस्फेट और पोटाश (P&K) आधारित खादों पर सब्सिडी दी जाएगी। इसमें एनपीकेएस (NPKS) जैसे जरूरी मिश्रित उर्वरक भी शामिल हैं, जो मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने में अहम भूमिका निभाते हैं।
ये नई दरें 1 अप्रैल 2026 से लागू हो चुकी हैं और 30 सितंबर 2026 तक पूरे खरीफ सीजन में प्रभावी रहेंगी।
अंतरराष्ट्रीय कीमतों के असर से बचाव
वैश्विक बाजार में यूरिया, डीएपी और सल्फर जैसे कच्चे माल की कीमतों में लगातार उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है। ऐसे में सरकार ने यह सुनिश्चित किया है कि इसका सीधा असर भारतीय किसानों पर न पड़े।
सब्सिडी की राशि सीधे खाद कंपनियों को दी जाएगी, जिससे वे किसानों को नियंत्रित और सस्ती दरों पर उर्वरक उपलब्ध करा सकें।
कालाबाजारी पर लगेगी रोक
इस नीति का एक बड़ा फायदा यह भी है कि इससे खाद की कालाबाजारी और मनमाने दामों पर लगाम लगेगी। सरकार का लक्ष्य है कि देश के किसी भी हिस्से में खाद की कमी न हो और किसानों को समय पर उर्वरक आसानी से मिल सके।
खेती की लागत घटने की उम्मीद
विशेषज्ञों के अनुसार, इस फैसले से खेती की लागत कम होगी और किसानों की आय में सुधार हो सकता है। धान, मक्का और दाल जैसी खरीफ फसलों की बुवाई के दौरान किसानों को खाद के लिए परेशान नहीं होना पड़ेगा।
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कुल मिलाकर, सरकार का यह कदम कृषि क्षेत्र को मजबूत करने और किसानों को आर्थिक रूप से सहारा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।









