Russia-Ukraine war: यूक्रेनी शब्द ‘वोल्या’ (Volya) को ठीक-ठीक बयान करना आसान नहीं है। लेकिन किसी भी यूक्रेनी से पूछिए, वह आपको बताएगा कि यह रूस के खिलाफ उनकी लड़ाई की कुंजी है। वोल्या का अर्थ लगभग इस तरह लिया जा सकता है, भीतर की वह इच्छाशक्ति जो बाधाओं को पार करने और स्वतंत्रता के लिए संघर्ष करने का हौसला देती है।
लेकिन हैरानी की बात यह है कि यूक्रेनियों को उनकी तकलीफ़ों से उबरने में एक और ‘गुप्त ऊर्जा’ मिल रही है, जिसका जुड़ाव भारत से है, और वो है योग। अब चौथे साल में प्रवेश कर चुके इस युद्ध के दौरान, ध्यान और आध्यात्मिक चिकित्सा डोनबास के मोर्चों से लेकर लविव के रिकवरी सेंटर्स तक, यूक्रेनियों की वोल्या को और मज़बूत कर रही है।
यह भी पढ़ें- Delhi Flood News: दिल्ली में यमुना खतरे के निशान से ऊपर, कई रिहायशी इलाकों में घुसा पानी
नतालिया टोलस्तोवा, जो एक सैन्य मनोवैज्ञानिक और आर्ट ऑफ़ लिविंग के चैरिटेबल प्रोजेक्ट्स की प्रमुख हैं, 2022 में संघर्ष शुरू होने के बाद से यूक्रेनी सैनिकों के साथ काम कर रही हैं। उन्होंने कहा, शुरुआत में मैं गुस्से से भरी हुई थी। लेकिन गुस्सा किसी काम का नहीं था। आर्ट ऑफ लिविंग की ट्रेनिंग ने मुझे फिर से संयम दिया। मेरा गुस्सा पिघल गया और मैं हमारे फ्रंटलाइन के हीरोज़ की मदद करने में जुट गई।’
लेफ्टिनेंट कर्नल विताली डेरेव्यानको, जो डोनेट्स्क क्षेत्र के पोक्रोव्स्क में 1st Separate Assault Regiment के कमांडर हैं, बताते हैं, ‘2022 तक मेरा योग या आर्ट ऑफ लिविंग से कोई अनुभव नहीं था। लेकिन नतालिया से मिलने के बाद मैंने आर्ट ऑफ लिविंग का साइलेंस प्रोग्राम और मेडिटेशन किया। तब मैंने युद्ध की अफ़रातफ़री के बीच भी शांति महसूस की, मेरा चेतन साफ़ होने लगा।’
इसी रेजिमेंट के कमांडर वादिम सिडोरोव कहते हैं, ‘आर्ट ऑफ लिविंग की प्रैक्टिस ने मुझे सिखाया कि सबसे कठिन हालात में भी मैं अलग तरह से, स्वीकार के साथ, प्रतिक्रिया करता हूं।’ विताली और वादिम ने अपने साथी सैनिकों को भी सांस की एक्सरसाइज़ कराना शुरू किया और इसे अपनी डेली रूटीन का हिस्सा बना लिया। अब वे इस अनुभव को ब्रिगेड स्तर तक साझा करने की सोच रहे हैं।
उन्होंने कहा, ‘मेडिटेशन और ब्रीदिंग एक्सरसाइज़ वाकई असर करती हैं। इससे बिना किसी युद्ध अनुभव वाले रिज़र्विस्ट जैसे किंडरगार्टन टीचर, आईटी प्रोफेशनल और संगीतकार जल्दी एडजस्ट कर पाते हैं और बेहतर नींद ले पाते हैं।’









