बॉलीवुड के मशहूर प्लेबैक सिंगर कुमार सानू एक बार फिर सुर्खियों में हैं, लेकिन इस बार वजह उनका नया गाना नहीं बल्कि कानूनी लड़ाई है। कुमार सानू ने अपनी पूर्व पत्नी रीटा भट्टाचार्य के खिलाफ बॉम्बे हाईकोर्ट में मानहानि की याचिका दायर की है। सिंगर ने अदालत से 30 लाख रुपये के हर्जाने की मांग की है और साथ ही उन सभी इंटरव्यू को हटाने की अपील की है, जिनमें उनके खिलाफ कथित तौर पर झूठे और छवि खराब करने वाले आरोप लगाए गए हैं।
यह मामला उनके तलाक के दो दशक से ज्यादा समय बाद सामने आया है। कुमार सानू और रीटा भट्टाचार्य का तलाक साल 2001 में फाइनल हुआ था। इस याचिका पर अदालत में 17 दिसंबर को सुनवाई होने की संभावना है।
इंटरव्यू में लगाए गए आरोपों पर आपत्ति
याचिका के अनुसार, रीटा भट्टाचार्य ने हाल के महीनों में कई मीडिया प्लेटफॉर्म्स को इंटरव्यू दिए, जिनमें उन्होंने कुमार सानू पर गंभीर आरोप लगाए। इन इंटरव्यू में रीटा ने दावा किया था कि प्रेग्नेंसी के दौरान उन्हें बुनियादी सुविधाओं से वंचित रखा गया। उन्होंने यह भी कहा कि उस समय उन्हें भोजन नहीं दिया गया, रसोईघर बंद कर दिया गया, दूध और जरूरी मेडिकल केयर तक नहीं मिली और इसी दौरान कोर्ट की कार्यवाही भी चल रही थी।
इसके अलावा रीटा भट्टाचार्य ने सिंगर पर किसी और महिला के साथ रिश्ते होने और परिवार की जिम्मेदारियों की अनदेखी करने जैसे आरोप भी लगाए थे।
वायरल इंटरव्यू के बाद बढ़ा विवाद
सितंबर 2025 में रीटा भट्टाचार्य का एक इंटरव्यू सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ था, जिसके बाद यह विवाद और गहरा गया। कुमार सानू की याचिका में कहा गया है कि उनकी पूर्व पत्नी द्वारा दिए गए बयान तलाक के समय हुए आपसी समझौते की शर्तों का उल्लंघन हैं।
दरअसल, 9 फरवरी 2001 को बांद्रा फैमिली कोर्ट में हुए तलाक के दौरान दोनों पक्षों के बीच यह सहमति बनी थी कि भविष्य में कोई भी एक-दूसरे के खिलाफ सार्वजनिक रूप से आरोप नहीं लगाएगा।
छवि और करियर को नुकसान का दावा
कुमार सानू का कहना है कि इन बयानों के चलते उनकी पेशेवर छवि को गहरा नुकसान पहुंचा है। सोशल मीडिया और सार्वजनिक मंचों पर उनके खिलाफ नकारात्मक माहौल बना, जिससे उन्हें आर्थिक क्षति का भी सामना करना पड़ा। इसी आधार पर उन्होंने 30 लाख रुपये के हर्जाने की मांग की है।
मीडिया प्लेटफॉर्म्स को भी भेजा गया नोटिस
रिपोर्ट्स के मुताबिक, 27 सितंबर को कुमार सानू की ओर से न सिर्फ रीटा भट्टाचार्य को बल्कि उन मीडिया संस्थानों को भी कानूनी नोटिस भेजा गया था, जिन्होंने यह इंटरव्यू प्रसारित किए। नोटिस में इंटरव्यू हटाने की मांग की गई थी और ऐसा न करने पर कड़ी कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी गई थी।
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अब सभी की नजरें 17 दिसंबर को होने वाली सुनवाई पर टिकी हैं, जहां इस लंबे समय से चले आ रहे विवाद पर अदालत का रुख साफ हो सकता है।









