केंद्र सरकार ने पंद्रहवें वित्त आयोग के तहत आठ राज्यों को ₹2,461 करोड़ से अधिक की राशि जारी की है। इस कदम से छत्तीसगढ़, गुजरात, मध्य प्रदेश, पंजाब, सिक्किम, हिमाचल प्रदेश, ओडिशा और त्रिपुरा के ग्रामीण स्थानीय निकायों को वित्तीय मजबूती मिलेगी।
कई राज्यों को मिली दूसरी किस्त
वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान छत्तीसगढ़, गुजरात, मध्य प्रदेश, पंजाब और सिक्किम को बद्ध अनुदान की दूसरी किस्त जारी की गई है। इसके अलावा कुछ राज्यों को पहले रोके गए अनुदानों का हिस्सा भी दिया गया है, जिससे लंबित परियोजनाओं को गति मिलने की उम्मीद है।
राज्यवार आवंटन की झलक
मध्य प्रदेश को सबसे अधिक करीब ₹943 करोड़ की राशि मिली है, जबकि गुजरात को ₹763 करोड़ और छत्तीसगढ़ को ₹347 करोड़ से अधिक का अनुदान दिया गया है। पंजाब को ₹332 करोड़ और सिक्किम को लगभग ₹10 करोड़ की सहायता प्राप्त हुई है। वहीं हिमाचल प्रदेश, ओडिशा और त्रिपुरा को पहले रोके गए बद्ध और गैर-बद्ध अनुदानों का भुगतान किया गया है।
पंचायत स्तर तक पहुंचेगा लाभ
इन अनुदानों का सीधा लाभ हजारों ग्राम पंचायतों, प्रखंड पंचायतों और जिला पंचायतों को मिलेगा। इससे ग्रामीण स्तर पर विकास योजनाओं के क्रियान्वयन में तेजी आएगी और स्थानीय प्रशासन की कार्यक्षमता में सुधार होगा।
किस काम में होगा अनुदान का उपयोग
सरकार द्वारा दिए गए बद्ध (Tied) अनुदान का उपयोग स्वच्छता, ठोस एवं तरल अपशिष्ट प्रबंधन, खुले में शौच मुक्त (ODF) स्थिति बनाए रखने और पेयजल आपूर्ति जैसी बुनियादी सेवाओं के लिए किया जाएगा।
वहीं गैर-बद्ध (Untied) अनुदान का उपयोग पंचायतें अपनी स्थानीय जरूरतों के अनुसार कर सकेंगी, जैसे बुनियादी ढांचा विकास और सामुदायिक सुविधाओं का विस्तार।
केंद्र के दो मंत्रालयों की अहम भूमिका
यह अनुदान पंचायती राज मंत्रालय और जल शक्ति मंत्रालय की सिफारिशों पर जारी किया गया है, जिसे वित्त मंत्रालय द्वारा मंजूरी दी जाती है। आमतौर पर यह राशि हर वित्त वर्ष में दो किस्तों में राज्यों को दी जाती है।
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ग्रामीण विकास को मिलेगा बढ़ावा
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की वित्तीय सहायता से ग्रामीण भारत में बुनियादी सुविधाओं का विस्तार होगा और पंचायतों को आत्मनिर्भर बनाने में मदद मिलेगी। यह पहल स्थानीय स्तर पर विकास और बेहतर शासन सुनिश्चित करने की दिशा में एक अहम कदम है।









