पुरुष, महिला और युवा वर्गों में आयोजित इस प्रतियोगिता ने दिखाया कि शतरंज जेलों में शिक्षा, मानसिक विकास और सामाजिक पुनर्वास को बढ़ावा देने में अहम भूमिका निभा सकता है। इस आयोजन का मकसद कैदियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धा का अवसर देने के साथ-साथ उनमें अनुशासन, आत्मनियंत्रण और टीम भावना विकसित करना भी है।
FIDE और कुक काउंटी शेरिफ कार्यालय की संयुक्त पहल
इस चैंपियनशिप का आयोजन अंतरराष्ट्रीय चेस महासंघ (FIDE) और अमेरिका के शिकागो स्थित कुक काउंटी शेरिफ कार्यालय ने किया। वर्ष 2021 में पहली बार शुरू हुई इस पहल का विस्तार अब छह महाद्वीपों तक हो चुका है।
यह कार्यक्रम ‘चेस फॉर फ्रीडम’ पहल का हिस्सा है। इसके तहत जेलों में बंद लोगों को शतरंज के जरिए तार्किक सोच, भावनात्मक संतुलन, धैर्य और जिम्मेदारी जैसे गुण विकसित करने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है। इन कौशलों से उन्हें जेल से बाहर आने के बाद समाज में दोबारा जुड़ने में मदद मिल सकती है।
अर्जेंटीना: एक दशक से जेलों में शतरंज का प्रशिक्षण
अर्जेंटीना के कोरिएंटेस प्रांत की पांच सुधारगृहों में पिछले दस वर्षों से शतरंज कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं। यहां कैदियों को खेल का प्रशिक्षण देने के साथ आंतरिक Chess Tournament में भाग लेने का अवसर भी मिलता है।
बेहतर प्रदर्शन करने वाले और अच्छे आचरण वाले कुछ प्रतिभागियों को आवश्यक न्यायिक एवं संस्थागत अनुमति और सुरक्षा व्यवस्था के बाद जेल से बाहर आयोजित प्रतियोगिताओं में भी खेलने का मौका मिल सकता है। इसके लिए जेल के पुस्तकालय में इंटरनेट और कंप्यूटर की सुविधा उपलब्ध कराई जाती है।
यह कार्यक्रम तरागुई कोए नामक शैक्षिक पहल से जुड़ा है, जिसके तहत सुधारगृहों में बंद युवाओं और वयस्कों को अलग-अलग क्षेत्रों में सीखने और कौशल विकसित करने के अवसर दिए जाते हैं। कार्यक्रम से जुड़े प्रशिक्षक फ्रांको पेनेली और शतरंज कोच सैमुअल गोगना कैदियों को प्रशिक्षण देते हैं।
इस पहल से कई प्रतिभागियों ने अच्छा खेल स्तर हासिल किया है। रिहा होने के बाद भी कुछ लोग शतरंज प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेते हैं और शतरंज समुदाय से जुड़े रहते हैं।
रोमानिया: लगातार पांचवीं बार अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में भागीदारी
रोमानिया की जेल व्यवस्था ने लगातार पांचवीं बार इस अंतरराष्ट्रीय Online Chess Championship में हिस्सा लिया। देश की ओर से पुरुष वर्ग की दो, महिला वर्ग की एक और युवा वर्ग की एक टीम मैदान में उतरी। इन टीमों में देश की 14 जेलों के कैदी शामिल थे।
प्रतियोगिता ने खिलाड़ियों को अनुशासन, रणनीतिक सोच, धैर्य और नियमों के सम्मान जैसे गुणों को व्यवहार में उतारने का अवसर दिया। इस अनुभव से प्रेरित होकर रोमानिया के राष्ट्रीय कारागार प्रशासन ने अपनी राष्ट्रीय ऑनलाइन शतरंज प्रतियोगिता भी शुरू की। वर्ष 2026 में इसका दूसरा संस्करण आयोजित किया गया, जिससे भविष्य में अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भागीदारी को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
घाना: पुरुष और महिला जेलों तक पहुंची ‘चेस फॉर फ्रीडम’ पहल
घाना में ‘Chess For Freedom’ कार्यक्रम की शुरुआत अकरा स्थित सीनियर करेक्शनल सेंटर के युवाओं के साथ हुई थी। इसके बाद 2025 में मेंटर्स चेस अकादमी ने घाना प्रिजन्स सर्विस के साथ मिलकर इस कार्यक्रम का विस्तार नसावाम पुरुष जेल और नसावाम महिला जेल तक किया।
यहां नियमित शतरंज सत्रों के जरिए कैदियों में धैर्य, अनुशासन, आत्मविश्वास और तार्किक सोच विकसित करने का प्रयास किया जा रहा है। इस वर्ष पुरुष और महिला टीमों ने अफ्रीकी महाद्वीपीय ऑनलाइन शतरंज चैंपियनशिप फॉर प्रिजनर्स में भी भाग लिया।
इस पहल से कैदियों को अपनी क्षमताएं निखारने, दूसरों के साथ सकारात्मक संबंध बनाने और समाज में वापसी की तैयारी करने का अवसर मिल रहा है।
ऑस्ट्रेलिया: पहली बार अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में उतरी कर्नेट जेल फार्म की टीम
ऑस्ट्रेलिया के पश्चिमी क्षेत्र में स्थित कर्नेट प्रिजन फार्म की टीम ने पहली बार इस चैंपियनशिप में हिस्सा लिया। टीम सेमीफाइनल तक नहीं पहुंच सकी, लेकिन शुरुआती दौर में उसका प्रदर्शन उत्साहजनक रहा।
प्रतियोगिता से पहले आठ कैदियों ने दो महीने तक तैयारी की। वे सप्ताह में दो बार शतरंज अभ्यास करते थे। शुरुआती ग्रुप चरण में टीम ने भारत, फिलीपींस, मंगोलिया, संयुक्त अरब अमीरात और सिंगापुर की टीमों के खिलाफ खेले गए 28 मुकाबलों में आठ जीत दर्ज कीं।
इस आयोजन का असर केवल खेल के नतीजों तक सीमित नहीं रहा। खिलाड़ियों ने एक-दूसरे का सहयोग किया, अपनी बारी का इंतजार किया और हार-जीत के दौरान संयम बनाए रखा। इससे धैर्य, संवाद, जवाबदेही और टीम भावना जैसे गुणों को बढ़ावा मिला।
टीम में शामिल दो आदिवासी कैदियों ने बताया कि प्रतियोगिता में भाग लेने से उन्हें अपनापन और उपलब्धि का एहसास हुआ। एक प्रतिभागी ने कहा कि शतरंज ने उसे परिस्थितियों पर प्रतिक्रिया देने से पहले रुककर सोचने, आसपास की स्थिति समझने और विकल्पों पर विचार करने की आदत विकसित करने में मदद की। उसने भविष्य में युवा अपराधियों को भी शतरंज सिखाने की इच्छा जताई।
नाइजीरिया: जेल सुधार की दिशा में नई पहल
नाइजीरिया की सुधार सेवा ने पहली बार इस अंतरराष्ट्रीय चैंपियनशिप में भाग लिया। एंकर हेरिटेज इनिशिएटिव और चेस इन स्कूल नामक संगठनों के सहयोग से कैदियों की भागीदारी संभव हुई।
नाइजीरियाई सुधार सेवा के अनुसार, शतरंज धैर्य, एकाग्रता, अनुशासन और दूरगामी सोच को बढ़ावा देता है। यह खेल कैदियों को अपनी मानसिक क्षमताएं विकसित करने, आत्मविश्वास बढ़ाने और दूसरों के साथ रचनात्मक तरीके से जुड़ने का अवसर देता है।
सेवा ने इस भागीदारी को जेल सुधार की व्यापक प्रक्रिया में एक महत्वपूर्ण कदम बताया। इसका उद्देश्य कैदियों की प्रतिभा को निखारना और रिहाई के बाद समाज में उनकी वापसी की तैयारी करना है।
जिम्बाब्वे: चेस क्लब से कैदियों को मिल रहा मानसिक सहारा
जिम्बाब्वे की चीकुरुबी मैक्सिमम जेल में वर्ष 2021 से चीकुरुबी चेस क्लब संचालित हो रहा है। यहां शतरंज कैदियों के लिए केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि मानसिक स्थिरता और आत्मचिंतन का माध्यम बन गया है।
कैदी लियो माटिबे ने बताया कि शतरंज ने कठिन परिस्थितियों में उन्हें मानसिक राहत दी है। उन्होंने कहा कि खेल का अध्ययन करने और लगातार अभ्यास करने से उन्हें अपनी स्थिति से कुछ समय के लिए ध्यान हटाने और खुद को बेहतर बनाने का अवसर मिलता है।
शतरंज में हर चाल के परिणाम पर विचार करना पड़ता है। इससे खिलाड़ी गलतियों से सीखना, दबाव में शांत रहना और निर्णय लेने से पहले उनके संभावित नतीजों पर विचार करना सीखते हैं। जिम्बाब्वे शतरंज महासंघ के सहयोग से चल रही यह पहल कैदियों को उनके अतीत से परे अपनी क्षमताएं विकसित करने का अवसर देने पर केंद्रित है।
जेलों में पुनर्वास का माध्यम बन रहा शतरंज
छठी इंटरकॉन्टिनेंटल ऑनलाइन चेस चैंपियनशिप फॉर प्रिजनर्स ने यह संदेश दिया कि शतरंज की पहुंच जेल की दीवारों तक सीमित नहीं है। अर्जेंटीना, रोमानिया, घाना, ऑस्ट्रेलिया, नाइजीरिया और जिम्बाब्वे जैसे देशों में चल रहे कार्यक्रम दिखाते हैं कि यह खेल कैदियों को सीखने, अपनी सोच विकसित करने और समाज से जुड़ाव महसूस करने में मदद कर सकता है।
शतरंज खेलने के लिए बहुत अधिक उपकरणों या खर्च की जरूरत नहीं होती। यही वजह है कि इसे जेलों में शिक्षा, मनोरंजन और पुनर्वास कार्यक्रमों के साथ आसानी से जोड़ा जा सकता है। सही अवसर और निरंतर प्रशिक्षण मिलने पर यह खेल कैदियों में आत्मविश्वास, जिम्मेदारी और बेहतर निर्णय लेने की क्षमता विकसित करने का जरिया बन सकता है।
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इस तरह ‘चेस फॉर फ्रीडम’ पहल खेल को सामाजिक बदलाव के माध्यम के रूप में प्रस्तुत करती है, जहां हर चाल के साथ व्यक्ति को सोचने, सीखने और अपने भविष्य के लिए नई संभावनाएं तलाशने का अवसर मिलता है।








