मध्यप्रदेश के छिंदवाड़ा जिले में हुई नौ बच्चों की दर्दनाक मौत ने पूरे राज्य को झकझोर कर रख दिया है। इस हृदयविदारक घटना के बाद राज्य सरकार ने तत्काल प्रभाव से Coldrif कफ सिरप की बिक्री पर पूरे प्रदेश में प्रतिबंध लगा दिया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इस मामले में ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति अपनाते हुए सख्त कदम उठाने का ऐलान किया है।
मुख्यमंत्री का सख्त संदेश
मुख्यमंत्री ने शुक्रवार को मीडिया से बात करते हुए कहा, “छिंदवाड़ा में Coldrif सिरप से बच्चों की मौत अत्यंत दुखद और अस्वीकार्य है। यह केवल एक चिकित्सा चूक नहीं, बल्कि मानवीय त्रासदी है। हमने प्रदेशभर में इस कफ सिरप की बिक्री पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया है और संबंधित दवा कंपनी की अन्य दवाओं की भी जांच के आदेश दिए गए हैं।”
उन्होंने बताया कि Coldrif सिरप का निर्माण तमिलनाडु के कांचीपुरम स्थित एक फैक्ट्री में होता है। घटना की जानकारी मिलते ही राज्य सरकार ने तमिलनाडु सरकार से संपर्क किया और फैक्ट्री की गुणवत्ता जांच कराई। जांच रिपोर्ट 3 अक्टूबर को प्राप्त हुई, जिसमें DEG (डाईएथिलीन ग्लाइकॉल) की मात्रा तय सीमा से अधिक पाई गई।
DEG की अधिक मात्रा बना मौत का कारण?
DEG/EG जैसे रसायन दवाओं में उपयोग किए जाते हैं, लेकिन इनकी निर्धारित मात्रा से अधिक उपस्थिति घातक सिद्ध हो सकती है। मध्यप्रदेश FDA द्वारा लिए गए कुछ सैंपलों में DEG नहीं मिला, लेकिन तमिलनाडु FDA की जांच में Sresan Pharma द्वारा बनाए गए सिरप में DEG की मात्रा खतरे की सीमा से अधिक पाई गई, जिससे सिरप की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल उठे हैं।
व्यापक स्तर पर जांच शुरू
राज्य सरकार ने स्थानीय और राज्य स्तरीय जांच एजेंसियों को सक्रिय कर दिया है। साथ ही, केंद्र सरकार के स्वास्थ्य मंत्रालय ने भी स्थिति की गंभीरता को समझते हुए देशभर में 19 फार्मा कंपनियों की मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स की जाँच शुरू कर दी है। यह जांच “Risk-Based Inspection” मॉडल पर आधारित है ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके।

बहु-विषयक टीम छिंदवाड़ा में सक्रिय
इस बीच, ICMR, NIV, NEERI, AIIMS नागपुर और CDSCO की संयुक्त विशेषज्ञ टीम छिंदवाड़ा पहुंच गई है। यह टीम बच्चों की मौत के वास्तविक कारणों का पता लगाने के लिए साक्ष्य एकत्र कर रही है, जिसमें चिकित्सा इतिहास, खुराक, अन्य बीमारियों और वातावरणीय कारकों की गहन जांच की जा रही है।
दवा गुणवत्ता पर फिर उठे सवाल
छिंदवाड़ा की इस दुर्भाग्यपूर्ण घटना ने एक बार फिर भारत में दवा निर्माण की गुणवत्ता नियंत्रण प्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। इससे पहले भी कई बार देश और दुनिया में कुछ भारतीय दवा कंपनियों की गुणवत्ता पर सवाल उठ चुके हैं, और अब यह मामला एक बड़ा उदाहरण बनकर उभरा है।
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राज्य सरकार की तत्परता और मुख्यमंत्री मोहन यादव की त्वरित कार्रवाई ने यह स्पष्ट कर दिया है कि इस मामले में कोई ढिलाई नहीं बरती जाएगी। दोषियों को किसी भी हाल में बख्शा नहीं जाएगा। आने वाले दिनों में इस पूरे प्रकरण से जुड़े और भी खुलासे होने की उम्मीद है।









