World Heritage List: देश के लिए गर्व का क्षण है कि भारत के सात अद्वितीय प्राकृतिक धरोहर स्थलों को यूनेस्को की विश्व धरोहर स्थलों की अस्थायी सूची (Tentative List) में शामिल किया गया है। इसके साथ ही भारत की इस सूची में संख्या 62 से बढ़कर 69 हो गई है।
अब भारत के पास यूनेस्को की अस्थायी सूची में कुल 69 स्थल हैं, जिनमें 49 सांस्कृतिक, 17 प्राकृतिक और 3 मिश्रित धरोहर स्थल शामिल हैं।
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संस्कृति मंत्रालय ने गुरुवार को कहा, ‘भारत वैश्विक मंच पर अपनी समृद्ध प्राकृतिक और सांस्कृतिक धरोहर को सुरक्षित रखने और प्रदर्शित करने की दिशा में लगातार महत्वपूर्ण कदम उठा रहा है। यह उपलब्धि भारत की अपनी असाधारण धरोहर को संरक्षित और प्रोत्साहित करने की अटूट प्रतिबद्धता को दोहराती है।’
यूनेस्को के प्रोटोकॉल के अनुसार, किसी भी स्थल को विश्व धरोहर सूची में नामांकित करने से पहले उसे अस्थायी सूची में शामिल किया जाना आवश्यक है।
नवनिर्मित स्थलों का विवरण..
1. डेक्कन ट्रैप्स, पंचगनी और महाबलेश्वर, महाराष्ट्र:
दुनिया के सबसे संरक्षित और अध्ययन किए गए लावा प्रवाहों में से कुछ यहां मौजूद हैं। ये स्थल विशाल डेक्कन ट्रैप्स का हिस्सा हैं और कोयना वन्यजीव अभयारण्य (जो पहले से ही यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल है) में स्थित हैं।
2. सेंट मैरी आइलैंड समूह की भूवैज्ञानिक धरोहर, कर्नाटक:
यह द्वीप समूह दुर्लभ स्तंभाकार बेसाल्टिक चट्टानों की संरचना के लिए प्रसिद्ध है। यह लेट क्रीटेशियस काल (लगभग 8.5 करोड़ वर्ष पूर्व) का भूवैज्ञानिक इतिहास दर्शाता है।
3. मेघालयन एज की गुफाएँ, मेघालय:
मेघालय की अद्भुत गुफाएँ, विशेषकर मावमलूह गुफा, वैश्विक स्तर पर मेघालयन युग का संदर्भ बिंदु मानी जाती हैं। यह पृथ्वी के जलवायु और भूवैज्ञानिक परिवर्तन की महत्वपूर्ण झलक देती हैं।
4. नागा हिल ओफ़ियोलाइट, नागालैंड:
यहां समुद्री परत (Oceanic Crust) का दुर्लभ प्रदर्शन मिलता है, जो महाद्वीपीय प्लेटों पर उठा हुआ है। यह टेक्टोनिक प्रक्रियाओं और मध्य-महासागरीय रिज की गतिशीलता को समझने में मदद करता है।
5. एर्रा मट्टी डिब्बालु (रेड सैंड हिल्स), आंध्र प्रदेश:
विशाखापट्टनम के पास स्थित ये लाल रेतीली पहाड़ियाँ अपनी अद्वितीय प्राचीन जलवायु और तटीय भू-आकृतिक विशेषताओं के लिए जानी जाती हैं। ये पृथ्वी के जलवायु इतिहास और विकास की कहानी बयां करती हैं।
6. तिरुमला हिल्स की प्राकृतिक धरोहर, आंध्र प्रदेश:
यहां एपार्चियन अनकॉनफॉर्मिटी और प्रसिद्ध सिलाथोरनम (नेचुरल आर्च) मौजूद है। यह स्थल पृथ्वी के 1.5 अरब वर्षों से भी अधिक के भूवैज्ञानिक इतिहास का प्रतिनिधित्व करता है।
7. वरकला क्लिफ्स, केरल:
केरल के तटीय क्षेत्र में स्थित ये चट्टानें वर्खल्ली संरचना (Mio-Pliocene काल) को उजागर करती हैं। यहाँ प्राकृतिक झरने और आकर्षक क्षरण स्थलरूप भी देखने को मिलते हैं, जो वैज्ञानिक और पर्यटन दोनों दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण हैं।









