दिल्ली में शनिवार को चुनाव आयोग कार्यालय के बाहर विपक्षी दलों द्वारा किए गए शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन के दौरान उस वक्त अफरा-तफरी मच गई, जब टीएमसी सांसद मिताली बाग अचानक बेहोश हो गईं। पुलिस द्वारा हिरासत में लिए जाने के दौरान मिताली की तबीयत बिगड़ गई। मौके पर मौजूद कांग्रेस नेता राहुल गांधी समेत अन्य नेताओं ने उन्हें संभाला और तुरंत प्राथमिक चिकित्सा की व्यवस्था कराई गई।
राहुल गांधी बोले – यह राजनीतिक लड़ाई नहीं, संविधान बचाने की लड़ाई
प्रदर्शन के बाद मीडिया से बातचीत में राहुल गांधी ने कहा, “वो बात नहीं कर पा रही थीं, लेकिन सच्चाई देश के सामने है। यह लड़ाई राजनीतिक नहीं है, बल्कि संविधान को बचाने की लड़ाई है। यह एक व्यक्ति, एक वोट के अधिकार की रक्षा की लड़ाई है। हमें पारदर्शी और निष्पक्ष मतदाता सूची चाहिए।”
उन्होंने सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि जब चुने हुए जनप्रतिनिधियों को चुनाव आयोग से मिलने से रोका जा रहा है, तो इसका मतलब साफ है कि कुछ छिपाया जा रहा है।
खरगे का सवाल – सरकार को किस बात का डर?
राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे ने भी सरकार की मंशा पर सवाल उठाते हुए कहा, “अगर कोई सरकार जनप्रतिनिधियों को चुनाव आयोग तक नहीं पहुंचने देती, तो सवाल उठता है कि डर किस बात का है? हमारा प्रदर्शन पूरी तरह शांतिपूर्ण था। लेकिन हमें न रोका गया, न सुना गया।”
प्रियंका चतुर्वेदी ने चुनाव आयोग की भूमिका पर उठाए सवाल
शिवसेना (उद्धव गुट) की सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने भी चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर नाराजगी जाहिर की। उन्होंने कहा, “जिस तरह से चुनाव आयोग घबराया हुआ दिख रहा है, उससे साफ है कि उनके पास हमारे सवालों का कोई जवाब नहीं है। हमने तथ्यों के आधार पर मुद्दे उठाए हैं। देशहित में हमने अपनी बात रखी है, लेकिन आयोग जवाबदेही से बच रहा है।”
क्यों हो रहा था विरोध प्रदर्शन?
विपक्षी दलों का यह विरोध प्रदर्शन मतदाता सूची में गड़बड़ियों और कथित पक्षपातपूर्ण रवैये के खिलाफ था। विपक्षी नेताओं का आरोप है कि चुनाव आयोग निष्पक्ष भूमिका निभाने में असफल रहा है और मतदाता सूची में जानबूझकर नाम हटाए या जोड़े जा रहे हैं जिससे निष्पक्ष चुनाव की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है।

मिताली बाग की स्थिति अब स्थिर
टीएमसी सूत्रों के मुताबिक मिताली बाग की स्थिति अब स्थिर है और उन्हें चिकित्सकीय निगरानी में रखा गया है। पार्टी नेताओं ने इस घटना को “लोकतंत्र पर हमला” करार देते हुए कहा है कि वे संसद और सड़क दोनों पर अपनी आवाज बुलंद करते रहेंगे।
यह भी पढ़ें: एशिया कप में इन खिलाड़ियों के खेलने पर संशय
चुनाव से पहले देश की राजधानी में राजनीतिक गर्मी बढ़ती जा रही है। विपक्ष एकजुट होकर चुनाव आयोग की भूमिका और सरकार की नीयत पर सवाल उठा रहा है। मिताली बाग की तबीयत बिगड़ने की घटना ने इस विरोध को और भी संवेदनशील बना दिया है, जो आने वाले दिनों में और तेज़ हो सकता है।









