वक्फ बिल को लेकर लोकसभा में चर्चाएं तेज हो गई हैं। शिवसेना यूबीटी (उद्धव ठाकरे) के सांसद अरविंद सावंत ने सरकार की मंशा पर सवाल उठाते हुए कहा कि सरकार के कथनी और करनी में गहरा फर्क है। मुंबई साउथ से सांसद सावंत ने स्पष्ट किया कि अगर विधेयक में कोई गलती है, तो उनकी पार्टी उसका समर्थन नहीं करेगी।
सरकार के इरादों पर सवाल उठाए
अरविंद सावंत ने कहा, “सरकार का उद्देश्य किसी को न्याय देना नहीं है। उन्होंने कहा कि बोर्ड में चुनाव की बजाय नॉमिनेशन की प्रक्रिया लाकर सरकार अपनी पसंद के लोग नियुक्त करना चाहती है।” उन्होंने यह भी कहा, “अगर आपने विधेयक को सही इरादों से लाया है तो उसमें गैर-मुस्लिमों को क्यों शामिल कर रहे हैं? यह सवाल उठता है कि क्या यह विधेयक केवल कुछ विशेष हितों को पूरा करने के लिए लाया गया है?”
राम मंदिर और वाराणसी का जिक्र
सावंत ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के बयान का जिक्र करते हुए कहा, “अयोध्या और वाराणसी में आपके वोट घट गए हैं। यह मत समझिए कि आप जो कर रहे हैं वह सही है। हमने रमजान के दौरान ‘सौगात-ए-मोदी’ देखा है, अब ‘सौगात-ए-वक्फ’ आ गया है।” उन्होंने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री ने कहा था कि ‘मंगलसूत्र छीना जाएगा’ और यूपी के मुख्यमंत्री ने कहा था ‘बटेंगे तो कटेंगे’।
हिंदू देव स्थानों की जमीन पर सवाल
सावंत ने सरकार पर हिंदू देव स्थानों की जमीन बेचने का आरोप लगाते हुए कहा, “हजारों एकड़ हिंदू देव स्थानों की जमीन बेची जा रही है। क्या इसके खिलाफ कोई कानून बनाया जाएगा?” उन्होंने यह भी कहा कि, “धारा 370 पर हमने सरकार का समर्थन किया था, लेकिन आज कश्मीर में कितने हिंदू आ गए हैं और जमीन कौन खरीद रहा है?”

शिवसेना यूबीटी का स्पष्ट रुख
शिवसेना यूबीटी के सांसद ने अंतिम रूप से कहा, “अगर विधेयक में कुछ गलत है तो हम उसका समर्थन नहीं करेंगे। हम सरकार से अपील करते हैं कि इसे शांति से सोचें और इसमें आवश्यक सुधार करें।”
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वक्फ संशोधन विधेयक पर शिवसेना यूबीटी का यह रुख दर्शाता है कि वे किसी भी विधेयक में न्याय और समानता के सिद्धांतों पर खरे उतरने के लिए प्रतिबद्ध हैं। सरकार के इरादों पर सवाल उठाने के साथ-साथ वे अपनी पार्टी के सिद्धांतों पर भी अडिग हैं।