उच्च शिक्षा में जातिगत भेदभाव को रोकने के लिए यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन (UGC) ने सख्त कदम उठाया है। UGC ने देशभर के कॉलेजों और विश्वविद्यालयों के लिए “उच्च शिक्षण संस्थानों में समानता को बढ़ावा देने” से जुड़े नए नियम अधिसूचित कर दिए हैं। इन नियमों के तहत अब संस्थानों को कैंपस में इक्विटी कमेटी बनाना अनिवार्य होगा और नियमों का पालन न करने पर कड़ी कार्रवाई की जा सकेगी।
ये नए नियम UGC (Promotion of Equity in Higher Education Institutions) Regulations, 2026 के नाम से लागू किए गए हैं, जिन्हें 14 जनवरी 2025 को अधिसूचित किया गया।
2012 के नियमों का अपडेट हैं नए रेगुलेशन
UGC के ये नए नियम साल 2012 से लागू एंटी-डिस्क्रिमिनेशन रेगुलेशंस का अपडेटेड वर्जन हैं। पिछले साल फरवरी में इन नियमों का ड्राफ्ट सार्वजनिक सुझावों के लिए जारी किया गया था, लेकिन उस ड्राफ्ट को लेकर कई सवाल उठे थे।
खासतौर पर आलोचना इस बात को लेकर हुई थी कि:
- OBC वर्ग को जातिगत भेदभाव की परिभाषा से बाहर रखा गया था
- भेदभाव की परिभाषा स्पष्ट नहीं थी
- झूठी शिकायतों को “हतोत्साहित” करने के लिए जुर्माने का प्रस्ताव था
अब अंतिम नियमों में इन सभी बिंदुओं पर बदलाव किया गया है।
OBC को भी मिला संरक्षण, झूठी शिकायत वाला प्रावधान हटाया गया
UGC ने अब साफ तौर पर अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) को भी जाति आधारित भेदभाव की परिभाषा में शामिल कर लिया है। साथ ही, झूठी शिकायतों पर जुर्माने वाला विवादित प्रावधान पूरी तरह हटा दिया गया है।
नए नियमों के अनुसार, जातिगत भेदभाव का मतलब होगा: अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के खिलाफ केवल उनकी जाति या जनजाति के आधार पर किया गया भेदभाव।
भेदभाव की विस्तृत परिभाषा तय
UGC ने “भेदभाव” की परिभाषा को भी पहले से ज्यादा स्पष्ट किया है। इसके तहत भेदभाव का मतलब होगा:
- धर्म
- नस्ल
- जाति
- लिंग
- जन्म स्थान
- दिव्यांगता
या इनसे जुड़े किसी भी आधार पर किसी भी व्यक्ति के साथ अनुचित, पक्षपातपूर्ण या असमान व्यवहार।
इसके अलावा, ऐसा कोई भी कदम जो शिक्षा में समान अवसर को नुकसान पहुंचाए या मानवीय गरिमा के खिलाफ हो — उसे भी भेदभाव माना जाएगा, चाहे वह प्रत्यक्ष हो या अप्रत्यक्ष।
हर संस्थान में बनेंगे Equal Opportunity Centre और Equity Committee
नए नियमों के तहत अब हर उच्च शिक्षण संस्थान में Equal Opportunity Centre (EOC) बनाना अनिवार्य होगा। इसका मकसद कैंपस में सामाजिक समावेशन और समान अवसर को बढ़ावा देना है।
EOC के अंतर्गत एक Equity Committee का गठन किया जाएगा:
- अध्यक्ष: संस्थान के प्रमुख (VC/Director/Principal)
- सदस्य:
- SC, ST, OBC प्रतिनिधि
- महिलाएं
- दिव्यांग व्यक्ति
बैठक और रिपोर्टिंग व्यवस्था
- इक्विटी कमेटी की बैठक: साल में कम से कम 2 बार
- EOC की रिपोर्ट: हर 6 महीने में
- संस्थान को सालाना रिपोर्ट UGC को सौंपनी होगी
राष्ट्रीय स्तर पर बनेगी मॉनिटरिंग कमेटी
UGC इन नियमों के पालन की निगरानी के लिए राष्ट्रीय स्तर की मॉनिटरिंग कमेटी भी बनाएगा। इसमें शामिल होंगे:
- प्रोफेशनल काउंसिल्स के प्रतिनिधि
- आयोगों के सदस्य
- सिविल सोसाइटी से जुड़े विशेषज्ञ
यह कमेटी:
- नियमों के क्रियान्वयन की समीक्षा करेगी
- भेदभाव से जुड़े मामलों पर नजर रखेगी
- रोकथाम के सुझाव देगी
संस्थान प्रमुख की जिम्मेदारी तय
नए नियमों के अनुसार:
- हर संस्थान की जिम्मेदारी होगी कि वह भेदभाव खत्म करे
- समानता और सामाजिक न्याय को बढ़ावा दे
- नियमों का पालन सुनिश्चित करे
इन सभी कार्यों की सीधी जिम्मेदारी संस्थान के प्रमुख पर होगी।
नियम न मानने पर क्या होगी सजा?
UGC ने नियमों के उल्लंघन पर कड़े दंड का प्रावधान किया है। गैर-अनुपालन की स्थिति में संस्थान पर ये कार्रवाई हो सकती है:
- UGC की योजनाओं से बाहर किया जा सकता है
- डिग्री प्रोग्राम चलाने पर रोक
- डिस्टेंस और ऑनलाइन कोर्स बंद
- UGC की मान्यता सूची से हटाया जाना
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UGC के नए नियम उच्च शिक्षा में समानता, सामाजिक न्याय और गरिमा सुनिश्चित करने की दिशा में एक बड़ा कदम माने जा रहे हैं। OBC को शामिल करना और निगरानी तंत्र को मजबूत करना इन नियमों की सबसे अहम विशेषताएं हैं। अब देखना होगा कि संस्थान इन नियमों को ज़मीनी स्तर पर कितनी गंभीरता से लागू करते हैं।







