इंडियनऑयल नई दिल्ली 2025 विश्व पैरा एथलेटिक्स चैंपियनशिप्स के पहले दिन भारत को उसका पहला स्वर्ण पदक दिलाकर शैलेश कुमार ने देशवासियों को गर्व का अवसर प्रदान किया। बिहार के जमुई जिले के इस होनहार ऊँची कूद एथलीट ने पुरुषों की T63 श्रेणी में 1.91 मीटर की अविश्वसनीय छलांग लगाकर न केवल व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया, बल्कि प्रतियोगिता का रिकॉर्ड भी तोड़ दिया।
जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम में आयोजित इस वैश्विक प्रतियोगिता में जब शैलेश चौथे प्रयास में हवा में ऊँचा उछले, तो स्टेडियम तालियों से गूंज उठा। 25 वर्षीय इस खिलाड़ी ने अपने संघर्षों और सीमित संसाधनों के बावजूद यह सिद्ध कर दिया कि जुनून और कड़ी मेहनत से कोई भी लक्ष्य असंभव नहीं।
शैलेश ने बताया, “मैं जमुई के इस्लामनगर से आता हूँ, जहाँ खेलों के लिए न तो मैदान थे, न ही सुविधाएँ। शुरुआत में मैं सामान्य प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेता था, और बाद में एक मित्र ने मुझे पैरा खेलों के बारे में बताया। वहीं से मेरा सफर शुरू हुआ।”
शैलेश को साल 2019 में जूनियर विश्व चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीतने के बाद साई गांधीनगर में प्रशिक्षण का अवसर मिला। ₹10,000 मासिक सहायता और अच्छी सुविधाओं के साथ उन्होंने अपने खेल को नई ऊँचाइयों तक पहुँचाया।
हालाँकि पेरिस 2024 पैरालंपिक में वे मामूली अंतर से चौथे स्थान पर रह गए थे, लेकिन इस बार उन्होंने ना केवल वापसी की, बल्कि स्वर्ण पदक अपने नाम किया। वे कहते हैं, “दिल्ली की गर्मी एक चुनौती थी, लेकिन घरेलू दर्शकों के सामने जीतना एक अलग ही अनुभव रहा। मैं अपने कोच रौनक मलिक और परिवार का आभारी हूँ, जिन्होंने मुश्किल वक्त में मेरा साथ दिया।”
इस प्रतियोगिता में भारत को एक और सफलता दी दीप्ति जीवनजी ने, जिन्होंने महिलाओं की 400 मीटर T20 स्पर्धा में रजत पदक जीता। उन्होंने 55.16 सेकंड का समय निकालकर अपना सीज़न बेस्ट भी बेहतर किया।

इसके अलावा ग्रेटर नोएडा के वरुण सिंह भाटी ने पुरुषों की ऊँची कूद T63 स्पर्धा में 1.85 मीटर की छलांग के साथ कांस्य पदक जीता। वहीं, एथलीट राहुल ने व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ के बावजूद चौथे स्थान से संतोष करना पड़ा।
विश्व मंच पर भारत की चमक
27 सितंबर से 5 अक्टूबर तक चल रही इस प्रतिष्ठित प्रतियोगिता में 104 देशों के 2,200 से अधिक पैरा-एथलीट हिस्सा ले रहे हैं। 186 पदक स्पर्धाओं वाली यह चैंपियनशिप न केवल भारत में अब तक की सबसे बड़ी पैरा एथलेटिक्स प्रतियोगिता है, बल्कि लॉस एंजेल्स 2028 पैरालंपिक के लिए भी एक अहम क्वालिफायर है।
सरकार और खेल योजनाओं का असर
दीप्ति जीवनजी जैसे खिलाड़ी, जो खेलो इंडिया और टारगेट ओलंपिक पोडियम स्कीम (TOPS) के तहत प्रशिक्षण ले रहे हैं, भारत सरकार की खेल नीतियों की सफलता को दर्शाते हैं। देशभर में प्रतिभाओं को तराशने और उन्हें विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार करने की दिशा में यह एक बड़ा कदम है।
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शैलेश कुमार की कहानी सिर्फ एक स्वर्ण पदक जीतने की नहीं, बल्कि साहस, संघर्ष और समर्पण की कहानी है। यह उस भारत की तस्वीर है, जो गांवों और कस्बों से निकलकर विश्व मंच पर अपनी छाप छोड़ रहा है। नई दिल्ली में मिले इस स्वर्ण पदक के साथ, शैलेश ने सिर्फ भारत का तिरंगा ऊँचा नहीं किया, बल्कि लाखों दिव्यांग खिलाड़ियों के लिए एक नई उम्मीद भी जगाई।









