राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत ने एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए अमेरिका पर परोक्ष रूप से निशाना साधा और कहा कि आजकल कुछ देश ऐसे हैं जो सांप जैसे मित्र बन गए हैं। उन्होंने यह भी कहा कि भारत की बढ़ती ताकत से कुछ वैश्विक ताकतें घबरा गई हैं और अब रणनीति के तहत भारत पर दबाव बनाने की कोशिशें हो रही हैं।
जिससे असली खतरा है, उसे अमेरिका पुचकार रहा है
मोहन भागवत ने बिना किसी देश का नाम लिए कहा, “आज कुछ ऐसे देश हैं जो सोचते हैं कि भारत अगर बड़ा हो गया तो उनका क्या होगा। इसलिए भारत पर टैरिफ लगाओ और जिससे असल में डर है, उसे पुचकारो।”
उन्होंने कहा कि यह सब इसलिए किया जा रहा है ताकि भारत को काबू में रखा जा सके और उस पर राजनीतिक और आर्थिक दबाव बनाया जा सके।
सांप की कहानी के जरिए दिया गहरा संदेश
मोहन भागवत ने अपने संबोधन में सांप और तथागत बुद्ध की एक कथा सुनाकर वैश्विक राजनीति की तुलना की। उन्होंने कहा: “एक ज़माने में सांपों से लोग डरते थे, लेकिन अब उन्हें प्रकृति का मित्र माना जाता है। आज भी कुछ देश ऐसे हैं जो सांप की तरह व्यवहार करते हैं – चुपचाप फन समेटे हुए, लेकिन भीतर से विषैले।”
उन्होंने कहा कि हमें अपने आत्मबोध को पहचानना होगा, तभी हम किसी भी स्थिति में डटे रह सकते हैं।
भारत के आत्मविश्वास से डर रहा है पश्चिम
भागवत ने कहा कि आज भारत आत्मविश्वास के साथ खड़ा है और यह कुछ देशों को रास नहीं आ रहा। “दुनिया उसी की सुनती है जो मजबूत होता है। हमें एक देश के रूप में एकजुट होकर जीना है, आगे बढ़ना है।”
ज्ञान के साथ आता है आत्मबोध
अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि आज के समय में ज्ञान बढ़ा है, लेकिन साथ में आत्मबोध की जरूरत और अधिक हो गई है। उन्होंने कहा कि संघ के बाहर के लोग भी आज यह सोचते हैं कि “मैं कौन हूं, शरीर के बाद क्या है?” यह विचार प्रक्रिया समाज को आत्म-केन्द्रित नहीं, बल्कि जिम्मेदार बनाती है।
मुख्य बिंदु:
- मोहन भागवत ने सांप की कथा के ज़रिए अमेरिका पर परोक्ष हमला बोला
- भारत की तरक्की से घबराई वैश्विक शक्तियों पर टैरिफ और कूटनीति से दबाव बनाने का आरोप
- कहा: “दुनिया उसी की सुनती है जो खुद को बना लेता है”
- आत्मबोध और ज्ञान के संतुलन पर ज़ोर
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