यमन में हत्या के आरोप में फांसी की सजा पाए जाने के बाद जेल में बंद केरल की नर्स निमिषा प्रिया को बड़ी राहत मिली है। ताजा रिपोर्ट के अनुसार, 16 जुलाई को दी जाने वाली फांसी फिलहाल टाल दी गई है। भारत सरकार की ओर से लगातार किए जा रहे प्रयासों और कूटनीतिक पहल के चलते यह अहम फैसला सामने आया है।
निमिषा प्रिया को यमन की अदालत ने वर्ष 2020 में एक स्थानीय नागरिक की हत्या का दोषी ठहराते हुए फांसी की सजा सुनाई थी। वे पिछले लगभग सात वर्षों से जेल में बंद हैं। भारत सरकार इस मामले को अत्यधिक संवेदनशील मानते हुए लगातार यमन सरकार से संपर्क में थी और उनकी फांसी रुकवाने की हरसंभव कोशिश कर रही थी।
क्या है पूरा मामला?
केरल के पलक्कड़ जिले की रहने वाली निमिषा प्रिया एक नर्स हैं और लगभग दो दशक पहले अपने पति और बेटी के साथ यमन गई थीं। वहां वे एक क्लिनिक में काम कर रही थीं।
हालांकि, वर्ष 2014 में उनका पति और बेटी भारत लौट आए, लेकिन यमन में जारी गृहयुद्ध और उड़ानों पर लगे प्रतिबंधों के चलते निमिषा वहां फंस गईं।
वर्ष 2017 में उन पर यमन के एक नागरिक तलाल एब्दो महदी की हत्या का आरोप लगा। स्थानीय पुलिस के अनुसार, निमिषा ने महदी को कथित तौर पर बेहोशी का इंजेक्शन दिया था ताकि वह उससे अपना पासपोर्ट वापस ले सकें। लेकिन इंजेक्शन की ओवरडोज के चलते महदी की मौत हो गई।
इस मामले में निमिषा को दोषी करार देते हुए अदालत ने उन्हें मृत्युदंड सुनाया।

भारत सरकार की कोशिशें रंग लाईं
निमिषा की मां और परिजनों ने बीते कुछ वर्षों में केंद्र सरकार से बार-बार मदद की गुहार लगाई थी। इसके बाद विदेश मंत्रालय और अन्य राजनयिक चैनलों के माध्यम से यमन सरकार से लगातार संपर्क किया गया।
हाल ही में कुछ सामाजिक संगठनों और कानूनी विशेषज्ञों ने भी यमन की अदालत में निमिषा की सजा को टालने की अपील की थी। अब खबर आई है कि 16 जुलाई को होने वाली फांसी को रोक दिया गया है।
हालांकि, यह अभी स्पष्ट नहीं है कि सजा को पूरी तरह माफ किया गया है या सिर्फ कुछ समय के लिए टाला गया है। लेकिन यह ज़रूर साफ है कि भारत के लिए यह एक राजनयिक सफलता है।
बेटी से मिलने की आस
निमिषा की एक नाबालिग बेटी है जो भारत में अपने रिश्तेदारों के साथ रह रही है। पिछले सात वर्षों से मां-बेटी की मुलाकात नहीं हो पाई है। परिजनों को अब उम्मीद है कि यह राहत निमिषा की रिहाई की दिशा में पहला कदम हो सकता है।
आगे क्या?
फिलहाल निमिषा यमन की जेल में ही हैं। भारतीय दूतावास और विदेश मंत्रालय लगातार उनकी स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। कुछ रिपोर्ट्स के मुताबिक, “ब्लड मनी” (मुआवज़ा) के ज़रिए सजा माफ करवाने की कोशिश भी की जा रही है, जो यमन के कानून में एक विकल्प है।
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इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विदेशों में काम कर रहीं भारतीय महिलाओं की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।









