ओमान की खाड़ी और आसपास के समुद्री क्षेत्र में भारतीय नाविकों से जुड़े जहाजों पर हालिया हमलों को लेकर भू-राजनीतिक विश्लेषक ब्रह्मा चेलानी ने भारत सरकार की प्रतिक्रिया पर सवाल उठाए हैं। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर किए गए अपने पोस्ट में उन्होंने दावा किया कि यदि ऐसी घटनाओं में भारतीयों की बजाय चीनी नागरिकों की मौत हुई होती, तो चीन की प्रतिक्रिया कहीं अधिक कड़ी और आक्रामक होती।
क्या कहा ब्रह्मा चेलानी ने?
चेलानी ने अपने पोस्ट में कहा कि 8 से 11 जून के बीच भारतीय चालक दल वाले विदेशी ध्वजधारी टैंकरों पर हुए हमलों के बाद भारत की प्रतिक्रिया मुख्य रूप से राजनयिक विरोध तक सीमित दिखाई दी। उन्होंने आरोप लगाया कि एक घटना में भारतीय नाविकों की मौत के बावजूद मामले को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उतनी मजबूती से नहीं उठाया गया, जितनी अपेक्षा की जा सकती थी।
उनके अनुसार, चीन ऐसी स्थिति को केवल समुद्री सुरक्षा की घटना नहीं बल्कि अपने नागरिकों के खिलाफ गंभीर उकसावे के रूप में देखता और इसे बड़े कूटनीतिक मुद्दे में बदल सकता था।
भारत-चीन प्रतिक्रिया की तुलना
भू-राजनीतिक विशेषज्ञ ने अपने विश्लेषण में कहा कि बीजिंग आमतौर पर अपने नागरिकों की सुरक्षा से जुड़े मामलों पर कठोर रुख अपनाता है। उन्होंने अनुमान जताया कि यदि चीनी नाविक किसी समान घटना में मारे जाते, तो चीन सार्वजनिक विरोध, राजनयिक दबाव और विभिन्न रणनीतिक कदमों के जरिए अपनी नाराजगी दर्ज कराता।
हालांकि यह चेलानी का व्यक्तिगत आकलन है और चीन की संभावित प्रतिक्रिया को लेकर की गई टिप्पणी एक विश्लेषणात्मक राय के रूप में देखी जा रही है।
1999 की घटना का दिया उदाहरण
अपने तर्क को मजबूत करने के लिए चेलानी ने 1999 में तत्कालीन यूगोस्लाविया की राजधानी बेलग्रेड में चीनी दूतावास पर हुए अमेरिकी बम हमले का उल्लेख किया। उस घटना में चीनी नागरिकों की मौत हुई थी, जिसके बाद चीन और अमेरिका के संबंधों में गंभीर तनाव पैदा हो गया था।
विशेषज्ञों का मानना है कि उस समय की अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियां और वर्तमान भू-राजनीतिक परिदृश्य काफी अलग हैं, फिर भी चेलानी ने इसे राष्ट्रीय प्रतिक्रिया के एक उदाहरण के तौर पर पेश किया है।
समुद्री सुरक्षा पर बढ़ी चिंता
हाल के दिनों में ओमान की खाड़ी और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के आसपास व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ी हैं। भारतीय चालक दल वाले कई जहाजों के प्रभावित होने के बाद भारत ने समुद्री सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर सक्रियता दिखाई है और संबंधित देशों के साथ संपर्क बनाए रखा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि पश्चिम एशिया के संवेदनशील समुद्री मार्ग वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं। ऐसे में किसी भी सुरक्षा घटना का असर केवल संबंधित देशों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि वैश्विक बाजारों और समुद्री परिवहन पर भी पड़ सकता है।
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कूटनीतिक और रणनीतिक बहस तेज
ब्रह्मा चेलानी की टिप्पणी के बाद सोशल मीडिया और रणनीतिक मामलों के जानकारों के बीच यह बहस तेज हो गई है कि विदेशों में भारतीय नागरिकों की सुरक्षा से जुड़े मामलों पर भारत को किस स्तर की प्रतिक्रिया देनी चाहिए। वहीं सरकार की ओर से अब तक आधिकारिक स्तर पर नागरिकों की सुरक्षा और समुद्री हितों की रक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता बताया गया है।









