ओमान के समुद्री क्षेत्र और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के आसपास व्यापारिक जहाजों पर बढ़ते हमलों को लेकर भारत सरकार ने गंभीर चिंता व्यक्त की है। हाल के दिनों में भारतीय नाविकों से जुड़े जहाजों को लगातार निशाना बनाए जाने के बाद विदेश मंत्रालय ने अमेरिका के कार्यकारी राजदूत को तलब कर स्थिति पर चर्चा की।
सूत्रों के अनुसार, अमेरिकी अधिकारी ने विदेश मंत्रालय में वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक की, जिसमें समुद्री सुरक्षा और भारतीय नागरिकों की सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर विस्तार से बातचीत हुई। यह कुछ दिनों के भीतर दूसरी बार है जब भारत ने इस विषय पर अमेरिकी पक्ष से औपचारिक संवाद किया है।
पिछले चार दिनों में भारतीय चालक दल वाले तीन अलग-अलग व्यापारिक जहाजों पर हमलों की घटनाओं ने समुद्री मार्गों की सुरक्षा को लेकर नई चिंताएं खड़ी कर दी हैं। इन घटनाओं में एक हमले में भारतीय नाविकों की मौत की पुष्टि भी हुई है, जिससे मामला और संवेदनशील हो गया है।
समुद्री सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, अरब सागर से जुड़े महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक मार्गों पर बढ़ते जोखिम को देखते हुए भारतीय नाविकों के लिए विशेष सुरक्षा दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। इन निर्देशों का उद्देश्य ओमान की खाड़ी, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज और आसपास के संवेदनशील समुद्री क्षेत्रों में कार्यरत भारतीय क्रू सदस्यों को संभावित खतरों से सतर्क करना है।
हाल की घटनाओं में एक तेल टैंकर पर हमला होने के बाद आग लगने की सूचना मिली थी, हालांकि उस जहाज पर मौजूद भारतीय चालक दल सुरक्षित बच गया। दूसरी घटना में भारतीय नाविकों को लेकर जा रहे एक अन्य टैंकर को निशाना बनाया गया, जिसमें कई लोगों को बचा लिया गया, लेकिन कुछ भारतीयों की जान चली गई। इसके बाद तीसरे जहाज पर हमले की खबर ने समुद्री सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
भारत सरकार लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है और प्रभावित जहाजों पर मौजूद भारतीय नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए संबंधित देशों और अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों के संपर्क में है। विशेषज्ञों का मानना है कि पश्चिम एशिया के समुद्री क्षेत्र में बढ़ते तनाव का असर वैश्विक व्यापारिक मार्गों और ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला पर भी पड़ सकता है।
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समुद्री क्षेत्र में लगातार हो रही घटनाओं के बीच भारत ने स्पष्ट संकेत दिया है कि भारतीय नाविकों और व्यापारिक हितों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर कूटनीतिक स्तर पर और सक्रिय प्रयास देखने को मिल सकते हैं।








