PoJK Protest: पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर (PoJK) में सरकार और सुरक्षा बलों के खिलाफ जारी विरोध प्रदर्शनों को लेकर भारत ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। विदेश मंत्रालय का कहना है कि क्षेत्र में हो रहा जनआंदोलन वहां के लोगों की लंबे समय से चली आ रही समस्याओं और असंतोष का परिणाम है। भारत ने आरोप लगाया कि स्थानीय लोगों की शिकायतों का समाधान करने के बजाय पाकिस्तान प्रशासन बल प्रयोग का रास्ता अपना रहा है।
विदेश मंत्रालय ने क्या कहा?
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर में रहने वाले लोग वर्षों से बुनियादी सुविधाओं की कमी, प्रशासनिक दमन और अधिकारों से जुड़े मुद्दों का सामना कर रहे हैं। उनके अनुसार, मौजूदा विरोध प्रदर्शन उसी असंतोष की अभिव्यक्ति हैं।
उन्होंने कहा कि लोगों की मांगों पर ध्यान देने के बजाय प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जा रही है, जिससे क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया है।
भारत ने लगाए गंभीर आरोप
भारत ने आरोप लगाया कि विरोध प्रदर्शनों को दबाने के लिए सुरक्षा बलों ने बल प्रयोग किया है। विदेश मंत्रालय के अनुसार, महिलाओं और बच्चों सहित आम नागरिकों को भी कार्रवाई का सामना करना पड़ा है।
यह भी दावा किया भारत ने कि कई इलाकों में इंटरनेट सेवाएं बाधित की गई हैं और आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति प्रभावित हुई है। विदेश मंत्रालय ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से इस पूरे घटनाक्रम पर ध्यान देने और मानवाधिकारों से जुड़े मामलों को गंभीरता से देखने की अपील की।
15 जुलाई को बड़े मार्च का आह्वान
पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर में सक्रिय जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) ने 15 जुलाई को मुजफ्फराबाद की ओर बड़े मार्च की घोषणा की है।
संगठन ने क्षेत्र के लोगों से बड़ी संख्या में प्रदर्शन में शामिल होने की अपील की है। हाल के दिनों में बढ़ते विरोध प्रदर्शनों के कारण पूरे इलाके में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है।
हालिया प्रदर्शन में बढ़ा तनाव
रविवार को आयोजित एक बड़े विरोध प्रदर्शन के दौरान स्थिति और तनावपूर्ण हो गई। विभिन्न रिपोर्टों के अनुसार, बड़ी संख्या में लोग रैली में शामिल हुए थे।
JAAC ने आरोप लगाया है कि प्रदर्शन के दौरान पाकिस्तानी सुरक्षा बलों की ओर से गोलीबारी की गई, जिसमें कई लोग घायल हुए। संगठन का यह भी दावा है कि हालिया घटनाओं में कई लोगों की जान गई है।
इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है।
भारत की अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील
भारत ने कहा है कि क्षेत्र में मानवाधिकारों और नागरिक स्वतंत्रताओं से जुड़े मामलों पर वैश्विक समुदाय को गंभीरता से ध्यान देना चाहिए। विदेश मंत्रालय का कहना है कि लोगों की लोकतांत्रिक मांगों का समाधान संवाद और शांतिपूर्ण तरीकों से होना चाहिए।
PoJK क्यों बना हुआ है संवेदनशील मुद्दा?
पाकिस्तान के कब्जे वाला जम्मू-कश्मीर लंबे समय से भारत और पाकिस्तान के बीच विवाद का विषय रहा है। भारत का स्पष्ट रुख है कि पूरा जम्मू-कश्मीर, जिसमें PoJK भी शामिल है, उसका अभिन्न अंग है। दूसरी ओर, पाकिस्तान इस क्षेत्र पर अपना नियंत्रण बनाए हुए है।
ऐसे में वहां होने वाली राजनीतिक और सामाजिक गतिविधियों पर दोनों देशों की नजर रहती है और किसी भी बड़े घटनाक्रम का असर द्विपक्षीय संबंधों पर भी पड़ सकता है।
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अब सभी की नजर 15 जुलाई को प्रस्तावित मुजफ्फराबाद मार्च पर रहेगी। यदि बड़ी संख्या में लोग इसमें शामिल होते हैं, तो क्षेत्र की स्थिति और अधिक संवेदनशील हो सकती है। वहीं, भारत ने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की है कि वह क्षेत्र में मानवाधिकारों और नागरिकों की सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर निष्पक्ष ध्यान दे।








