भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता और उत्तर प्रदेश के कैसरगंज से पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह को कथित यौन शोषण से जुड़े मामले में बड़ी कानूनी राहत मिली है। दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने सुनवाई के बाद उन्हें आरोपों से बरी कर दिया। अदालत ने इस मामले में सह-आरोपी विनोद तोमर को भी दोषमुक्त घोषित किया।
फैसले के दौरान दोनों आरोपी अदालत में मौजूद थे। हालांकि, विस्तृत आदेश की प्रति उपलब्ध होने के बाद ही अदालत के फैसले के कानूनी आधार स्पष्ट हो सकेंगे।
फैसले से पहले क्या बोले थे बृजभूषण शरण सिंह?
अदालत का निर्णय आने से पहले बृजभूषण शरण सिंह ने मीडिया से संक्षिप्त बातचीत में कहा कि वह केवल अदालत का फैसला सुनने आए हैं और उन्हें न्यायपालिका पर पूरा भरोसा है। उन्होंने कहा कि अंतिम निर्णय अदालत के हाथ में है और वही सर्वोपरि होगा।
बरी होने के बाद दी पहली प्रतिक्रिया
अदालत से राहत मिलने के बाद बृजभूषण शरण सिंह ने कहा कि उन्हें शुरू से विश्वास था कि न्यायालय में सच्चाई सामने आएगी। उन्होंने कहा कि यदि उनके खिलाफ आरोप सिद्ध होते तो वह अदालत के फैसले को स्वीकार करते, लेकिन अब अदालत ने उन्हें और विनोद तोमर दोनों को आरोपों से मुक्त कर दिया है।
उन्होंने इसे अपने समर्थकों के लिए भी संतोष का क्षण बताते हुए कहा कि न्यायिक प्रक्रिया पर उनका विश्वास कायम रहा।
राजनीतिक टिप्पणी भी की
फैसले के बाद मीडिया से बातचीत में बृजभूषण शरण सिंह ने कहा कि उन्होंने जीवन में लंबे समय तक संघर्ष किया है और कभी स्वयं को दोषी नहीं माना। उन्होंने दावा किया कि वह हमेशा युवा खिलाड़ियों के हितों की आवाज उठाते रहे हैं।
इसके साथ ही उन्होंने बिना किसी का नाम लिए आरोप लगाया कि इस पूरे विवाद के दौरान कई राजनीतिक दल और नेता पहलवानों के समर्थन में सक्रिय रहे। उन्होंने कहा कि इस मामले को राजनीतिक रंग भी दिया गया था।
हालांकि अदालत ने दोनों आरोपियों को बरी कर दिया है, लेकिन मामले के विस्तृत आदेश के सार्वजनिक होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि अदालत ने किन कानूनी आधारों पर यह फैसला दिया। यदि किसी पक्ष को निर्णय पर आपत्ति होती है, तो भारतीय कानून के तहत उच्च अदालत में अपील का विकल्प भी उपलब्ध रहता है।









