ग्रामीण क्षेत्रों में स्थानीय शासन को मजबूत बनाने और पंचायतों की कार्यक्षमता बढ़ाने के उद्देश्य से केंद्र सरकार द्वारा राष्ट्रीय ग्राम स्वराज अभियान (आरजीएसए) संचालित किया जा रहा है। इस योजना के तहत पंचायती राज संस्थाओं के प्रतिनिधियों को प्रशिक्षण देकर उन्हें बेहतर प्रशासन और विकास कार्यों के लिए सक्षम बनाने पर विशेष जोर दिया जा रहा है।
पंचायत प्रतिनिधियों की क्षमता बढ़ाने पर जोर
योजना का मुख्य उद्देश्य ग्राम पंचायतों को शासन के तीसरे स्तर के रूप में प्रभावी ढंग से कार्य करने के लिए तैयार करना है। इसके तहत निर्वाचित पंचायत प्रतिनिधियों को नेतृत्व और प्रशासनिक कौशल से जुड़ा प्रशिक्षण दिया जाता है, ताकि वे अपने क्षेत्रों में विकास योजनाओं को बेहतर तरीके से लागू कर सकें।
ग्राम सभाओं को सशक्त बनाने की पहल
राष्ट्रीय ग्राम स्वराज अभियान के माध्यम से ग्राम सभाओं को भी अधिक सक्रिय बनाने पर ध्यान दिया जा रहा है। ग्राम सभा को पंचायत व्यवस्था में जनता की भागीदारी का सबसे महत्वपूर्ण मंच माना जाता है। इसलिए योजना के जरिए लोगों की भागीदारी बढ़ाने और निर्णय प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाने की कोशिश की जा रही है।
ई-गवर्नेंस और तकनीक का उपयोग
पंचायत प्रशासन को अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनाने के लिए ई-गवर्नेंस और तकनीक आधारित प्रणालियों को बढ़ावा दिया जा रहा है। डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए योजनाओं की निगरानी, सेवा वितरण और वित्तीय प्रबंधन को बेहतर बनाने का प्रयास किया जा रहा है।
संवैधानिक प्रावधानों के अनुरूप अधिकारों का हस्तांतरण
इस अभियान का एक प्रमुख लक्ष्य पंचायतों को अधिक अधिकार और जिम्मेदारियां सौंपना भी है। संविधान और पेसा अधिनियम, 1996 की भावना के अनुरूप पंचायतों को निर्णय लेने और विकास कार्यों को लागू करने में अधिक स्वायत्तता देने पर जोर दिया जा रहा है।
मांग आधारित योजना के रूप में कार्यान्वयन
संशोधित राष्ट्रीय ग्राम स्वराज अभियान एक मांग आधारित योजना है। इसके तहत राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को उनकी वार्षिक कार्य योजना और खर्च की प्रगति के आधार पर केंद्र से वित्तीय सहायता दी जाती है। इसके लिए उपयोगिता प्रमाण पत्र और ऑडिट रिपोर्ट जैसे आवश्यक दस्तावेज भी जमा करने होते हैं।
नियमित समीक्षा और निगरानी
योजना के कार्यान्वयन की नियमित समीक्षा प्रशिक्षण प्रबंधन पोर्टल, बैठकों और वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से की जाती है। इसके अलावा मंत्रालय के अधिकारी समय-समय पर क्षेत्रीय दौरे भी करते हैं, ताकि योजनाओं की प्रगति का आकलन किया जा सके।
मूल्यांकन में सकारात्मक परिणाम
ग्रामीण प्रबंधन संस्थान, आनंद (आईआरएमए) द्वारा किए गए बाह्य मूल्यांकन में पाया गया कि इस योजना के तहत आयोजित प्रशिक्षण कार्यक्रमों से पंचायत प्रतिनिधियों की क्षमता में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। योजना निर्माण, डिजिटल प्रशासन, जनभागीदारी और वित्तीय प्रबंधन जैसे क्षेत्रों में सकारात्मक बदलाव देखने को मिले हैं।
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नीति आयोग की रिपोर्ट में भी सराहना
नीति आयोग द्वारा कराए गए एक स्वतंत्र अध्ययन में भी यह सामने आया कि राष्ट्रीय ग्राम स्वराज अभियान ने जमीनी स्तर पर प्रशासनिक क्षमता को मजबूत करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। इसके साथ ही योजना ने पारदर्शिता, जवाबदेही, लैंगिक समावेशन और डिजिटल संसाधनों के बेहतर उपयोग को भी बढ़ावा दिया है।









